पारिस्थितिकी तंत्र की अनुभूति से रूबरू हुए बच्चे ..

जंगल रोमांचकारी रणभूमि है जहाँ अनेक पात्र बोलते, सुनते, देखते, चलते, खाते और रहते हैं। यह पात्र सीमेंट और ईंट से घर नहीं बनाते बल्कि खुले आसमान के नीचे आनन्द में बसे हैं। बस इसी जंगल में जीव जन्तुओं को देखना, सुनना और समझना प्रकृति भ्रमण है। ईकोपर्यटन प्रकृति की सुन्दरता का आनन्द लेते हुए पर्यावरण संरक्षण ,संवर्धन के प्रमुख वाहक स्कूली बच्चो को जागरूक कर प्रकृति संरक्षण संवर्धन के साथ-साथ जैव विविधता , पारिस्थितिकी तंत्र के मार्ग को प्रशस्त करने की दिशा मे शान्तिपूर्ण प्रकृति भ्रमण का आव्हान कर रहा है , ताकि जिस सुंदरता से जंगल जीता है, वह आप भी समझेंगे तो जंगल से बहुत प्यार करेंगे ,बेशक ….

पश्चिमी वन मंडल छिंदवाड़ा अंतर्गत वन परिक्षेत्र अधिकारी कीर्ति वाला गुप्ता के नेतृत्व में साँवरी वन परीक्षेत्र अंतर्गत हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी लावाघोगरी नर्सरी एवं कन्हान नदी के तट क्षेत्र में स्कूली छात्र छात्राओं के लिए प्रशिक्षण सह जागरूकता अभियान अनुभूति कार्यक्रम का आयोजन किया गया ! इस कार्यक्रम में ग्राम लावाघोगरी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के 75 छात्र-छात्राओं एवं मूक बधीर शासकीय विद्यालय के 50 दिव्यांग छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में अनुभूति मास्टर ट्रेनर सेवा निवृत उपवन संरक्षक जेपी शिवहरे प्रेरक बृजेश सिंह परिहार अरुण नागवंशी एवं सागर दास उदासी द्वारा प्रशिक्षण प्रदाय किया गया।

प्रशिक्षण शह जागरूकता अनुभूति विशेष कार्यक्रम कई तरह से महत्वपूर्ण रहा, स्कूली बच्चों ने एडवेंचर स्पोर्ट्स के रूप में नेचर ट्रेल एवं जंगल वॉक का आनंद लिया खाद्य श्रृंखला जोड़ो एवं बनाओ जैसे छोटे-छोटे महत्वपूर्ण गेम्स के माध्यम से बच्चों को पारिस्थितिकी तंत्र का महत्व बताया गया। मिट्टी के वन्य जीव एवं उनके प्रतिरूप जैसे बाघ तेंदुआ तितलियां इत्यादि को बनाकर उनमें रंग भरो प्रतियोगिता का आयोजन किया गया

परिक्षेत्र अधिकारी कीर्ति बाला गुप्ता ने बताया कि इस बार की थीम *हम हैं बदलाव* पर मुख्य जोर देते हुए कार्यक्रम पूरी तरह से इको फ्रेंडली बनाया गया किसी भी रूप से प्लास्टिक का उपयोग कार्यक्रम में नहीं किया गया पत्तों से बने दोना पत्तल मिट्टी के गिलास एवं बांस से बने उपहार एवं गिफ्ट जैसे बांस के बने पेन, ब्रश तथा कंघी के साथ-साथ पूरा का पूरा आयोजन स्थल फूल पत्तों बांस मिट्टी के मॉडल घास फूस इत्यादि से सजाया गया । कपड़ों के बने बैनर का उपयोग किया गया *SAY NO TO PLASTIC* का मंत्र बच्चों को सिखाया गया। अनुभूति लोगों लिटिल बाघ को मिट्टी से बना सेल्फी पॉइंट लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र रहा। सभी ने सेल्फी प्वाइंट के लिटिल बाघ तरह मैं भी बाघ के गुण अपनाने की प्रेरणा ली, साथ ही पैंगोलिन के मॉडल से उसकी सुरक्षा करने का संकल्प लिया। बच्चों को कपड़ों से थैला बनाने की कला के साथ-साथ जड़ी बूटियां पहचान करवाना भी सिखाया गया । कार्यक्रम में वनोंपज से बने फूड आइटम भी लोगों की प्रशंसा का विषय रहे।आंवला की बर्फी आंवला की चटनी एवं कुटकी की खीर का सभी में मन भर कर स्वाद लिया।

कार्यक्रम में लावाघोगरी क्षेत्र से सरपंच महोदय श्रीमती गीता इवनाती एवं ग्राम वन समिति बोदलढाना के अध्यक्ष एवं सांवरी परिक्षेत्र के परिक्षेत्र सहायक श्री एस एस मिश्रा, श्री पवन ढेपे, श्री उमंग वर्मा, श्री आशीष दास, श्री योगेश उइके, श्री अजय शिवहरे, श्रीमती कमला पाटिल एवं वनरक्षक केदार साहू धर्मेंद्र ब्रम्हे तथा परीक्षेत्र के अन्य वनरक्षकों का विशेष योगदान रहा।