कमलनाथ की प्रतिष्ठा दांव पर ,ऐसे होंगे परिणाम ?

पिछले तीन दिनों से एक्जिट पोलो के नतीजों से सियासी हलकों में भूचाल आ गया है । दोनो ही प्रमुख विपक्षी पार्टियों से आरोप प्रत्यारोप के शब्द बाण चल रहे है । जिससे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की साख दुनिया के सामने चार कौड़ी की हो रही है? हमारे राजनेताओ की मनःस्थति से दुनिया के लोग वाकिफ हो रहे है ? इसबार के चुनावों में यह सिद्ध हो गया कि स्वस्थ्य और सभ्य समाज मे इसकी स्वीकारिता कितनी है ? लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव कम , युद्ध अधिक हुआ ,समस्त राजनैतिक दलो में स्वस्थ राजनैतिक स्पर्धा कम द्वेष सर्वोपरि दिखाई दे रहा था ? सभी राजनीतिक दल एक-दूसरे को नीचा दिखाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे थे ?

चाहे फिर इसका समाज पर क्या असर हो रहा है इस बात से बेखबर सिर्फ और सिर्फ एक दूसरे को नीचा दिखाने की प्रतिस्पर्धा चल रही थी ? धर्म का स्थान हिंसा ने ले लिया ? साम्प्रदायिकता की आड़ में आज ओर कल के आस्क देखने की कोशिश ? धनबल,अहंकार , सच झूठ ,प्रतिशोध सबअपने सर्वोच्च शिखर पर दिखाई पड़ रही थी ? हर एक संवैधानिक संस्था पर प्रश्नचिन्ह लगना आम बात हो गया था . जिससे लोकतंत्र पर विश्वास प्रकार होता है ऐसे में लोकतंत्र की किसे परवाह ? लोकतंत्र में स्थापित संवैधानिक संस्थाओं पर विश्वास ही लोकतंत्र की मजबूती बांया करती है खैर………………………….विश्लेषण राकेश प्रजापति

इनसब से इतर हमारे सहयोगियों ने प्रदेश की कुछ लोकसभा सीटों पर विश्लेषण किया जो हम आपके सामने परोस रहे है। यह आप पर निर्भर है की आप इस जायके का आनंद किस तरह उठाते है …?

हम सबसे पहले प्रदेश की सबसे हाईप्रोफाइल सीट छिंदवाड़ा की बात करते हैं जहां से 9 बार के सांसद कमलनाथ जो वर्तमान में सूबे के मुखिया हैं उनके पुत्र नकुल नाथ चुनाव लड़ रहे हैं , उनके सामने भारतीय जनता पार्टी ने आदिवासी चेहरे पर दांव लगाते हुए पूर्व विधायक नत्थन शाह कवरेती को मैदान में उतारा है जिससे मुकाबला राजा और रंक की स्थिति में होने से कांग्रेस का गढ़ पूर्णता सुरक्षित महसूस हो रहा है ।  छिंदवाड़ा जिले के लोगों को यह चुनाव इस बात का एहसास ही नहीं करा पाया कि लोकसभा चुनाव में किसी भी प्रकार की चुनौती दोनों दल आपस में दे रहे हैं।

तीसरे चरण में कांग्रेस 5 सीटों के फायदे में 2 पर भाजपा ,एक पर संसय, देश् के छठे चरण व मध्यप्रदेश के तीसरे चरण के चुनावों के लिए प्रदेश की आठ लोकसभा सीटों पर प्रदेश के 1 करोड़ 44 लाख से ज्यादा मतदाता एक पूर्व मुख्यमंत्री , तीन सांसदों की किस्मत का फैसला 65.17% मतदान कर दिया है । मध्यप्रदेश में आम लोकसभा निर्वाचन 2014 के मुकाबले 8.16 % अधिक मतदान होने से राजनैतिक दलों के अनुमान गड़बड़ा गए है । प्रदेश की ही नही बल्कि देश् की सबसे हॉट बन चुकी भोपाल लोकसभा सीट में 1957 से लेकर अब तक हुए चुनाव में पहली बार सबसे ज्यादा 65.69 प्रतिशत मतदान हुआ।

