या यूं ही सूकरों की जिंदगी बसर करते रहेंगे , यह हमारे ऊपर ही निर्भर है…..?

विशेष संपादकीय :-

 स्वाधीनता की 73 वर्षगांठ के अवसर पर अनेक प्रकार के विचार जनमानस में उभरते हैं विकास लोग देश की गरीबी, बिगड़ती कानून व्यवस्था, बढ़ती हुई कीमतें ,बेरोजगारी, भीषण विदेशी कर्ज , नए कर सरकारों की स्थिरता इत्यादि पर जोर देकर कहेंगे कि क्या स्वतंत्रता इसी का नाम है ?

      पर स्वतंत्रता का अपना अलग मूल्य है और वह है एक जिम्मेदारी का एहसास हम जो भी कर रहे हैं जैसे भी हैं आगे बढ़ रहे हैं या बिछड़ रहे हैं उन सबके लिए हम स्वयं ही उत्तरदायी है किसी दूसरे पर अपनी सफलता या हार का बोझ डालकर आराम से नहीं बैठ सकते ?

     गनीमत यह है कि व्यक्ति के मामले में हमारा परंपरागत चिंतन और विचार पूर्व जन्म के कर्मों का फल कहा जा सकता है ,पर सारे देश् के लिए इस आत्मा और पुनर्जन्म का हानिकारक सिद्धांत लागू करना संभव नहीं होगा जितनी मेहनत कार्यकुशलता और ईमानदारी से हम काम करेंगे उतने ही हम समृद्ध और शक्तिशाली बनेंगे न कम न ज्यादा ..!

       लगभग 2025 वर्ष की हमारी गुलामी हमारे अपने दोषों कमजोरियो के कारण रही , आज स्वतंत्रता के बाद भी हम संसार के प्रगतिशील देशों की श्रेणी में आते हैं तो अन्य किसी को इसका दोष नहीं दे सकते , हम स्वयं इसके लिए दोषी हैं ..!

      यह नहीं है कि हमारे देशवासी बाहुबल और बुद्धि में किसी से कम है जहां हम कमजोर हैं पछाड़ खा रहे हैं, वह है हमारी सोच विचार , हमारी मान्यताएं , इस जगत को मिथ्या मायामोह का जंजाल समझ कर हर वस्तु और सेवाएं ऊपर से टपकने की आशा ..!

    यूरोप अमेरिका और जापान के पास जो प्रकृति की दी हुई वे सुविधाएं भी नही हैं जो भारत मे उपलब्ध है , मगर वे लोग समृद्धि और शक्ति में हमसे कहीं आगे हैं तो उसका कारण उनकी समझबूझ, मेहनत और साहस ही है…!

        रूस जो 1917 से पहले संसार की महाशक्तियों में से था अपने नेताओं और विचार को कि गलत कम्युनिटी कम्युनिटी मान्यताओं और सोच विचार के कारण आज भिखारी बनकर हर दरवाजे पर भीख मांग रहा है, इससे सबक ले ….!

       हम आगे बढ़ेंगे अमीर और शक्तिशाली बनेंगे या यूं ही सूकरों की जिंदगी बसर करते रहेंगे , यह हमारे ऊपर ही निर्भर है…..?

 संपादक

                                                                                                                                                                  राकेश प्रजापति 

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