संकट में सरकार , मर्ज की सर्जरी में जुटे कमलनाथ

हाल ही में कर्नाटक और गोवा में उपजे विवाद को लेकर मध्यप्रदेश में भी सियासी सरगर्मी तेज हो गई है । कांग्रेस अपनी गुटीय राजनीति से उबरकर एकता दिखाने की कोशिश में लग गई है , प्रदेश की जनता और विपक्ष को दिखाने की कोशिश में है कि पार्टी और सरकार में सबकुछ ठीक चल रहा है । ताकि ब्यूरोक्रेसी में भर्म की स्थिति पैदा न हो और प्रदेश का कामकाज ठीकठाक चलता रहे ।उसी को लेकर पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया का भोपाल आगमन हुआ और फिर मेलमिलाप के साथ साथ डिनर पर चर्चा, प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ज्योतिरादित्य सिंधिया ,सहित सभी वरिश्ठ नेताओ और विधायक मौजूद रहे ।सभी ने हाल ही में उपजे विवाद को शांत ओर एकता दिखाने की पुरजोर कोशिश की । प्रदेश कांग्रेस के नए प्रदेशाध्यक्ष की अटकलों ओर सिंधिया खेमे के मंत्रियों और विधायकों की ब्यूरोक्रेशी से चलरही खींचतान के चलते डिनर पार्टियों में समन्वय का नास्ता परोसा गया प्रदेश राजनीति के कुशल कुक जोतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ ने विधायको ओर मंत्री को समन्वय के साथ काम करने की चाशनी चटाई और चटनी के सेवन से दूर रहने की सलाह दी ….राकेश प्रजापति की रिपोर्ट

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद कमलनाथ सरकार को गिरने ओर विधायको के समर्थन बापसी को लेकर अफवाहों का बाजार लगातार चरम पर है ।प्रदेश में भाजपा लोकसभा चुनावो में जितने के बाद से ही इसबात को लेकर भर्म फैला रही है कि कमलनाथ की सरकार चंद दिनों की मेहमान है भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के एक इसारे के चलते प्रदेश की कांग्रेस सरकार भरभरा के गिर जाएगी , प्रदेश सरकार वैसे भी सपा ,बसपा और  निर्दलीय विधायको के समर्थन पर टिकी हुई है

जानकर बताते है कि सबसे ज्यादा परेशानियां सिंधिया समर्थक मंत्रियों के बयान ओर व्यवहार से हो रही है । ऐसे में यही कहा जा रहा है कि निर्दलीयों के समर्थन को बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ उन्हें मंत्रिमंडल से स्थान देना चाह रहे हैं । खबर तो यह भी है कि कमलनाथ ने सिंधिया समर्थक मंत्रियों से यह भी कहा है कि हमें पता है कि आप कहां से कंट्रोल हो रहे हैं।
मध्यप्रदेश विधानसभा सदन में इंडियन नेशनल कांग्रेस पार्टी से मुख्यमंत्री कमलनाथ सहित कांग्रेस के 114 विधायक हैं जो बहुमत से दो कम है। फिलहाल निर्दलीय और समाजवादी पार्टी के एक और बहुजन समाजवादी पार्टी के 2 विधायकों के समर्थन से सरकार चल रही है ।
ज्ञात हो कि दमोह से बहुजन समाज पार्टी की विधायक रमाबाई मंत्री पद न मिलने से लगातार नाराज चल रही है और दूसरी ओर बुरहानपुर से कांग्रेस के बागी विधायक सुरेंद्र सिंह ” शेरा “भी कई बार बयान बाजी कर सरकार की मुश्किलें खड़ी कर चुके हैं। इस पूरे बबाल के बाद यह मामला पार्टी हाई कमान तक पहुंच गया है। कांग्रेस पार्टी के अंदर की गुटबाजी से और मंत्रियों के इस तरह के व्यवहार से जहाँ पार्टी की छवि धूमिल हो रही है वही भाजपा को हॉर्स रेडिंग का मौका भी मिलता नजर आ रहा है । क्योंकि 15 साल तक सत्तासुख भोग चुकी प्रदेश भाजपा दोबारा सत्ता पाने के लिए बिलबिला रही है । भाजपा के बरिष्ठ नेता सरकार गिराने के बयान कई बार दे चुके है । सरकार के अंदुरुनी हालातो का फायदा नोकरशाह भरपूर उठा रहे है । पिछले 15 सालों से भाजपा की मलाई चाटते आ रहे नोकरशाह कमलनाथ सरकार में बेमन से काम कर रहे है। एक तरह से कहा जाय तो ये ऐसे हालात निर्मितकर रहे है जिससे सरकार की किरकिरी हो , इसकी सबसे बड़ी बजह बार बार भाजपा नेताओं का सरकार गिरा देने जैसा बयान लोगो और नोकरशाह मे असमंजस्य का माहौल पैदा कर रहा है । इसकी बानगी आसानी से देखी जा रही है कि नोकरशाह मंत्रियों की बिलकुल नही सुन रहे है उनका व्यवहार असहयोगत्मक होता है जिससे हालात बिगड़ते हैं या बिगड़ रहे हैं ?