भोपाल सीट पर सीधा मुक़ाबला भाजपा से साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बीच है भाजपा ने यहां भगवा आतंकवाद और साध्वी पर हुए जुल्मो को भावनात्मक माहौल के आसरे चुनाव जीतना चाहती है तो पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने हठ योगी की तरह साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के विवास्पद बयानों पर चुप्पी साधते हुए सीधे विकास और विजन रोडमेप जनता के सामने परोस कर वोट मांगे । पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सूबे के 10 साल तक मुख्यमंत्री रहे हैं जिनकी हर सामाजिक संगठनों राजनीतिक गलियारों   में गहरी पकड़ है । भाजपा द्वारा देर से प्रत्याशी के घोषणा तक  दिग्विजय सिंह आधी से ज्यादा भोपाल पर चुनावी कैंपेन कर चुके थे।साध्वी न तो लोकसभा क्षेत्र पूरा कवर पाई और न भाजपा के संगठनात्मक ढांचे के बेमन से काम किया इनसब के चलते भाजपा को भोपाल सीट से जीत का खतरा और उल्टा कहें तो कांग्रेस कि झोली में सीट जाती नजर आ रही है ।

राजगढ़ लोकसभा सीट पर भी भाजपा के रोडमल नागर और कांग्रेस से मोना सुल्तानी के बीच है । 2014 की मोदी लहर में सीट भाजपा ने कब्जा किया । इस सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का प्रभाव

अत्यधिक है और वर्तमान कांग्रेस प्रत्याशी मोना सुल्तानी दिग्विजय सिंह के काफी करीबी माने जाती हैं उन्ही की सहमति से सुल्तानी को टिकट मिला है पहले इस सीट पर दिग्विजय सिंह खुद चुनाव लड़ना चाह रहे थे परंतु मुख्यमंत्री कमलनाथ का कहना कि बड़े नेताओं को चैलेंजिंग सीट से लड़ने के फार्मूले ने दिग्विजय सिंह को भोपाल से चुनाव लड़ना पड़ा ।राजगढ़ में ठाकुरो ओर अल्पसंख्यको के जातिगत धुर्वीकरण से कांग्रेस की मोना सुल्तानी के जीत की राह आसान हो गई है इस सीट पर भी भाजपा को नुकसान ही उठाना पड़ सकता है ।यहाँ 74.22 % मतदाताओ ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

विदिशा लोकसभा सीट का अपना इतिहास है यहां से बर्ष 1971 में जनसंघ की टिकट पर रामनाथ गोयनका भी चुनाव लडे थे ,पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान , पंडित अटल बिहारी बाजपेई , सुषमा स्वराज जैसे दिग्गजों ने इस सीट पर अपना भाग्य आजमाया है और यह सीट भाजपा की बन कर रह गई है

इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी के रमाकांत भार्गव और कांग्रेस के शैलेंद्र पटेल के बीच सीधा मुकाबला है। भाजपा का गढ़ कहे जाने वाली इस सीट पर संगठन मजबूत तो है ही वहीं भाजपा प्रत्याशी की पकड़ मजबूत बताई जा रही है साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की भी प्रतिष्ठा दांव पर है यहाँ भाजपा इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखती नजर आ रही है यहाँ से कांग्रेस को फायदा होता नजर नही आ रहा है।फिलहाल यहाँ 71.15 % मतदान हुआ ।

गुना लोकसभा सीट पर सिंधिया घराने की प्रभाव बाली सीट है यहां कांग्रेस से ज्योतिरादित्य सिंधिया सांसद है उनके सामने भाजपा ने कभी सिंधिया के ही करीबी रहे के पी यादव को मैदान में उतारा है । यहाँ सिंधिया घराने की तूती बोलती है है और महाराज ज्योतिरादित्य सिंधिया के मुकाबले भाजपा प्रत्यासी काफी हल्का माना जा रहा हैं । सूत्रों की मानो तो यहां ज्योतिरादित्य सिंधिया के पक्ष में एक तरफा बम्फर मतदान हुआ है और वे रिकार्ड मतो से जीत रहे है। भाजपा को यहाँ से फिर निराश होना होगा ।

यहाँ 2014 की मोदी लहर में भाजपा को 40.53% तो वहीं कांग्रेस को 52.89% वोट मिले थे और ज्योतिरादित्य सिंधिया 1लाख 21हजार133 मतो की लीड से विजयी हुए थे ।इस बार यहाँ  68.88 % मतदान हुआ है ।

