मीडिया की धमनियों में बहने वाला काला खून आत्मघाती हो चुका है – उमेश त्रिवेदी

 मध्य प्रदेश और बिहार में तीन पत्रकारों की सरेआम हत्या और मीडिया घरानों के खिलाफ कोबरा-पोस्ट के सनसनीखेज स्टिंग-ऑपरेशन की इबारत सीधे-सीधे मीडिया के बेबस बदनुना हालात को बंया करती है। घटनाएं कह रही हैं कि अभिव्यक्ति के मासूम परिन्दों को झपटने के लिए आकाश में गिध्दों की फौज ने मोर्चा संभाल लिया है और उनको ताकत देने के लिए सत्ता के चौपाये कानून की जमीन पर पूरी चौकसी के साथ तैयार है। भिंड के पत्रकार संदीप शर्मा सहित बिहार के दो पत्रकारों की हत्या खनिज-माफिया और राजनेताओं की अंतरंग तस्वीर का खूनी तर्जुमा है, जबकि कोबरा-पोस्ट का स्टिंग-ऑपरेशन इस बात की ताकीद है कि मीडिया की अपनी ही धमनियों में बहने वाला काला खून आत्मघाती हो चुका है। 

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