मध्यप्रदेश में ढाई लाख महिलाएं और बच्चियां गायब ..

मध्यप्रदेश में ढाई लाख महिलाएं-बच्चियां गुम: विधानसभा में खुलासा, एपस्टीन जैसे नेटवर्क की आशंका से सियासत गरम ..

✍️  राकेश प्रजापति 

मध्यप्रदेश की राजनीति में महिलाओं और बच्चियों की गुमशुदगी का मुद्दा विस्फोटक रूप लेता जा रहा है। विधानसभा के बजट सत्र में सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों ने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि इस मामले के पीछे अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी गिरोह की आशंका को भी बल दिया है। विपक्ष ने इसे वैश्विक स्तर पर चर्चित जेफ्री एपस्टीन जैसे नेटवर्क से जोड़ते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

6 वर्षों में 2 लाख महिलाएं, 65 हजार बच्चियां लापता

विधानसभा में कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने स्वीकार किया कि पिछले 6 वर्षों में लगभग 2 लाख महिलाएं मध्यप्रदेश से गायब हुईं ,

इनमें करीब 65 हजार नाबालिग बच्चियां शामिल हैं , यह औसतन हर दिन 90 से अधिक महिलाओं और बच्चियों के लापता होने के बराबर है ! ये आंकड़े राज्य में महिला सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर स्थिति को दर्शाते हैं।

NCRB रिपोर्ट में भी मध्यप्रदेश शीर्ष राज्यों में शामिल

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की नवीनतम Crime in India 2023 रिपोर्ट के अनुसार: मध्यप्रदेश लगातार उन राज्यों में शामिल है जहां महिलाओं और नाबालिग लड़कियों की गुमशुदगी के सबसे अधिक मामले दर्ज होते हैं , NCRB के अनुसार, देशभर में दर्ज गुमशुदगी के मामलों में मध्यप्रदेश का हिस्सा चिंताजनक रूप से ऊंचा बना हुआ है , विशेषज्ञों का मानना है कि इन मामलों में से बड़ी संख्या मानव तस्करी, जबरन श्रम, बाल विवाह और यौन शोषण से जुड़ी हो सकती है

NCRB के आंकड़े यह भी संकेत देते हैं कि कई मामलों में लापता महिलाओं का पता वर्षों तक नहीं चल पाता, जिससे संगठित अपराध की आशंका मजबूत होती है।

इंदौर सबसे ज्यादा प्रभावित, 20 हजार से अधिक महिलाएं गायब

राज्य के आर्थिक केंद्र इंदौर से ही पिछले वर्षों में 20 हजार से अधिक महिलाओं के लापता होने के मामले दर्ज हुए हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि बड़े शहरी केंद्र भी सुरक्षित नहीं हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े शहरों में नौकरी और बेहतर जीवन के झांसे में महिलाओं को फंसाया जाता है , मानव तस्करी गिरोह सक्रिय रहते हैं , ऑनलाइन माध्यमों के जरिए भी शिकार बनाए जाने की घटनाएं बढ़ी हैं

कांग्रेस का आरोप: “क्या मध्यप्रदेश में एपस्टीन जैसा नेटवर्क ?”

कांग्रेस ने इस मुद्दे को गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा और महिला सुरक्षा संकट बताते हुए कहा है कि इतने बड़े पैमाने पर महिलाओं का गायब होना सामान्य अपराध नहीं हो सकता ,इसके पीछे संगठित मानव तस्करी नेटवर्क हो सकता है, सरकार को CBI या विशेष जांच एजेंसी से जांच करवानी चाहिए

विपक्ष ने सवाल उठाया कि क्या मध्यप्रदेश में भी अंतरराष्ट्रीय स्तर का संगठित शोषण नेटवर्क सक्रिय है, जैसा कि अमेरिका में जेफ्री एपस्टीन के मामले में सामने आया था।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिस जांच प्रणाली , महिला सुरक्षा योजनाओं की प्रभावशीलता , मानव तस्करी रोकने की रणनीति , इन सभी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

विशेषज्ञों की चेतावनी: यह केवल अपराध नहीं, सामाजिक संकट

महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि  गुमशुदगी के कई मामलों में FIR दर्ज होने के बाद भी जांच धीमी रहती है, ग्रामीण और गरीब परिवारों की बच्चियां सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं , कई मामलों में पुलिस शुरुआती 24 घंटे में प्रभावी कार्रवाई नहीं करती

महिला सुरक्षा पर सबसे बड़ा सवाल

ढाई लाख से अधिक महिलाओं और बच्चियों की गुमशुदगी का खुलासा मध्यप्रदेश की कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है। NCRB के आंकड़े और विधानसभा में दिए गए सरकारी जवाब इस बात की पुष्टि करते हैं कि यह समस्या व्यापक और संरचनात्मक है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह केवल प्रशासनिक विफलता है ? या फिर इसके पीछे संगठित मानव तस्करी का बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है ?

इस मुद्दे पर सरकार की आगामी कार्रवाई और जांच की दिशा ही तय करेगी कि प्रदेश की लाखों महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो पाएगी या नहीं।