ग्रेसिम के मजदूर हड़ताल पर ……

नागदा,11 अक्टूबर /  मप्र के उज्जैन जिले में स्थित बिड़ला घराना के ग्रेसिम कारखाने के मजदूरों ने शुक्रवार सुबह से हड़ताल कर दी। कारखाने में कार्यरत हजारों श्रमिक कार्य पर नहीं गए। कारखाने परिसर में मजदूरों ने डेरा डाल दिया है। महिला ठेका श्रमिक भी गेट पर धरना देकर बैठ गई है।
 नागदा से श्याम भरवा की रिपोर्ट   हालांंकि गुरूवार रात्रि पाली से ही मजदूर कार्य पर नहीं गए। ऐसी स्थिति में कारखाना प्रबंधन को अब कारखाना को चलाना मुश्किल हो गया। कारखाना तीन शिफटों में लगातार चलता है। ऐसी स्थिति में गुरूवार को दोपहर  की पाली में गए मजदूरों के भरोसे ही अब कारखाना चल रहा है। सैकड़ों मजदूर अंदर ही है। इधर, कारखाना के मुख्य प्रवेश द्धार पर श्रमिकों ने मोर्चा संभाल रखा है। पुलिस प्रशासन भी कारखाना के क्षेत्र में कड़ी निगरानी रखे हुए हैं।कारखाना में इस प्रकार की अशांति गुरूवार शाम को मजदूरों की एक सभा में भारतीय मजदूर संघ के प्रधानमंत्री जोधसिंह राठौर की एक श्रमिक के साथ कथित अपमानक व्यवहार के बाद स्थिति बनी हैं। हालांकि उन्होंने बाद में इस बात का खंडन किया थाकि ऐसा नहीं बोला था।
बाद में श्रमसंगठन के कार्यकर्ता एवं मजदूरों के बीच तनाव से लाठियां भी चली थी। जिसमें दो श्रमिकों को चोटे आई है। पुलिस प्रशासन ने दोनों पक्षों की रिपोर्ट पर 8 लोगों के खिलाफ गुरूवार शाम को प्रकरण दर्ज किया था। इस घटनाक्र म में उद्योग में कार्यरत सैकड़ों मजदूर इस बात को लेकर भडक़ गए थेकि हाल में पांचवर्षीय वेतनवद्धि का जो समझौता हुआ उससे वे असंतुष्ट है। ठेका मजदूर इस बात से नाराज हैकि उनका पैसा बहुत कम बढाया गया है।

सहायक श्रमायुक्त को अवगत कराया ;-  मजदूरों की हड़ताल के दौरान के कारखाना परिसर में कोई भी ट्रेड यूनियन का नेता दिखाई नहीं दिया। मजदूरों ने स्वयं मोर्चा संभाल रखा है। इधर, ग्रेसिम कांतिकारी कर्मचारी यूनियन के नेता भवानीसिंह शेखावत ने ख़बर द्वार.काम समाचार नागदा संवाददाता से बातचीत में बताया कि सहायक श्रमायुक्त मेघना भट़ट से उनकी दूरभाष पर चर्चा हुई है। उन्हें मजदूरों के समझौता से भड़े आक्रोश के बारे में बता दिया गया है।

प्रबंधन का दावा सुचारू रूप से चल रहा कारखाना  :- ग्रेसिम के जनसंपर्क अधिकारी संजय व्यास ने ख़बर द्वार समाचार से बातचीत में बताया उद्योग का उत्पादन अभी प्रभावित नहीं हुआ है। उद्योग की सभी मशीनें चल रही है। हालांकि उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि गुरूवार की दोपहर पाली में गए मजदूर उत्पादन प्रकिया में भागीदार बने हुए है।

2500 हजार ठेका मजदूर :- ग्रेसिम कारखाने में लगभग 1700 स्थायी मजदूर कार्यरत है। जबकि बड़ी संख्या में तकरीबन 2500 हजार ठेका मजदूर है। इन ठेका मजदूरों के भरोसे ही उद्योग का उत्पादन संभव है। हाल की हड़ताल में ंठेका मजदूर भडक़े हैं, इसलिए प्रबंधन के समक्ष अब कारखाने को चलाना मुश्किल होगा।

लगातार चलता 24 घंटे चलता हैंउद्योग :- ग्रेसिम कारखाना में स्टेपल फाइबर का निर्माण प्रतिदिन औसतन लगभग 425 टन स्का होता है। कारखाना लगातार 24 घंटे चलता है। तीन पालियों में मजदूर कार्य करते हैं। जनरल पाली सुबह 8 से शाम 5 बजे तक चलती है। इस पाली मेें सर्वाधिक मजदूर कार्य करते हैँ। शुक्रवार को जो हड़ताल हुई है वों जनरल शिफट से हुई है इसलिए कारखाना में कई कार्य प्रभावित हो गयें !

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