अवैध धंधों पर सत्ता का संरक्षण !
‘ कांग्रेस भी करती थी ’ कहकर भाजपा सरकार में पाप को पुण्य ठहराने की कोशिश
✍️ त्वरित टिप्पणी : राकेश प्रजापति
जब सत्ता में बैठे मंत्री यह कहें कि “कांग्रेस भी अवैध धंधे कराती थी ”, तो सवाल यह नहीं रह जाता कि अपराध हो रहे हैं या नहीं—
सवाल यह बन जाता है कि क्या अब अपराध ही शासन का तर्क बन चुका है ?
छिंदवाड़ा // जिले में अवैध शराब, सट्टा, जुआ और अवैध रेत उत्खनन जैसे संगठित अपराधों पर राजनीतिक संरक्षण के आरोप अब केवल विपक्षी बयान नहीं रहे, बल्कि सत्ताधारी दल के ही विधायकों की जुबान से निकली सच्चाई बनकर सामने आ गए हैं। प्रदेश सरकार में केबिनेट और छिंदवाडा जिले के प्रभारी मंत्री राकेश सिंह के साथ जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक के बाद हुई बंद कमरे में छिंदवाडा /पंदुरना जिले के सभी छै विधायकों की चर्चा में जो कुछ सामने आया, उसने न सिर्फ प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए, बल्कि मौजूदा सत्ता की राजनीतिक और नैतिक गिरावट को भी उजागर कर दिया है।
इस बैठक में प्रभारी मंत्री राकेश सिंह , कलेक्टर हरेंद्र नारायण , पुलिस अधीक्षक अजय पांडे ,परासिया विधायक सोहन वाल्मिक , जुन्नारदेव विधायक सुनील उइके , सौंसर विधायक विजय चौरे , पंदुरना विधायक निलेश उइके , अमरवाड़ा के भाजपा विधायक कुंवर कमलेश शाह , चौरई विधायक सुजीत चौधरी , भाजपा जिलाध्यक्ष शेषराव यादव सहित अन्य अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद थे।
बैठक के बाद प्रभारी मंत्री राकेश सिंह द्वारा यह कहना कि “कांग्रेस सरकार में भी ये अवैध धंधे होते थे ”—दरअसल अपराधों पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी से पलायन और सत्ता की निर्लज्ज स्वीकारोक्ति है। यह बयान यह स्पष्ट करता है कि अवैध कारोबार आज भी फल-फूल रहे हैं और उन्हें रोकने के बजाय राजनीतिक संरक्षण दिया जा रहा है।
अवैध धंधों पर कार्रवाई नहीं, बचाव की भाषा !
विधायकों ने साफ तौर पर आरोप लगाया कि जिले में जुआ, सट्टा, अवैध शराब और अवैध रेत उत्खनन का कारोबार खुलेआम चल रहा है। थानों से लेकर प्रशासनिक स्तर तक शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। उलटे, यह धारणा मजबूत हो रही है कि इन अवैध धंधों में संलिप्त लोगों को पार्टी कार्यकर्ता या सत्ता से जुड़े होने के कारण संरक्षण प्राप्त है।
दूसरी ओर, जब जिम्मेदार जनप्रतिनिधि सवाल उठाते हैं, तो उन्हें जवाब मिलता है—“पहले भी होता था ”। यह तर्क न सिर्फ गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि यह साबित करता है कि सत्ता में बैठे लोग अपराध खत्म करने नहीं, बल्कि उसे वैध ठहराने की मानसिकता में काम कर रहे हैं।
“जब सत्ता अपराध रोकने के बजाय यह बताने लगे कि पहले भी अपराध होते थे, तब समझ लेना चाहिए कि राजनीति अपनी सबसे निचली सतह पर पहुंच चुकी है।”
‘संस्कार और आदर्श’ सिर्फ भाषणों तक सीमित
जो दल और जिनके मंत्री सार्वजनिक मंचों से ‘संस्कार’, ‘सुशासन’ और ‘आदर्श राजनीति’ की बात करते नहीं थकते, उन्हीं के एक कैबिनेट स्तर के मंत्री द्वारा इस तरह का बयान देना इन शब्दों को गाली जैसा बना देता है। यदि पिछली सरकारों की गलतियों को गिनाकर वर्तमान सरकार भी वही सब दोहराए, तो सत्ता परिवर्तन का अर्थ ही क्या रह जाता है ?
यह बयान इस सच्चाई की ओर इशारा करता है कि आज राजनीति में जवाबदेही की जगह बचाव ने ले ली है और सुधार की जगह तुलना ने।
राजनीतिक गिरावट का आईना
एक ओर भाजपा सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ और ‘भ्रष्टाचार मुक्त शासन’ का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर उसी सरकार के मंत्री अवैध धंधों को लेकर यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि “कांग्रेस भी करती थी ”। यह बयान न सिर्फ प्रशासनिक विफलता को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि सत्ता के शिखर पर बैठे लोग अब नैतिकता के प्रश्नों से असहज नहीं होते।
यह स्थिति साफ बताती है कि जिले में अवैध कारोबार केवल अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित राजनीतिक-संरक्षित तंत्र बन चुका है, जिसमें कार्यकर्ताओं से लेकर प्रभावशाली लोगों तक की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जनता पूछ रही है सवाल
अब सवाल यह नहीं है कि कांग्रेस के समय क्या होता था, सवाल यह है कि आज सत्ता में बैठे लोग क्या कर रहे हैं ? ,अवैध धंधों से जुड़े पार्टी कार्यकर्ताओं को अपराधी बनने से रोकने की बजाय अपराध की अंधी खाई में जानबूझ कर ढकेल रहे है ? ,क्या कानून का राज सिर्फ आम नागरिकों के लिए है ? और क्या ‘सुशासन’ केवल चुनावी जुमला बनकर रह गया है ?
जब अवैध धंधों पर रोक लगाने के बजाय उन्हें सही ठहराने की भाषा सत्ता से आती है, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है।
यह पूरा घटनाक्रम इस बात का संकेत है कि छिंदवाड़ा में अवैध कारोबार अब सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि राजनीतिक संरक्षण प्राप्त एक संगठित तंत्र बन चुका है।
अब सवाल कांग्रेस बनाम भाजपा का नहीं, सवाल शासन बनाम अपराध का है।