अतिथि विद्वानों को मरने की साजिश …….

सरकार क्या इतनी गिर गई है जो निरीह अतिथि विद्वानों को महाभारत के लाक्षाग्रह जैसी बरदातो  को अंजाम देने चाहती थी ? की ना रहेगा बांस और ना बजेगी बांसुरी ?

अतिथि विद्वानों को नियमित करने के लिए सरकार के पास पैसा नही है परन्तु आइफा अबार्ड पर 7 सौ करोड़ का बजट है ?

भोपाल में पिछले 1 महीने से उच्च शिक्षा विभाग द्वारा निकाले गए अतिथि विद्वान अपनी स्थायीकरण के लिए शाहजहानी पार्क में आंदोलनरत हैं बीती रात पंडाल में रात लगभग 2:00 बजे जिंदा जलाने के लिए चारों तरफ पेट्रोल गिरा कर आग लगा दी गई ! ठंडी की रात होने के कारण आग तेजी से नहीं पकड़ पाई और कुछ अतिथि विद्वान बैठे थे जो आग को देखते देखते हुए शोर मचाया और अपने आपको बचाव किया अगर नहीं देखा होता तो आज वही हाल होता जो महाभारत में लाक्षागृह में पांडवों को जलाने कर मारने की गई थी ।
सूत्रों के अनुसार मंत्रिमंडल के आदेश के बाद भी उच्च शिक्षा मंत्री द्वारा अतिथि विद्वानों को सेवा में लेने के लिए कोई आदेश जारी नहीं किया गया है जिसके कारण अतिथि विद्वानों को कई बार धमकी भी दे चुके हैं ! जैसा कि सूत्र बताते है की 
बिना किसी की भूमिका के इतना बड़ा अंजाम किसी असामाजिक तत्वों द्वारा नहीं दिया जा सकता ? पिछले 1 महीने में एक छोटी सी असामाजिक घटना नहीं हुई उस दशा में इसे इतनी बड़ी घटना होने जा रही को सरारती तत्व की घटना नहीं माना जा सकता ? इसके पीछे किसी बड़ी साजिश का हाथ हो सकता है यह उसे विभाग से जुड़े लोग या मंत्री भी हो सकते हैं ? वचन पत्र से मुकरने और फर्जी भर्ती का विरोध करने वालों को जलाकर मारना चाहते हो ? इसकी सत्यता जब थाने में f.i.r. पंजीकृत होने के बाद और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही ज्ञात हो पाएगा ! पार्क में गेट के पास ही पुलिस वाले प्रतिदिन रहते हैं उस दशा में पेट्रोल लेकर आना और आग लगाना छोटी बात नहीं है ,जो की अनेको संदेहों को जन्म देती है ?
नगर निगम ने भी दो-तीन दिन से लकड़ी नहीं दिया था नहीं तो कुछ प्रदर्शनकारी अलाव जलाकर बाहर ही बैठे रहते थे। ठंडी पड़ रही है लकड़ी की व्यवस्था नहीं होने के कारण के अंदर बैठे थे नहीं तो ऐसे लोगों को भी समय रहते पकड़ा जा सकता था जब समय ही बताएगा।

इस पूरे घटना क्रम पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व् नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव की प्रतिकिरियां ….

 

Share News

You May Also Like