AICTE (ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन) के अनुसार, लगभग 200 इंजिनियरिंग कॉलेजों ने बंद करने की अनुमति मांगते हुए आवेदन दिए हैं. ये इंजिनियरिंग कॉलेज अब छात्रों के एडमिशन तो नहीं करेंगे लेकिन मौजूदा बैच का कोर्स पूरा होने तक सक्रिय रहेंगे. इसका मतलब ये हुआ कि तीन-चार साल बाद ये इंजिनियरिंग कॉलेज बंद हो जाएंगे. आप लोगों की जानकारी के लिए बता दें कि इन कॉलेजों के बंद होने से इंजिनियरिंग की सीटों में भी गिरावट आएगी. इस साल तकरीबन 80,000 सीटों की कटौती का अनुमान लगाया जा रहा है. 2018-19 समेत 4 सालों के अंदर इंजिनियरिंग कॉलेजों में करीब 3.1 लाख सीटें कम हो जाएंगी.

पुराने आंकड़ों पर अगर नजर डाले तो पता चलता है कि 2016 से हर साल इंजिनियरिंग कॉलेज में एडमिशन लेना वाले छात्रों की संख्या में कमी आई है. ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन के अनुसार, हर साल लगभग 75,000 छात्र कम हो रहे हैं, 2016-17 में अंडरग्रैजुएट लेवल पर दाखिले की क्षमता 15,71,220 थी जबकि 7,87,127 एडमिशन ही हुए थे. इसका मतलब ये हुआ कि उस वक्त 50 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी. वहीं ये आंकड़ा 2015-16 में कुछ इस प्रकार रहा. कुल प्रवेश क्षमता 16,47,155 थी जबकि कुल 8,60,357 एडमिशन हुए. इसका मतलब 52 फीसदी की गिरावट आई.

एआईसीटीई ने फैसला किया है कि टेक्निकल इंस्टिट्यूशंस को 2022 तक कम से कम 50 फीसदी प्रोग्रामों के लिए नैशनल बोर्ड ऑफ ऐक्रेडिटेशन (एनबीए) से मान्यता लेनी होगी. आप लोग शायद इस बात से अंजान होंगे लेकिन आइए आपको बता दें कि मौजूदा समय की बात करें तो भारत में तकरीबन 10 प्रतिशत कोर्सों के लिए ही मान्यता ली जाती है.