“प्रधानमंत्री सड़क योजना में तानाशाही तंत्र”—GM कविता पटवा के फैसलों पर उठे सवाल, चुनिंदा ठेकेदारों पर कहर तो बाकी पर मेहरबानी क्यों ?
छिंदवाड़ा // प्रधानमंत्री ग्रामीण विकास प्राधिकरण इकाई छिंदवाड़ा इन दिनों भारी विवादों और भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण सुर्खियों में है। महाप्रबंधक कविता पटवा पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का उपयोग करते हुए तानाशाही, पक्षपातपूर्ण कार्रवाई और सामूहिक लूट का तंत्र स्थापित कर दिया है। हाल ही में GM के द्वारा कई ठेकेदारों के अनुबंध निरस्त करते हुए उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की गई है, जिनमें—
@ चंचलेश सूर्यवंशी कॉन्ट्रेक्टर (MP07 PTN 082)
@ प्रिंस कंस्ट्रक्शन (PT 089)
@ पुरुषोत्तम यदुवंशी (MTN 269)
@ गोपाल कंस्ट्रक्शन (MTN 222)
@ असीम कंस्ट्रक्शन (PT 100 / FTN 020)
@ सर्वेंद्र सूर्यवंशी (MTN 241)
@मोती श्रीपाल यादव एंड एसोसिएट (PT 015)
@ मदन लाल एंड पार्टनर (MP07 PTN 098)
@ जैना कंस्ट्रक्शन (MP07 PTN 112 / FTN 004)
@ के टी कंस्ट्रक्शन (MP07 MTN 195)
इन सभी ठेकेदारों का आरोप है— यह कार्रवाई जानबूझकर, दबाव बनाकर, ब्लैकमेलिंग और भ्रष्ट खेल का हिस्सा है।
काम चालू था – फोटो, वीडियो सब दिए… फिर भी टर्मिनेशन क्यों ?
टाॅर्मिनेट हुए ठेकेदारों का कहना है— वे लगातार काम कर रहे थे , फोटो–वीडियो विभागीय ग्रुप में भेजे , कई मार्गों पर BT रिन्यूवल और संधारण कार्य जारी , GM से मिलकर अपना पक्ष भी रखा
इतना ही नहीं— मटकुली–मोढोंगरी रोड पर डामरीकरण कार्य शुरू, कुछ मार्गों पर पूरा BT कार्य,
संधारण कार्य जारी— इसके प्रमाण भी विभाग को सौंपे गए थे।
फिर भी एकतरफा टर्मिनेशन—क्या यह कार्रवाई काम की खराबी पर है ? या किसी छुपे ‘एजेंडा’ का हिस्सा ?
ठेकेदारों का गंभीर आरोप—“GM की नाराजगी का बदला लिया गया”
कॉन्ट्रेक्टर यूनियन ने खुलासा किया—
* कि उन्होंने नल-जल योजना द्वारा सड़कों को नुकसान पहुंचाने की शिकायत PMO दिल्ली, भोपाल और जबलपुर तक की थी
* जांच में पाया गया कि PMGSY से अनुमति लिए बिना नल-जल कार्य चल रहा था
* बिना जांच नल-जल ठेकेदारों की सिक्योरिटी राशि रिलीज कर दी गई
यही असल कारण है कि—GM कविता पटवा यूनियन और विरोध कर रहे ठेकेदारों से खफा हैं, और बदले की भावना से कार्रवाई की जा रही है—ऐसा आरोप है।
तो फिर इन ठेकेदारों पर मेहरबानी क्यों ?
सूत्रों बताते है कि— वीरेंद्र सिंह राजपूत, BS Construction, पंकज साहू, तिरुपति कंस्ट्रक्शन, अन्नपूर्णा कंस्ट्रक्शन, GP Construction उज्जैन, अर्णव कंस्ट्रक्शन, अनीता सोनी, हाईवे प्रोजेक्ट, सूर्यवंशी कंस्ट्रक्शन, सर्वज्ञ कंस्ट्रक्शन, बंटी चौकसे, जैन कंस्ट्रक्शन गोटेगांव, मिथिलेश पाराशर, मनमिंदर हॉट मिक्स, भिंड–मुरैना के कई ठेकेदार—
जिनकी सड़कों की हालत बेहद खराब , काम अधूरे ,संधारण नहीं , गुणवत्ता शून्य फिर भी— इन पर कार्रवाई नहीं !
यानी एक गुट पर सख्ती और दूसरे पर रहम— क्या यह “न्याय” है या “सेटिंग कल्चर”?
पूर्व सांसद नकुलनाथ भी घटिया सड़कों पर आंदोलन की चेतावनी दे चुके हैं—जो हालात की गंभीरता बताता है।
GM कविता पटवा के गोल-मोल जवाब—और विभाग के इंजीनियरों की अलग–अलग कहानी
जब सवाल उठे तो— GM ने सीधी बात करने के बजाय मामले को AE और Sub Engineer पर टाल दिया।
वहीं इंजीनियरों ने ट्रैफिक, PWD, अनुमति और तकनीकी बहानों का हवाला दिया।
लेकिन ग्रामीणों ने साफ कह दिया— कोई भारी ट्रैफिक नहीं, सड़कें बदहाल, बच्चे परेशान, गाड़ियां पंचर—और विभाग सिर्फ बहाने बना रहा है।
PWD EE ने साफ कहा— उन्होंने कभी काम रोकने का आदेश नहीं दिया।
तो फिर सच्चाई क्या है ? , कौन झूठ बोल रहा है ? , और यह खेल किसके इशारे पर चल रहा है ?
यूनियन की चेतावनी – अब चुप नहीं रहेंगे
यूनियन अध्यक्ष जरियाब खान और पदाधिकारियों का कहना— बारिश के बाद भी लगातार काम किया , हजारों परिवार इससे जुड़े ,
एकतरफा कार्रवाई अमानवीय , अब मुख्यमंत्री मोहन यादव और मंत्रियों से शिकायत करेंगे , तानाशाही के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी
यह सिर्फ ठेकेदारों का संकट नहीं—यह जनता से धोखा है
एक तरफ— काम करते ठेकेदारों को टर्मिनेट,
दूसरी तरफ— जर्जर सड़कों वाले ठेकेदारों को संरक्षण
इससे साफ संकेत मिल रहा है— सिस्टम में भारी पक्षपात ,लूट और दबाव की राजनीति और चुनिंदा हित संरक्षित
और सबसे बड़ा नुकसान—छिंदवाड़ा की जनता का।