भारिया जनजाति के लिए मुख्यमंत्री की घोषणा धोखा है – एच्.एम.के.पी

आज तक भरिया जनजाति को उनके अधिकारों से वंचित रखा गया है : डी के प्रजापति 

वनभूमि के पट्टे नहीं भरिया लोगों को रहवासी अधिकार के प्रमाणपत्र प्रदान किए जाए
छिंदवाड़ा :- मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के तामिया विकासखंड में स्थित विशालकाय पहाड़ियों से घिरा पातालकोट का भौगोलिक क्षेत्रफल लगभग 79 किलोमीटर है चारों तरफ से ऊंची खड़ी पहाड़ियां जिनका क्षेत्र धरातल से 3000 फीट नीचे हे इसका सम्पूर्ण क्षेत्र ऊँचे पहाड़ियों और जंगलो से आच्छादित हे पूर्व कि अपेक्षा जंगल का घनत्व कम होता जा रहा हे 90% जनसंख्या भरिया जनजाति समूह की हैभरिया जनजाति का विस्तार मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा सिवनी मंडला डिंडोरी शहडोल तक है इन में से सिर्फ छिंदवाड़ा जिला की पातालकोट में रहने वाले भरिया जनजाति को ही विशेष संकटग्रस्त जनजाति समूह (PVTG) की मान्यता प्राप्त है पातालकोट के 12 गांव में पातालकोट की भारिया जनजाति को वनाधिकार कानून के अंतर्गत अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी वन अधिकारों की मान्यता अधिनियम 2006 अधिकार कानून जिसमे निवासियों के लिए व्यक्तिगत वन भूमि का अधिकार और सामुदायिक संसाधनों पर अधिकार देने का प्रावधान है वन अधिकार कानून के संशोधित नियम 2012 के अनुसार अधिनियम की धारा 3 (१)(ड) में विशेष संकटग्रस्त जनजाति समूह समुदाय के आजीविका सामाजिक ,आर्थिक ,आध्यात्मिक, सांस्कृतिक ,धार्मिक, पवित्र पूजा का स्थान के लिएउपयोग किये जाने वाले सम्पूर्ण रूढ़िजन्य भू-भाग को (Habitat Rights)रहवासी अधिकार माना जायेगा और यह अधिकार पातालकोट के निवासियों को प्रदान किया जाना चाहिए परंतु पातालकोट के भरिया समुदाय आजादी के 70 साल बाद भी (Habitat Rights रहवासी अधिकार से वंचित हे ऐसे में वनाधिकार कानून कि धारा 3 (1) (ड)मे सिर्फ विशेष संकटग्रस्त जनजाति समूह (PVTG) समुदाय को ही रहबासी अधिकार (Habitat Rights) के दावा भरने का अधिकार देता हे इस धारा के तहत पातालकोट के भरिया समुदाय सम्पूर्ण पातालकोट के रहवासी अधिकार के लिए पात्र है !

इस आशय की जानकारी देते हुए मजदूर किसान पंचायत मध्य प्रदेश के महासचिव श्री डीके प्रजापति ने कहा कि  वनाधिकार कानून के संशोधित नियम 2012 के धारा 12 (ख ) जिला स्तरीय समिति यह सुनिश्चित करेगी कि अधिनियम कि धारा 3 (1) (ड) मे वर्णित विशेष संकटग्रस्त जनजाति समूह (PVTG)के पारम्परिक संस्थाओ के परामर्श से परमर्श से उनके रहबासी अधिकार के दावे सम्बंधित ग्राम सभा के समक्ष जहा कही भी उनकी ग्राम सभा प्लवमान हो मान्यता देकर दावा फाइल करेंगे इस तरह रहबासी अधिकार (Habitat Rights)के लिए जिला स्तरीय समिति को पहल करना चाहिए जो कि आज तक नहीं किया गया हे और भरिया जनजाति को उनके अधिकारों से वंचित किया गया हे वनाधिकार कानून के क्रियान्वयन को लेकर 14 जुलाई 2015 को राज्यों के प्रमुख सचिवों के साथ रिव्यू मीटिंग में प्रधानमंत्री के द्वारा विशेष संकटग्रस्त जनजाति समूह समुदाय के रहवासी अधिकार के क्रियान्वयन को न किया जाना एक प्रमुख मुद्दा था जिसके लिए दिशानिर्देश जारी किए गए थे परंतु रहवासी अधिकार के लिए सबसे उपयुक्त होने के बावजूद भी पातालकोट के लोगों के 79 किलोमीटर के संपूर्ण क्षेत्र को अधिकार से वंचित किया गया है वनाधिकार कानून के तहत ज्यादातर दावा वन विभाग के आपत्ति के कारण निपटारा नहीं किया जाता हे सामुदायिक वनाधिकार के मामले मे वनविभाग आरक्षित वन का हवाला देकर आपत्ति प्रस्तुत करता हे संपूर्ण पातालकोट के जंगल क्षेत्र में आरक्षित श्रेणी के वन नहीं है इस कारण पातालकोट के 12 गांवों को सामूहिक रुप से पातालकोट के भू भाग का रहवासी अधिकार हैबिटेट राइट्स दिया जाना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि मध्य प्रदेश के जिला डिंडोरी के क्षेत्र के 7 गांव को अधिनियम की धारा के तहत विशेष संकटग्रस्त जनजाति समूह बैगा समुदाय को रहवासी अधिकार का प्रमाण पत्र दिया जा चुका है डिंडोरी जिले की अपेक्षा पातालकोट में इसे सौ प्रतिशतसफल किया जा सकता हे ऐसी स्थिति में पातालकोट क्षेत्र का अधिकार रहवासी अधिकार हैबिटेट राइट्स दिया जाना अत्यंत आवश्यक है ऐसा करने पर पातालकोट क्षेत्र पूरे देश में एक मॉडल बनेगा और प्रदेश के आदिवासी वर्ग को सरकार की सकारात्मक पहल का लाभ भी मिलेगा श्री प्रजापति ने मुख्यमंत्री की पातालकोट मे की गई घोषणा को भरिया जनजाति के लोगो के साथ धोखा बताते हुए कहा कि भारिया लोगों को वन भूमि के पट्टे नहीं बल्कि पातालकोट क्षेत्र में हैबिटैट राइट्स रहवासी अधिकार का प्रमाण पत्र दिया जाना चाहिए सरकार की नीयत में खोट है वह नहीं चाहती पातालकोट के भरिया समुदाय के लोगों को प्रमाण पत्र प्रदान किया जाए हिंद मजदूर किसान पंचायत ने महामहिम राष्ट्रपति के नाम प्रेषित ज्ञापन मैं भरिया समुदाय को वनाधिकार कानून की धारा ३(१)(ड) के तहत हैबिटेट राइट्स रहवासी अधिकार दिए जाने की मांग की है

डीके प्रजापति
महासचिव
हिन्द मज़दूर किसान पंचायत
मध्य प्रदेश

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