छिंदवाड़ा में मॉडल नहीं चेतुआ हो रहे तैयार : बट्टी

पूर्व विधायक मनमोहन शाह बट्टी ने तामिया से लोकसभा चुनाव का शंखनाद कर दिया ।  मनमोहन शाह बट्टी ने आदिवासी के साथ अन्य वर्गों के हक अधिकारों को लेकर संघर्ष का ऐलान कर दिया ।इसके साथ ही उन्होंने पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिये गये फैसले को सरकार की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराते हुये आदिवासियों के साथ हुये अन्याय, अत्याचार को लेकर आयोजित कार्यक्रम में पूर्व सरकार, वर्तमान मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ-साथ केंद्र व राज्य सरकार के द्वारा आदिवासियों के खिलाफ में बनाई जा रही नीतियों व निर्णयों को उजागर करते हुये बताया कि आदिवासियों के हितेषी ये सरकारे नहीं है। ये सरकार आदिवासियों का भला नहीं चाहती है ।

मनमोहन शाह बट्टी ने साफ शब्दों में कहा कि मैं विधानसभा चुनाव हार गया हूं तो ये समझें कि मेरा जमीनी संघर्ष समाप्त हो गया है । पूरी ताकत के साथ आदिवासी ही नहीं हर वर्ग के लिये जमीन पर उतरकर न्याय दिलाने के लिये जेल तक सफर कर संघर्ष करने के लिये हरदम तैयार रहूंगा और हमारी लड़ाई जारी रहेगी और जारी है और अभी लोकसभा चुनाव में छिंदवाड़ा जिले में ही अपनी व्यक्तिगत ताकत का एहसास करा कर दिखाऊंगा कि जमीनी आंदोलन में मेरा क्या स्थान है और कितने मतदाता मेरे साथ है।

पूर्व विधायक मनमोहन बट्टी ने कहा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के नाम पर राजनीति करने वाले राजनैतिक दल केंद्र व राज्य में बैठकर आरक्षण को समाप्त करने का षडयंत्र चला रहे है । सरकारी नौकरियों में दिखावा के लिये आरक्षण दे रहे तो प्रमोशन में आरक्षण समाप्त कर दिया है । अभी कुछ दिनों पहले ही 13 प्वाइंट रोस्टर लाकर विश्वविद्यालय में तो जनजातियों को प्रोफेसर बनने से ही रोक दिया था हमने और पूरे देश में विरोध हुआ तब जाकर अध्यादेश लाया गया है क्योंकि आने वाले समय में लोकसभा चुनाव है इसलिये लोक लुभावने निर्णय सरकार ले रही है । पूर्व विधायक मनमोहन शाह बट्टी ने कहा कि अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार अधिनियम में भी बदलाव करने का काम किया गया था पूरे देश में 2 अप्रैल में विरोध हुआ तो उसके सरकार ने निर्णय लिया इसका मतलब साफ है कि संविधान में प्रावधान किये  गये आरक्षण को समाप्त करने का षडयंत्र किया जा रहा है । इसलिये हमें भी ऐसी सरकारों से सतर्क रहने की आवश्यकता है।(मिडिया रिपोर्ट )

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