क्षमाशीलता ही गुड फ्राइडे का सार है ..

सृजन का जो मूल है , वह विरोधी शक्तियों के मिलन का आधार है..

जीवन और मृत्यु के बीच , जुल्म करने वालों की सीमाओं पर मुस्कराते हुए जीसस ने कहा , ‘ परमेश्वर! इन्हें क्षमा करना , क्योंकि ये नहीं जानते कि ये क्या कर रहे हैं। ‘ दुनियावी मामलों में इसका बहुत ही बड़ा अर्थ है। सृजन का जो मूल है , वह विरोधी शक्तियों के मिलन का आधार है। जब द्वार में उलटी ईंटें लगाते हैं , तो वह ‘ मेहराब ‘ बन जाता है। इसी तरह पौधों के अंकुरित होने के पहले बीज मिट जाता है। ईसा ने अपने हत्यारों को भी क्षमा कर एक नई व्यवस्था का सृजन किया। जीसस ने कहा , ‘ जो बचाएगा वह खो देगा , और जो खो देगा , वह पा लेगा। अजीब सी बात कही। जो बचाएगा , वह खो देगा। उससे फिर कुछ छीना नहीं जा सकता है। जो सकाम जीता है , उसे फल कभी नहीं मिलता और जो निष्काम जीता है , उसके जीवन में प्रतिपल फलों की वर्षा होती है। अगर आप यह ख्याल कर परमेश्वर का स्मरण कर रहे हैं कि बहुत कुछ मिलेगा , तो आप खाली हाथ लौट जाएंगे। और अगर आप खाली मन आए , कुछ लेने नहीं , सिर्फ प्रभु का धन्यवाद करने , तो आपका हृदय भर जाएगा। एक अनूठे आनंद का नया द्वार खुल जाएगा। ‘ जीसस हमेशा यह कहते रहे कि अनागत के लिए तैयार रहो। मृत्यु की कोई तिथि नहीं होती। हमारी भारतीय संस्कृति में मेहमान के लिए बड़ा सटीक शब्द है , ‘ अतिथि ‘ जिसका अर्थ होता है ऐसा व्यक्ति जिसकी तारीख निश्चित नहीं। वह आए और न भी आए या वह किसी भी क्षण आ जाए। और हो सकता है , किसी को जीवन भर उसकी प्रतीक्षा करनी पड़े। जीसस इस प्रतीक्षा को ही जीवन की परीक्षा मानते हैं। मृत्यु के पहले वे प्रार्थना करते हुए कहते हैं , ‘ परमेश्वर! मेरी नहीं , आपकी इच्छा पूर्ण हो। ‘ यदि आप प्रतीक्षा करते थकते नहीं तो वही आपके प्रेम का सूचक है। करुणा और क्षमा एक दूसरे के साथ-साथ चलते हैं। जिस क्षण भी दूसरों के प्रति करुणा का भाव हृदय में होगा , वही क्षण हमारे लिए दया का क्षण होगा। ध्यान और करुणा मानों क्षमाशीलता के दो पहलू हैं। तभी तो जीसस कहते हैं कि मनुष्य को दूसरों के साथ वैसा ही बर्ताव करना चाहिए जैसा कि वह चाहता है कि दूसरे उसके साथ करें। मेरा विश्वास प्रार्थना में है। आप यह कैसे बता पाएंगे कि प्रार्थना , मौन के क्षण और आनंद की आध्यात्मिक पीड़ा के क्षणों में आप कैसा महसूस करते हैं। मैं अनुभव करता हूं कि मेरे लिए यह संवाद महत्वपूर्ण है। जीसस ने कितनी सुंदर बात कही है: ‘ अपने दुश्मन को भी क्षमा करो! ‘ आपको किसी ने धोखा दिया। आपमें क्षमा करने की कितनी क्षमता है ? जीसस इसी क्षमा की बात कहते हैं , जब वे खोने और पाने का जिक्र करते हैं। क्षमाशीलता एक प्रकार से प्रेम का ही विस्तृत रूप है। यदि हमारे संबंध बिगड़ जाते हैं , तो उसे सुधारा जा सकता है। हालांकि यह कभी- कभी अत्यंत महंगा हो सकता है। जीसस ने अपनी प्रार्थना में सिखाया , ‘ मेरे अपराध क्षमा करो जैसे कि मैं दूसरों के करता हूं। ‘ इस संदर्भ में उस व्यभिचारणी स्त्री की घटना याद आती है जिसे सब लोग पत्थर मार रहे थे। जीसस ने कहा , ‘ जिसने कभी अपराध न किया हो वह पहला पत्थर मारे। ‘ अत: क्षमाशीलता ही गुड फ्राइडे का सार है। जीसस की शिक्षाओं का निचोड़। एक बार फिर यह संकल्प दोहराने का अवसर है कि हम दूसरों को क्षमा करना कैसे सीखें। अगली बार जब आप नाराज हों और किसी को सजा देने का निर्णय लें तो पहले दो बार सोचें। क्योंकि आहत भावनाएं ठीक करना आसान नहीं। प्रेम शक्ति है और जो प्रेम से जीता है , वही वस्तुत: जीतता है क्योंकि प्रेम परमात्मा की उपस्थिति का प्रकाश है। एक बात ध्यान में रखनी है। हम जिस ढांचे में रहने के आदि हो गए हैं , उस ढांचे की समस्याओं को भी सहने के आदि हो जाते हैं। लेकिन इस दृष्टिकोण में परिवर्तन लाना होगा। गुड फ्राइडे इसी परिवर्तन की ओर इशारा करता है , यानी विनाश से सृजन की ओर। मनुष्य के जीवन में प्रेम का फूल जब तक पूरी तरह न खिले , तब तक उसके व्यक्तित्व में क्षमाशीलता का नमक उत्पन्न नहीं होता।

                                                                                                                                                                        सौजन्य :- स्पीकिंग ट्री

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