भाजपा से बट्टी होंगे लोकसभा प्रत्याशी..?

राजनीति में कोई स्थाई दुश्मनी नही होती है स्वार्थ के चलते दुश्मन भी एक साथ हो जाते है । अलग अलग राजनैतिक दल और विचारधारा कब एक दूसरे में समाहित हो जाती है कहा नही जा सकता ? इसी की बानगी हाल ही में सामने आ सकती है ? जब आदिवासी समाज उत्थान के लिए गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का दामन थामकर अमरवाड़ा से विधायक जीतकर आने बाले मनमोहन शाह बट्टी जो अभी तक भाजपा और कांग्रेस पानी पी – पी कर जनजाति समाज के शोषण के लिए जिम्मेदार ठहराते थे , वे आज दोपहर बाद भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण इस शर्त पर कर रहे हैं कि लोकसभा चुनाव 2019 के लिए छिंदवाड़ा से उन्हें अधिकृत भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के पुत्र नकुल नाथ के प्रतिद्वन्दी के रूप में उतारा जा रहा है।
बकौल मनमोहन शाह बट्टी इसे अपनी राजनैतिक जीत मानते हुए बताते है कि भाजपा उन्हें छिंदवाड़ा जिले से लोकसभा सीट कमल चुनाव चिन्ह पर लड़ाने के किये तैयार है , जबकि वे भाजपा के प्राथमिक सदस्य तक नही है और ना ही उन्होंने अपना बायोडाटा भी भाजपा को भेजा था ! परन्तु अपनी राजनैतिक कुशलता के चलते उन्हें यह सफलता प्राप्त की है ! इस बास्ते वे सम्भवतः आज दोपहर बाद बकायदा भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण करेंगे !इसके साथ ही उन के टिकट की अधिकृत घोषणा हो जाएगी ! इसके लिए पार्टी के उच्च पदाधिकारियों के आने का इंतजार है ? वे उन्हीं के सामने भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता विधिवत ग्रहण करेंगे उसके बाद छिंदवाड़ा से चुनाव लड़ने की तैयारियों में प्राणपन से जुटजाएँगे । उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि जनजाति वोट बैंक है हाल ही में सम्पन्न विधानसभा चुनाव में अमरवाड़ा क्षेत्र से लगभग 62 हजार वोट की बड़ी पूंजी उनके साथ है । इस पूंजी के आसरे ही वे कमलनाथ से टक्कर लेने के लिए आतुर हो रहे है ।

इस खबर से छिंदवाड़ा जिले के भाजपा खेमे में भूचाल आ गया है ? यहाँ चर्चा में शिवराज सिंह चौहान , फग्गन सिह कुलस्ते के बाद राष्ट्रिय जनजाति आयोग की उपाध्यक्ष अनुसुइया उइके के नमो में लोग उलझे रहे और कमल फूल मनमोहन शाह बट्टी की झोली में गिर गया ? सूत्र बताते है की मनमोहन शाह बट्टी के शीशे में पीछे चेहरा पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का लोग देख रहे है ? अपनी गर्दन बचाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मनमोहन शाह बट्टी को आगे कर अपने राजनैतिक जीवन को बलि चड़ने से बचा लिया ? प्रदेश में भाजपा की राजनीति के इस चतुरसुजान के कद का कोई और खिलाडी फिलहाल तो दिखाई नही पड़ता है खैर ………?

लोग तरह-तरह की बाते और चुनावी समीकरण की चौसरे सजाने में लग गए है ? कौन कितना कामयाब होता है यह तो आने बाला वक्त ही बताएगा ? आपके साथ-साथ हमे भी इस बात का इंतजार रहेगा…..

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