किसानों की बर्बादी का असली जिम्मेदार—सरकार का झूठा MSP वादा : नकुलनाथ
“किसान की मेहनत का कहीं हिसाब नहीं… सरकार सिर्फ जुमले बेच रही है ”
छिंदवाड़ा के कुसमेली कृषि उपज मंडी में आज विशाल किसान बचाओ आंदोलन में पूर्व सांसद नकुलनाथ जमकर गरजे। हजारों किसानों की भीड़ के बीच नकुलनाथ ने सीधा आरोप लगाया—सरकार के किसी भी मंत्रालय की फाइल में किसान की मेहनत का सच्चा हिसाब नहीं मिलता। किसान घाटे में है, और सरकार कुर्सी बचाने की राजनीति में
उन्होंने कहा कि मक्का का MSP 2400 रुपए बताकर सरकार जनता को धोखा दे रही है। 2400 नहीं, सरकार को 3000 रुपए प्रति क्विंटल में मक्का खरीदना होगा, तभी किसान की लागत निकलेगी।
नकुलनाथ का किसानों के दर्द पर तीखा प्रहार..
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खाद नहीं मिलता, सिंचाई की बिजली नहीं मिलती, फिर भी सरकार कहती है किसान खुश है… ये कैसा मज़ाक है ?
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2400 रुपए MSP बताए पर खरीदी एक दाना भी नहीं… किसानों के साथ धोखा हो रहा है।
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सरकार की नीयत साफ होती तो किसान घाटे में न होता, बिचौलिए मालामाल न होते।
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अंग्रेजों ने किसानों पर इतनी लाठियाँ नहीं चलवाईं जितनी आज सरकार चलवा रही है।
उन्होंने कहा कि एक एकड़ पर 28 हजार रुपए लागत लगती है, जबकि वर्तमान बाज़ार भाव पर किसान को मुश्किल से 15 हजार मिलते हैं।
“किसान हर एकड़ पर 12 हजार रुपए का शुद्ध घाटा झेल रहा है—और सरकार मौन है।”
बिजली, खाद और समर्थन मूल्य पर बड़ा हमला ,नकुलनाथ ने जोर देकर कहा—10 घंटे बिजली का वादा… लेकिन किसान को मिलते हैं सिर्फ 6-8 घंटे। रात की बिजली आफ़त बन गई है, दिन में बिजली चाहिए !
खाद की कालाबाज़ारी सरकार की नाकामी है… किसान लाइनों में खड़ा है और अधिकारी मुनाफा गिन रहे हैं।
कपास उत्पादक किसानों पर भी चिंता उन्होंने सवाल उठाया— कपास समर्थन मूल्य पर क्यों नहीं खरीदी जा रही ? कपास किसान जाए तो जाए कहाँ ? मंच से नकुलनाथ ने किसानों को भरोसा दिलाया—आप अकेले नहीं हैं। मैं, कमलनाथ जी और पूरा कांग्रेस परिवार आपके साथ खड़ा है। ये रिश्ता राजनीति का नहीं… परिवार का है।
आंदोलन स्थल से राज्यपाल के नाम 10 प्रमुख मांगें : — मक्का 2400 नहीं 3000 रुपए प्रति क्विंटल में खरीदा जाए , किसानों को नकद में खाद मिले , 24 घंटे सिंचाई बिजली दी जाए , अनाज मंडी की अव्यवस्थाओं पर कार्रवाई , नहरों की तत्काल मरम्मत , माइक्रो इरीगेशन के अधूरे कार्य पूरे हों , किसानों पर हो रही बिजली-लूट बंद हो , हम्मालों और तुलैयों का पंजीयन , कृषि महाविद्यालय के लिए बजट ,खाद की कीमत में बढ़ोतरी वापस ली जाए
निष्कर्ष: किसान रो रहा है और सरकार सो रही है
नकुलनाथ के तीखे सुर स्पष्ट कर गए कि अब किसान चुप नहीं रहेगा।
सरकार को किसानों के हक की लड़ाई में जवाब देना ही होगा।
“अगर खेती घाटे का धंधा बन गई है, तो इसके असली जिम्मेदार सत्ता में बैठे लोग हैं।”