सागर लोकसभा सीट पर भी सीधा मुकाबला भाजपा के राजबहादुर सिंह औऱ कांग्रेस के प्रभुसिंह ठाकुर के बीच है । भाजपा का संगठन यहां काफी मजबूत है और साथ ही भाजपा प्रत्याशी राजबहादुर सिंह बर्तमान में सागर नगरनिगम में अध्यक्ष पद पर है इस वजह से भी जनता के बीच सीधा संबाद है। और यही उनकी उपलव्धि है इसलिए यहाँ से भाजपा सीट बरकरार रख सकती है । वहीँ कांग्रेस के प्रभुसिँह ठाकुर विधायक रहे है परंतु 15 बर्षो के भाजपा शासन काल के चलते संगठन को कांग्रेस पूरी तरह से यहां जीवित नही कर पाई हैऔर इसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ सकता है। 2014 की मोदी लहर में भाजपा को 54.10% तथा कांग्रेस को 40.57% वोट मील थे । इसबार यहाँ 65.63 % मतदाताओ ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया ।

ग्वालियर लोकसभा सीट पर भी सीधी टक्कर भाजपा के विवेक शेजवलकर और कांग्रेस से अशोक सिंह के बीच है 2014 के नरेंद्र सिंह तोमर सांसद चुने जाने के बाद क्षेत्र काट से गये थे और वे इस बार मुरैना से चुनाव लड़ रहे है इस लिए भाजपा ने पूर्व महापौर रहे विवेक शेजवलकर पर दाँव लगाया है वैसे भी यह क्षेत्र सिंधिया घराने के प्रभाव बाले क्षेत्रो में माना जाता है। भाजपा ने यहाँ भी चुनाव अनमने मैन से लड़ा है वहीं कांग्रेस प्रत्यासी अशोक सिंह के सिंधिया घराने की नजदीकियों का सीधा लाभ मिल रहा है ।सूत्र बताते है कि क्षेत्र के बहुत से पोलिंग बूथों पर भाजपा के एजेंट शुरूवती घंटो के बाद से लापता रहे । इनसब परिस्थियों के चलते कांग्रेस का पढ़ला भारी महसूस हो रहा है ग्वालियर से भी भाजपा को नुकसान होता दिखाई पड़ रहा है। 2014 के चुनाव में भाजपा को 44.68% और कांग्रेस को41.68% वोट मिले थे ,मोदी लहर के बाबजूद भी मात्र 29 हजार519 मतो के अंतर से नरेंद सिंह तोमर विजयी हुए थे ।इस बार यहाँ 59.60 % लोगो ने मतदान किया है ।

भिंड लोकसभा सीट पर भी भाजपा महिला प्रत्याशी संध्या राय को बनाया है ,राजनैतिक सक्रियता ऐसी बात से सामने आती है कि वे यहां से विधायक भी रही है अपनी तेजतर्रार छवि से क्षेत् में इन्हें पहचाना जाता

है। दूसरी तरफ कांग्रेस ने नए चहरे देवाशीष जरारिया पर दाँव लगाया है इस लोकसभा सीट पर कांटे की टक्कर है वह इस लिए की बसपा प्रत्यासी के मैदान में बाहर हो जाने से दलित वोट कांग्रेस के पाले में पड़ने से यहां का चुनाव बड़ा ही रोमांचक  हो गया है । सूत्रों की माने तो मामला 5-10 हजार बोटो की घटत – बढ़त से किसी के भी पक्ष में जा सकता है । इसबार यहाँ 54.57 % लोगो मे अपने मताधिकार का प्रयोग किया है।

 मुरैना लोकसभा सीट पर भी भाजपा के नरेंद सिंह तोमर और कांग्रेस के रामनिवास रावत के बीच कांटे की टक्कर है ।भाजपा के नरेंद सिंह तोमर यहाँ से दूसरी बार  चुनाव लड़ रहे है 2009 में भी वे यहाँ से चुनाव लड़े थे ,चुनाव जीतने के बाद उनका क्षेत्र से लगाव काम हो जाता है । पंडित अटल बिहारी बाजपेयी के भांजे अनूप मिश्रा की जगह भाजपा ने श्री तोमर को टिकट दिया है  इससे आर एस एस लावी भाजपा से नाराज हो घर बैठ गई वही श्री तोमर की पलायनवादी नेता की छवि भी भाजपा को नुकसान पहुंचा सकती है। वहीं दूसरी और कांग्रेस ने पूरी दमदारी के साथ चुनाव लड़ा है जिसका फायदा उसे मिलता नजर आ रहा है ।

