ई-टेंडर में टेंपरिंग सामने आने के बाद टेंडर निरस्त क्यों किये गये , भाजपा बताये..?

भाजपा कह रही है कि ई-टेंडर में कोई घोटाला नहीं हुआ , तो बतायें कि भाजपा सरकार में ई-टेंडर में टेंपरिंग सामने आने के बाद टेंडर निरस्त क्यों किये गये ?, क्यों ईओडब्ल्यू को मामला सौंपा गया ?  क्यों एफआईआर दर्ज करने की बात की गई ?… नरेन्द्र सलूजा

ई- टेंडर घोटाले पर तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह जी को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ जी द्वारा 14 जून 2018 को इस घोटाले को लेकर जाँच कराने व दोषियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्यवाही करने को लेकर लिखा गया पत्र…

भोपाल :प्रदेश कांगे्रस अध्यक्ष और मुख्यमंत्री कमलनाथ के मीडिया समन्वयक नरेन्द्र सलूजा ने कहा है कि ई-टेंडर घोटाला सामने आने के बाद और उसमें पांच एफआईआर दर्ज होने के बाद भाजपा के नेता लगातार बयानबाजी कर रहे हैं कि ई-टंेडर में कोई घोटाला नहीं हुआ। सारे आरोप राजनीति से प्रेरित हैं और राजनैतिक बदला लेने के लिए इस तरह की एफआईआर दर्ज की जा रही है।
सलूजा ने कहा कि अभी तक किसी राजनैतिक व्यक्ति का नाम एफ़आईआर में नहीं आया है। उसके पहले ही इतना हो-हल्ला व शोर ? जब किसी का नाम ही नहीं आया तो फिर राजनैतिक बदला किस राजनेता से ? चोर की दाढ़ी में तिनका ? इतनी हड़बड़ाहट -बौखलाहट -बेचैनी क्यों ?

सलूजा ने कहा कि यह पूरा मामला उस समय सामने आया था जब पीएचई के जल निगम ने नल-जल समूह परियोजनाओं के तहत गांव से गांव में पानी पहुंचाने की परियोजना के 1000 करोड़ के तीन टेंडर जारी किये थे। जिसमें से सतना में 138 करोड़, राजगढ़ में 656 और 282 करोड़ के टेंडर थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को विगत 23 जून को इसमें से राजगढ़ की दो परियोजनाओं का शुभारंभ करना था। इन टेंडर की प्रतियोगी कंपनियो ने शिकायत की थी।
जिसकी जाँच कर मेप आईटी के तत्कालीन प्रमुख मनीष रस्तोगी ने इन ई-टेंडरों में सुनियोजित तरीके से छेड़छाड़ कर रेट बदलने की बात उजागर की, तब इन टंेडरांे को निरस्त किया गया।बाद में जाँच रिपोर्ट को ही दबाकर , उन्हें ही छुट्टी पर भेज दिया गया।प्रारंभिक जांच के बाद यह सामने आया कि भ्रष्टाचार रोकने के लिए जो ई-प्रेक्योरमेंट पोर्टल बनाकर ई-टेंडर की व्यवस्था लागू की गई थी, तत्कालीन शिवराज सरकार के समय उसमें भी भ्रष्टाचार के तरीके ढूंढ़ लिये गये। सारा मामला सामने आने के बाद यह बात सामने आयी कि 2014 से ही ऐसी गड़बड़ियों को अंजाम दिया जा रहा था। यह घोटाला एक हजार करोड़ का न होकर करीब तीन लाख करोड़ का हो सकता है। तत्कालीन कांगे्रस अध्यक्ष कमलनाथ जी ने उसी समय इस घोटाले की जांच को लेकर मुख्यमंत्री को 14 जून 2018 को एक पत्र भी लिखा था।

सलूजा ने उन भाजपा नेताओ से सवाल पूछा है कि जो कहते हैं कि कोई घोटाला नहीं हुआ, तो वे बतायें कि जब टेंपरिंग कर रेट बदलने की बात सामने आ गई, तब हल्ला मचने पर शिवराज सरकार ने पूरा मामला ईओडब्ल्यू को क्यों सौंपा ? जब इस मामले में शिवराज सरकार द्वारा एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिये जो कभी नहीं हो पाई तो किस आधार पर भाजपा नेता कह रहे है कि घोटाला ही नहीं हुआ ? टेंडर निरस्त क्यों किये गये ?
अपनी सरकार के निर्णयों पर स्वयं भाजपा नेता ही प्रश्नचिन्ह लगा रहे है। भाजपा नेताओं की बौखलाहट और बेचैनी ही बता रही है कि इस घोटाले में भाजपा के कई तत्कालीन मंत्री लिप्त हैं। तभी बेचैन होकर भाजपा नेतागण इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं। उनकी हड़बड़ी, बेचैनी और बौखलाहट उनके बयानों से ही समझी जा सकती है।

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