सत्ता और संगठन के बीच जनता और सरकार के मध्य इनकी भूमिका बड़ी महत्वपूर्ण होती है जैसा लोकसभा चुनाव के दौरान प्रदेश में बिजली सरप्लस होने के बाबजूद भी बिजली कटौती बड़ा मुद्दा रहा जो कांग्रेस की दुर्गति करने में सफल रहा और अब भी हालात सुधरे नही है बार बार मुख्यमंत्री और मंत्रियों की चेतावनी के बाबजूद हालात जस के तस बनी हुए है । इसीतरह प्रदेश में शांति व्यवस्था की स्थिति संतोषजनक नही कही जा सकती है ? किसानों के ऋण माफी का कार्य भी मंथर गति से चल रहा है वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री कमलनाथ 14 -16 लगातार काम कर रहे है और जिस तेजी के साथ निर्णय के साथ साथ टाइम लिमिट में कार्य पूर्णत की गारंटी के साथ कार्य को अंजाम दे रहे वह तारीफ के काबिल है बाबजूद इसके की नोकरशाही और पार्टी के अंदरूनी जल्लाद फंदे में टांगने का कोई भी मौका हाथ से नही जाने दे रही है या फिर ऐसे हालात पैदा कर रहे है जो कार्यक्षमता को कम करने का काम कर रही है । ऐसा नही लगता है कि इस तरह के हालात ज्यादा दिन नही रहने बाले है ? मुख्यमंत्री कमलनाथ इनकी ऐसी तोड़ निकल रहे है जिससे ” साँप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे ” बाली कहाबत अक्षरशः चरितार्थ हो जाय ।
लोकसभा चुनाव के ठीक बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ जो कि वर्तमान में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी हैं उन्होंने पार्टी हाईकमान को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का मानस पार्टी हाई कमान को बता दिया था ।तभी से पार्टी के अंदर गतिविधियां तेज हो गई है और सिंधिया गुट महाराजा ज्योतिरादित्य सिंधिया को इस पद आसीन होने के लिए पूरे जोर आजमाइश कर रहा है और इसी की परिणति है कि मुख्यमंत्री पर एक तरीके से दबाव बनाने की कोशिश ज्योतिरादित्य सिंधिया गुट की है । परंतु इसपर कमलनाथ की राय भी महत्वपूर्ण होगी क्योंकि सत्ता और संगठन में तालमेल बहुत जरूरी है नहीं तो आने वाले समय में पार्टी की हालात और सरकार दोनों मुसीबत में पड़ सकती है ?
इस पूरे प्रकरण को सिंधिया की प्रेशर पॉलिटिकल के रूप में देखा का रहा है । और ज्योतिरादित्य सिंधिया भी यही चाहते है क्योंकि लोकसभा में अपनी करारी हार के बाद सिंधिया का कद पार्टी और प्रदेश में काम हो गया है । ना तो वे खुद को ही जीता पाये और न ही अपने प्रभार बाले उत्तरी उत्तरप्रदेश में संतोषजनक परिणाम ही दे सके । इसलिए सिंधिया प्रदेश में पुनः अपनी सियासत को जमाने के लिए कमलनाथ के सामने अपने समर्थको से ये पूरा खेल खेल रहे है ? ताकि कमलनाथ की सहमति से यह मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर आसीन हो सके ? राजनीति के चतुरसुजान मुख्यमंत्री कमलनाथ सिंधिया की चाल को समझ चुके है और उनके समर्थकों को टका सा जबाब देकर चुप करा दिया कि हमे पता है कि आप कहाँ से कंट्रोल हो रहे है उनका यह संकेत क्या कहना चाहता है यह वे खुद जानते है कि वक्त आने पर उन्हें क्या करना है ? रंनेताओ को जरूर इसके मायने आपने अपने हिसाब से निकालने के लिए यह काफी है कि इसके मायने क्या है ?