भ्रस्ट वनाधिकारीयों के गिरोह ने वनरक्षक को मरने पर किया मजबूर ..

वनमंडल उत्पादन में पदस्त वन रक्षक ओमप्रकाश वर्मा की संदिग्ध मौत से पूरे वन महकमे में हडकंप का माहौल है ! पश्चिम वनमंडलाधिकारी (सा) , उत्पादन वनमंडलाधिकारी अमित बसंत निकम और मुख्य वनसंरक्षक मधु वी राज अपनी खाल बचने के लिए परोक्ष रूप से एक दुसरे को दवी जुबान से गुनाहगार ठहरा रहे है ! साथ ही मरणोपरांत वनरक्षक को अखण्ड शराबी और बदमिजाज निरुपित करने पर तुले हुए है ! वक्त रहते अगर मुख्य वनसंरक्षक मधु वी राज मामले को सज्ञान ले लेते तो वनरक्षक आज जिन्दा होता , परन्तु मामला शांत नही होने बाला, जब तक स्व ओमप्रकाश वर्मा की असमयिक मौत के गुनाहगार् सलाखों के पीछे नही होंगे….राकेश प्रजापति 

वनरक्षक ओमप्रकाश वर्मा की कथा बड़ी व्यथा भरी है ! उसके दुर्दिनो की शुरुवात पश्चिम वनमंडलाधिकारी (सा) जारंडे ईश्वर रामहरि के आते ही शुरू हो गई थी , संवारी रेंज में उस समय करोड़ों के कार्य किए जा रहे थे ,जैसे संवारी टांकी में 1 करोड़ 17 लाख 61 हजार 406 रूपये इसी तरह संवारी मड़ाई में 1 करोड़ 93 लाख 60 हजार 341 रूपये के अलावा संवारी वन परिक्षेत्र में वैकल्पिक वृक्षारोपण , रोड साइड प्लान्टेशन , संवारी मुलताई रोड पर दोनों ओर के ग्राम प्रधान धोधारी , लावाधोधारी ,मैनिखापा , चूड़ाबोह, गोविन्दबाड़ी , परसिया-बैतूल मार्ग में भी वृहद पौध  रोपण के कार्य किए जाने थे !

वहीं 2 करोड़ 25 लाख 27 हजार रुपयों में विभिन्न कार्यो जैसे वैकल्पिक वृक्षारोपण के सीमांकन ,क्षेत्र सफाई , गड्डा खुदाई ,स्टेकिंग, एलाईमेंट , पोध रोपण ,गड्डा की मिटटी बदलना , दीमक व फफूंद रोधी दावा ,बारवेट वायर फेंसिंग जैसे कार्यों में इस गिरोह ने जमकर लूटपाट को अंजाम दिया !

पैसों के लिए अच्छे-अच्छो की नियत ख़राब हो जाती है , तो फिर DFo साहव भी आखिर इंसान ही है, मायाजाल से वे कैसे अछूते रह सकते है ? पहले तो उन्होंने अपनी अफसरशाही से वनपरिक्षेत्र अधिकारी पर दबाव बना कर चांदी काटनी शुरू कर दी ! अवैध पैसों की हवस ने इन्हें इतना मदांध कर दिया की इन्होने वन परिक्षेत्र अधिकारी के माध्यम से छोटे कर्मचारियों पर दबाव बनाकर एक संगठित गिरोह के रूप में अबैध कमाई की फसल काटनी शुरू कर दि ,

वनरक्षक ओमप्रकाश वर्मा को भी गिरोह में शामिल करने के उद्देश्य से अनैतिक कार्य करने के लिए श्री जारंडे ने रेंज आफिसर के मध्यम से दबाव बनाने और काले कारनामों को अंजाम देने के लिए कहा गया जिसमे संवारी रेंज में रेत का अवैध उत्खनन , अवैध कटाई , परिवहन ,अवैध बसूली के दलदल में डुबोने की कोशिशे की गई , स्वभाव से तेज और मुखर ओमप्रकाश के मना करने पर वन परिक्षेत्र अधिकारी और DFo ने मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया , इस बात को लेकर ही ओमप्रकाश की तू-तू मै-मै  DFo जारंडे ईश्वर रामहरि से हुई थी जो काफी चर्चा का विषय बन था !

अत्यधिक मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ना से परेशान वनरक्षक neने अपनी हस्तलिपि से शिकायत तत्कालीन मुख्य वनसंरक्षक और पत्रकारों को की थी , इस बात की जानकारी लगते ही वनरक्षक पर मानो मुसीबतों का पहाड़ ही टूट पड़ा , इसकी जानकारी लगते ही DFo जारंडे ईश्वर रामहरि  ने वनरक्षक लोधी ओमप्रकाश पर अशिष्ट व्यवहार करने का आरोप लगाकर उसके विरुद्ध रेंजर सहित पूरे लूटमार गिरोह की गवही पर वनरक्षक की दो वेतन वृद्धि रोक दि, साथ ही उस पर उच्स्तारिय जाँच की अनुशंसा कर दि !

DFo जारंडे ईश्वर रामहरि की यह कार्यवाही भी दोषपूर्ण थी किसी भी कर्मचारी को एक गुनाह के लिए दो बार कैसे सजा दि जा सकती है ? परन्तु वन विभाग के उच्चाधिकारियों ने इसे भी नजरंदाज कर दिया ! इन सब बेजा हरकते करने के बाद भी DFo जारंडे ईश्वर रामहरि का मन नही भरा तो उन्होंने ओमप्रकाश का तवादला देलाखारी कर दिया ! इनसब झंझटों से परेशान वन रक्षक मानसिक रूप से परेशान रहने लगा जिसका विपरीत प्रभाव उसके परिवार पर पड़ने से पारिवारिक कलह ने अपना स्थाई डेरा जमा लिया ……..जारी