सूत्रों का मानना है है मोदी की अंदरूनी लहर ही नरेंद्र सिंह तोमर को जीता सकती है ?2014 में भाजपा को 43.96%औऱ कांग्रेस को 21.57% वोट मीले थे ।इसबार यहाँ 62.12 % मतदान हुआ ।

अभी तक के अनुमानों के मुताबिक इस चरण की आठ सीटो पर जिसने भोपाल, राजगढ़, गुना, ग्वालियर और मुरैना में कांग्रेस प्रत्यासी जीतते नजर आ रहे है , वही सागर औऱ विदिशा सीट पर भाजपा का कब्जा बरकरार रहेगा वहीँ भिंड लोकसभा सीट पर अनुमान लगाना अभी जल्दबादी होगा , हमे भी आपकी तरह आगामी 23 मईं का इंतजार है संसय की स्थिति स्प्ष्ट होकर तस्वीर सामने आएगी ?

आखरी चण में महासंग्राम :- लोकसभा चुनाव के आखरी चरण का निर्वाचन आगामी 19 मई में प्रदेश की 8 लोकसभा सीटों पर निर्वाचन हुआ । बता दे कि मालवा ओर निमाड़ क्षेत्र की 7 सीटो पर भाजपा का कब्जा है तो वहीं एक सीट रतलाम कांग्रेस के पास है । यहाँ भाजपा की साख दावँ पर है तो कांग्रेस के लिए करो या मरो की स्थिति है । सभी की कोशिश है कि अधिक आदिवासी सीटों को कब्जा ?

खास बात है कि प्रदेश की 6 सीट में से 4 सीटे जो अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है उनमें चुनाव होने है ,जिसमे सबसे पहले धार , देवास , रतलाम और खरगौन है । उज्जैन अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है , वहीं इन्दौर,खंडवा और मंदसौर सीटों पर सामान्य वर्ग के प्रत्याशी अपना भाग्य आजमा रहे है।

 धार अनुसूचित जनजाति संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत छह विधान सभा सीटों पर कांग्रेस और दो पर भाजपा का कब्जा है। मोदी लहर में भाजपा की सावित्री ठाकुर 1 लाख से अधिक मतो से जीतकर संसद पहुंची थी ।हाल ही के विधान सभा क्षेत्र में भाजपा के खराब प्रदर्शन से नाराज भाजपा हाई कमान ने सावित्री देवी ठाकुर का टिकट काट कर छतरसिंह दरबार पर दाँव लगाया तो कांग्रेस ने दिनेश गिरवाल को मैदान में उतारा है। असंतोष और भितरघात के दौर से गुजर रही इस सीट पर भाजपा कमजोर नजर आ रही है,मतदान तक कोई चमत्कार नही हुआ तो इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा तय माना जा रहा है।

देवास लोकसभा सीट भी अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित है। 2014 में भाजपा के मनोहर ऊंटवाल ने कांग्रेस के सज्जन सिंह वर्मा को ढाई लाख से अधिक मतो से परास्त किया था । हाल ही के विधान सभा चुनावों में भाजपा की चार सीटों पर कांग्रेस ने कब्जा कर भाजपा की झोला में मात्र चार सीट ही छोड़ी ,  भाजपा ने यहां से पूर्व जज महेंद्र सोलंकी को मैदान में उतारा है तो वहीं कांग्रेस ने कबीरपंथी भजन गायक पद्मश्री प्रहलाद टिपानिया को टिकट दिया है । इस आदिवासी बाहुल्य सीट पर बलाई समाज के वोट निर्णायक होता है ,वैसे तो दोनों ही प्रत्याशी इसी समाज से है परन्तु भजन गायक प्रहलाद टिपानिया की स्थिति बहुत मजबूत बताई जा रही है । जहां भी ये जाते है वहाँ भजनों की तान छिड़ जाती है बड़ी संख्या में लोग इनसे जूट रहे है और इनके जीत की गारेंटी भी दे रहे है । यहाँ से भी भाजपा को नुकसान होता दिखाई दे रहा है ।

रतलाम-झाबुआ कांग्रेस का गढ़ कहे जाने बाली यह  सीट 2014 की मोदी लहर में भाजपा ने इस सीट पर कब्जा कर लिया था ,परंतु 2015 के उप चुनाव में कांति लाल भूरिया ने फिर कांग्रेस का झंडा फहराया।आदिवासी बाहुल्य संसदीय क्षेत्र में 5 विधान सभा सीट कांग्रेस के पास तो 3 पर भाजपा को संतोष करना पड़ा। कांग्रेस ने फिर से कांति लाल भूरिया को टिकट से नवाजा है वहीं भाजपा ने विधायक जी एस डामोर को मैदान में उतारा है ।यहाँ भी कांग्रेस का पढ़ला भारी नजर आ रहा है । भाजपा के लिए अंदुरुनी मोदी लहर ही कोई चमत्कार कर सकती है , फिलहाल ऐसा होता नजर नही आ रहा है ।

