बेटी ने बेटा बन पिता को दी मुखाग्नि ….

देश काल वातावरण के अनुसार परम्पराओ को परिस्थितियजन्य बदला भी जा सकता है..

छिंदवाड़ा से राकेश प्रजापति 

छिंदवाड़ा :- हिन्दू संस्क्रति ओर मान्यताओ के अनुसार पिता की चिता को मुखाग्नि बड़ा या सबसे छोटा बेटा देता है । परंतु 5000 बर्षो से चली आ रही परम्पराओ से हट कर कोई कार्य या संस्कार होता है तो वह समाज मे बड़ी खबर के रूप में समाज के सामने आती और खूब सुर्खियां भी बटोरती है और एक नई बहस को जन्म भी देती है कि देश काल वातावरण के अनुसार परम्पराओ को परिस्थितियजन्य बदला भी जा सकता है जो हिन्दू संस्क्रति ओर परम्पराओ से अलग हटकर समाज मे नजीर के रूप में देखी जाती रही है और अनन्त कालखंड में देखी जाती रहेंगी ।

ऐसा ही कुछ आज शहर में देखने को मिला जो सामाजिक जड़ताओं को तोड़ कर सामाजिक परिभाषों को पुनः परिभाषित करने के लिए जाना जाएगा ? शहर में वार्ड नं.17 में रहने वाले कृष्णकुमार मालवीय जी की कल रात अचानक स्वास्थ्य खराब हो जाने से मृत्यु हो गई।हिन्दू रीति रिवाजों के अनुसार स्वर्गवासी व्यक्ति के ज्येष्ठ पुत्र द्वारा ही उसे मुखाग्नि दी जाती है लेकिन मृतक कृष्णकुमार जी की केवल एक संतान जो पुत्री है उसने ही आज रीति रिवाजों से ऊपर उठकर स्थानीय मोखधाम में अपने पिता को मुखाग्नि दी।कल रात जब कृष्णकुमार जी की मृत्यु हुई तब उनकी पुत्री कशिश किसी कार्य से भोपाल गई हुई थी जैसे ही उसे अपने पिता के मौत का समाचार मिला तब से ही उसका रो रोकर बुरा हाल था इसके बाद आज शाम स्थानीय मोक्षधाम में संतान धर्म का पालन करते हुए कशिश ने अपने पिता को मुखाग्नि देते हुए उन्हें आखिरी विदाई दी।

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