प्रदेश में होगी कामचोर अफसरों की छुट्टी….

प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के साथ ही कमलनाथ सरकार एक एककर कड़े फैसले ले रही है ! पिछली भाजपा सरकार में सता की चासनी चाट चाट कर अलाल हो चुके अफसरों के जल्द ही बुरे दिन आने बाले है इसके संकेत प्रदेश के मुखिया कमलनाथ में मुख्य सचिव को निर्देश दिए , कामचोर अफसरों की सूची तैयार कर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 30 दिनों के अंदर मांगी है. अब भबिश्य बतायेगा की कमलनाथ सरकार इस दिशा में कितनी आगे बडती है ? या फिर देश को अभी तक चला रहे ये अफसर और बाबूओ के सामने सरकार घुटने टेक देगी ? निर्णय सही होने के साथ पैचिदा भी है ? कामचोरी की परिभाषा भी तय करनी होगी ? काम के घंटे और कार्यकुशलता के मापदंड कैसे तय होंगे आदि आदि ..? मुख्यमंत्री के इस फैसले से प्रदेश में बिकट स्थति भी पैदा हो सकती है ? जिसकी सम्भावना ज्यादा है ? क्योंकि सरकारी अधिकारियो / कर्मचारियों की यूनियनों को खाद पानी दे कर चुनावो में इसका फायदा ये राजनेता या दल हमेशा से लेते आ रहे है ? और इन कामचोर और भर्ष्ट हो चुकी व्यवस्था के ये तीमारदारो का खामियाजा बेचारी जनता पिछले 70 सालो से झेल रही है ? प्रदेश के मुखिया का यह निर्णय अगर कामयाब हो जाता है तो वाकई देश में कामचोर/भर्ष्ट सरकारी अधिकारियो / कर्मचारियों से प्रदेश की जनता को निजात तो मिलेगी ही साथ ही सरकार और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता के साथ साथ प्रशासनिक कसावट से जनता और सरकार दोनों को ही इसका फायदा होगा , साथ ही प्रदेश में वेरोजगारी भी आंशिक रूप से कम होगी ?युवाओ को सरकारी महकमे में कम करने का मौका जो मिलेगा ! मुख्यमंत्री की वाकई कामचोर अफसरों को चेतावनी है या फिर गीदड़भपकी ? …. राकेश प्रजापति 

व्यबस्था पर कसेगी नकेल : राज्य में अफसरों के अच्छे दिन, बुरे दिनों में तब्दील होने वाले हैं. यह किसी फिल्म की स्क्रिप्ट नहीं बल्कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कामचोर अफसरों की खबर लेने की ठानी है.इतने कठोर निर्णय लेने के पीछे कमलनाथ का मानस है की सरकरी काम काज से प्रदेश की जनता खिसयाने लगी है सत्ता में आने के बादसे ही  बार बार मुख्यमंत्री सरकारी अधिकारियों को चेतावनी देते आ रहे है बावजूद इसके ये अफसरशाही अपनी बेजा हरकतों से बाज नही आ रही है इसका खामियाजा कमलनाथ को प्रदेश में सरकार होने के बाद भी लोकसभा चुनावो में करारी हार का सामना करना पड़ा खासकर बिजली ,पानो और किसानो के ऋण माफ़ी के मामलो में ,बैसे अभी भी स्थ्ती ठीक नही है ?लोग तर्हिमाम – तर्हिमाम कर रहे है ? सरकार का यह निर्णय काफी हद तक ठीक भी है और आत्मघाती भी …?

हर विभाग में होगी अधिकारियों की समीक्षा : मुख्यमंत्री कमलनाथ का कहना है कि ऐसे अफसरों की पहचान होने बाद जिन अफसरों ने 20 साल की सेवा ली हो या जिन्होंने 50 साल की उम्र पूरी कर ली है, उन पर नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी. मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं और कहा है कि सरकार के हर विभाग में ऐसे कामचोर अधिकारियों की समीक्षा की जाए. यही नहीं मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सख्त निर्देश दिए हैं कि निकम्मे  अफसरों की सेवा भी समाप्त की जाए. जिससे यह संदेश जाए कि सरकारी कामकाज में भी अब ढील बरतना अफसरों को भारी पड़ सकता है. फिलहाल यह लिस्ट आने में कुछ दिनों का वक्त लगेगा. पर इससे अफसरों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रहीं है.

ज्ञात हो की इसी तरह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भ्रष्ट और कामचोर अधिकारियों को जबरन रिटायर कराने की मुहिम शुरू की है. जिसमे पिछले 2 वर्षों में योगी सरकार ने विभिन्न विभागों के 200 से ज्यादा अफसरों और कर्मचारियों को जबरन रिटायर कर चुकी है. इन दो वर्षों में योगी सरकार ने 400 से ज्यादा अफसरों, कर्मचारियों को निलंबन और डिमोशन जैसे दंड भी दिए हैं.

Share News

You May Also Like