 खरगौन अनूसूचित जनजाति लोकसभा क्ष्रेत्र के अंतर्गत 8 विधानसभा सीटो मे से 6 सीट पर कांग्रेस कब्जा है 1 सीट पर निर्दलीय ओर एकमात्र सीट भाजपा के पास है। मोदी लहर में भाजपा के सुभाष पटेल 2 लाख 57 हजार मतो से चुनाव जीते थे । विधानसभा में पूअर परफार्मेंस के चलते भाजपा शीर्ष ने सुभाष पटेल का टिकट काटकर गजेंद्र पटेल को दिया है वहीं कांग्रेस ने डॉ गोविंद मुजाल्दा को उतारा है। यहाँ पर भी सीधा मुकाबला भाजपा कांग्रेस के बीच है । यहाँ कांटे की टक्कर बताई जा रही है दोनो ही पार्टियों के लिये प्रतिष्ठ का प्रश्न है।इस सीट पर अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगा दोनो ही दलों के बीच तू डाल – डाल . तो मैं पात – पात की स्थिति है ।

इन्दौर भाजपा का गढ़ रही  इस लोक सभा सीट पर सभी की निगाहें लगी हुई है क्योंकि यहां से 9 बार की सांसद रही सुमित्रा महाजन “ताई” पिछले चुनाव में 4.66 मतो से जीते थी । भाजपा शीर्ष ने इसबार ताई के स्थान पर नया चेहरा शंकर लालवानी को प्रत्याशी बनाया है। यहां को 8 विधान सभा सीटो में से 4 पर भाजपा का तो चार सीटों के साथ कांग्रेस के पंकज संघवी चुनाव मैदान में है । यहाँ भी दोनो प्रत्याशी के बीच कांटे की टक्कर है भाजपा के पास जहाँ मजबूत संगठन है तो कांग्रेस प्रत्याशी के पास चुनाव लड़ने का अनुभव साथ ही कांग्रेस की प्रतिष्ठा बाली सीट इसे माना जा रहेगा है । अब देखना दिलचस्प होगा की ऊँठ किस करवट बैठता है ।

 खंडवा लोकसभा क्षेत्र अपने भीतर 8 विधानसभा सीटो को समाहित किये हुए है ।यहां 4 – 4 सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के पास है। मोदी लहर में नंदकुमार सिंह चौहान 3 लाख 28 हजार मतो से चुनाव जीते थे परन्तु हाल ही में संम्पन्न विधान सभा चुनाव में अब यह अंतर मात्र 70 हजार का रह गया है । भाजपा ने पुनः एकबार नंदकुमार सिंह चौहान पर दाँव खेला तो कांग्रेस ने भी अरुण यादव के चुनाव मैदान में उतारने से चुनाव बड़ा दिलचस्प हो गया है । यहां भी कांटे की टक्कर है कुछ कहा नही जा सकता कि कब किसका कौन सा दाँव लग जाय और बह विजय श्री प्राप्त कर ले ।

उज्जैन महाकाल की नगरी यह सीट अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित है । 8 विधानसभा सीटों ने से 5 सीटों पर कांग्रेस तो वहीं 3 सीटो पर भाजपा काबिज है । 2014 की मोदी लहर में भाजपा के चिंतामणि मालवीय ने कांग्रेस के प्रेमचंद गुड्डू को 3 लाख से अधिक बोटो से हराया है परंतु विधानसभा चुनावों के निराशाजनक परिणामो के चलते भाजपा हाई कमान ने इसबार चिंतामणि मालवीय का टिकट काट कर विधान सभा चुनावों में हारे हुए प्रत्याशी अनिल फिरोजिया को दिया वहीं कांग्रेस ने बाबू लाल मालवीय को चुनाव मैदान में उतार है।

भाजपा में असुंतुष्ठ ओर भीतरघात के समीकरणों के चलते फिलहाल भाजपा कमजोर नजर आ रही है। फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुचना जल्दबाजी होगा ।

 

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