छिंदवाड़ा बस कांड: “यह हादसा नहीं, सरकारी कत्ल है!” – जीतू पटवारी का मोहन सरकार पर भीषण प्रहार
छिंदवाड़ा// जिले में हुए रूह कंपा देने वाले बस हादसे ने अब प्रदेश की सियासत में ‘ज्वाला’ फूंक दी है। शनिवार को पीड़ित परिवारों के बीच पहुंचे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शिवराज सरकार की विरासत और मोहन यादव के वर्तमान प्रशासन को कठघरे में खड़ा करते हुए इसे महज दुर्घटना मानने से इनकार कर दिया। पटवारी ने दहाड़ते हुए कहा— “यह सड़क हादसा नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र द्वारा की गई हत्या है!”
शवों पर ‘इवेंट’ की राजनीति ? मुख्यमंत्री को घेरा
पटवारी ने सीधे मुख्यमंत्री मोहन यादव पर हमला बोलते हुए कहा कि उन्हें इस सामूहिक मृत्यु पर “शर्म आनी चाहिए।” उन्होंने आरोप लगाया कि:
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भीड़ का दबाव: मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में संख्या बल दिखाने के लिए प्रशासन ने गरीब जनता,पंचायत सचिव, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, नल चालकों और रसोइयों पर जबरन आने का दबाव बनाया।
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असंवेदनशीलता की पराकाष्ठा: जब 10 घर उजड़ गए, तब मुख्यमंत्री ‘इवेंट’ करने में व्यस्त थे। आम आदमी की सुरक्षा को ताक पर रखकर केवल अपनी ब्रांडिंग की गई।
5 हजार की ‘भीख’ और 1 करोड़ की मांग : पीड़ित परिवारों के आंसू पोंछते हुए पटवारी का गुस्सा तब और भड़क गया जब उन्हें पता चला कि मृतकों के परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए महज 5 हजार रुपए थमा दिए गए हैं। इसे जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा बताते हुए उन्होंने मांग की:
“5 हजार में किसी की जान की कीमत नहीं आंकी जा सकती। सरकार तुरंत प्रत्येक मृतक के परिवार को 1-1 करोड़ रुपए का मुआवजा दे!”
एक 17 वर्षीय बेटी की चीखें… कौन है जिम्मेदार ?
पटवारी ने अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार,झिरिया, झामटा और मुआर गांवों का दौरा करते हुए एक हृदयविदारक उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि इस खूनी हादसे में एक 17 साल की मासूम बच्ची ने अपना पूरा परिवार खो दिया है। उस बच्ची की उजड़ी दुनिया का गुनहगार कौन है ? पटवारी ने सीधे कलेक्टर और जिला प्रशासन को इस मौत का जिम्मेदार ठहराते हुए उन पर सख्त कार्रवाई और एफआईआर की मांग की है।
प्रशासनिक अमले का ‘गुलाम’ की तरह इस्तेमाल : प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने तीखे शब्दों में कहा कि छिंदवाड़ा का प्रशासनिक अमला सत्ता का ‘गुलाम’ बनकर काम कर रहा है। सरकारी कर्मचारियों और आम जनता को भेड़-बकरियों की तरह बसों में भरकर ले जाना ही इस मौत का मुख्य कारण बना।
विपक्ष के इस ‘आक्रामक’ रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि भोपाल से लेकर दिल्ली तक इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी है। अब देखना यह है कि ‘सरकारी हत्या’ के इस गंभीर आरोप पर मोहन सरकार क्या सफाई देती है।
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