और होने बाले है ? किस किस के लिए ओर कब ?
चौतरफा मुसीबतों से जूझ रही वर्तमान प्रदेश कमलनाथ सरकार फूंक-फूंक पर कदम रख रही है और ऐसा कोई कदम नहीं उठा रही है जिससे  8 जुलाई से विधानसभा सत्र में मुसीबत ओर न बड़े ? बैसे भी सरकार के लिए विधानसभा सत्र आग के दरिये से कम नही है और मुख्यमंत्री को हर हाल में इसे सफलतापूर्वक पार करना चुनोती और कुशल राजनैतिक शिल्पकार खुद को सिद्ध करना भी जरूरी है । तभी वे पांच साल तक निर्वाध सरकार का संचालन सफलतापूर्वक करने में खुद को साबित कर पाएंगे और विपक्ष के तरकस के हर तीर का जबाब उसी तर्ज पर दे सकेंगे । पार्टी की अंदरूनी उठा पटक तो चलती ही रहेगी चुनोती तो भाजपा से है जो बराबर की बलशाली है और झूठ के आसरे सत्ता की चाशनी चाटने की जुगत में हाथ से कोई मौका जाने नही देगी ? बैसे भी कमलनाथ भाजपा के प्रथम निशाने पर है और भाजपा पिछले पांच सालों से इन्हें घेरने की फिराक में है परन्तु कमलनाथ भाजपा के हाथों की उस रेत से साबित हो रहे है कि भाजपा उन्हें जितना दबाने की कोशिश करती है और कमलनाथ उनके हाथ में नही आ पाते है ।
पिछले 15 सालो से राज कर रही शिवराज सरकार को कमलनाथ ने सत्ता से उखाड़ फेक सत्ता के सिंहासन पर खुद का आरूढ़ होना भाजपा के लिए चुनोती तो है ? परन्तु भाजपा इसका कोई तोड़ नही निकल पा रही है ? वहीं पूरे प्रदेश में अपनी परम्परागत सीट से बेटे नकुलनाथ को जीता कर ले आना न तो भाजपा और न ही ज्योतिरादित्य सिंधिया को रास आ रहा है ? सिंधिया तो खुद को भी नही जीता पाये उसका दंश वे अपने समर्थकों के माध्यम से मुख्यमंत्री कमलनाथ पर आजमा रहे है या सीधे कहे तो यह छद्म युद्ध अपनो से ही लड़ रहे है ? जिससे किसी को कुछ हासिल नही होगा और तीसरा इसका फायदा उठा ले जाने की फिराक में तो दिनरात एक किये हुए है ? इस सब से मुख्यमंत्री कमलनाथ कैसे पार पाते है असली चुनोती तो विधानसभा सत्र में होगी जहाँ कमलनाथ को विपक्षियों के साथ साथ खुद अपने का सामना करना है ? यह भी किसी महाभारत युद्ध से कम नही है परंतु देखना बड़ा दिलचस्प होगा को इस महाभारत में अर्जुन और कृष्ण की भूमिका को निभाता है ? इस युद्ध मे इतना तो तह है कि दुर्योधन की सेना में शकुनियों ओर श्रीखण्डियों की संख्या होगी ,सबकी निगाहें परिणाम पर टिकी होंगी?

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