जिले में कौन है जो वनरक्षक की मौत का संज्ञान लेगा …

क्या प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव वनरक्षक ओमप्रकाश लोधी को प्रशासनिक अमले द्वारा दी गई मौत का संज्ञान लेंगे ?

कहाँ है जिले के संवेदनशील सांसद , समाजसेवी जो असली गुनहगारों को सजा दिला सकें ..

वन आरक्षक के पद पर पदस्थ ओम प्रकाश लोधी की मौत से वन विभाग के आलाधिकारियों में सनसनी फैल गई है! वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस मामले को रफादफा करने के मूड में दिखाई पड रहे है ! मीडिया कर्मियों का सामना करने में ये कतरा रहे है ! दबी जुबान से ये नराधम ओमप्रकाश को म्रत्युप्रांत शराबी घोषित करने पर तुले हुए है ! पश्चिमी वन मंडलाधिकारी श्री जारंडे इस बात से खौफजदा है कि इनके द्वारा ही स्व ओमप्रकाश लोधी को सबसे ज्यादा प्रताड़ित किया गया ! संवारी रेंज में रहते हुए ही श्री जारंडे से ओम प्रकाश का झगडा हुआ था ! उसके बाद से ओम प्रकाश को बार -बार झूठे इल्जामो के चलते उसका तबादला संवारी रेंज से देलाखारी और फिर जिले के कालापानी क्षेत्र संगाखेडा बतौर पनिश्मेंट भेजा गया ….राकेश प्रजापति 

जानकार बताते है की पश्चिमी वन मंडलाधिकारी से लगातार गुहार लगाने के बाबजूद भी श्री जारंडे का दिल नही पसीजा वे लगातार उस पर जुल्म ढाते रहे ! अत्यधिक प्रताड़ित होने के बाद वनरक्षक ओम प्रकाश ने जुगाड़ लगा कर अपना डिविजन चेंज कर लिया और वह हर्रई उत्पादन के सलैया काष्ठागार पदस्थ हो गया , परन्तु उसके बुरे दिन नही बदले उस पर विभागीय प्रताड़ना का दौर बदस्तूर जारी रहा !

उसके निलंबन,असंच्य वेतन वृद्धि रोककर तथा निलंबन अवधि के दौरान कटी हुई वेतन और समयमान वेतनमान लाभ 2017 से नहीं दिए जाने तथा सवा साल से चार बार स्थान स्थानांतरण और बीते 9 माह से वेतन रोका रहा ! आर्थिक और मानसिक प्रताड़ना से गम गलत करने के लिए ओम प्रकाश मदिरापान करने लगा ! कमाई का और कोई साधन न होने के चलते परिवार के सामने खाने के लाले पड़ने लगे!

साथी वनरक्षकों के मुताबिक ओम प्रकाश ने विभागीय अधिकारियो और जिला कलेक्टर को साथियों के कहने पर अंतिम अरदास 6 जून 2024 को लगाई जिसमे उसने पत्नी और 14 साल के बच्चा सहित आत्महत्या की अनुमति प्रदान करने का जिक्र किया , परन्तु जिले की निष्ठुर होती व्यवस्था और पत्थर दिल निकम्मे वरिष्ठ अधिकारीयों ने इतने गंभीर और संवेदनशील मामले को भी नजरंदाज कर दिया ! अंजाम कल ओम प्रकाश की मौत की खबर ने पूरी व्यवस्था की पोल खोल कर रखा दी !

ओम प्रकाश तो विभागीय प्रताड़ना से मुक्त हो परलोकगमन कर गया , पीछे छोड़ गया पत्नी और 14 साल के उस मासूम को , जिसे अभी यह भी पता नहीं है की उसके पिता का असली हत्यारा कौन है ? किसने उसकी माँ की मांग सूनी कर उसके लालन पालन-पोषण के लिए लोगों के सामने हाथ फैलाने को मजबूर कर दिया है ! धिक्कार है ऐसी व्यवस्था को जिसमे कोई संवेदन शीलता न हो ! जहाँ जनप्रतिनिधि पाञ्च साल में वोट मांगने तो हाथ फैलाते है ,परन्तु जीतने के बाद लोगों के दुःख दर्द और उन पर हो रही ज्यादतियों पर लगाम लगाने के लिये जनता का हाथ थाम सकेगे ! वर्ना आए दिन हमें फिर किसी ओम प्रकाश की लाश मिलेगी ….