आलोक वर्मा सीबीआई निदेशक पद से बर्खास्त…….

सीबीआई मामले में सरकार की भद्द पीटने के बाद भी मोदी सरकार ने आज फिर इस बात की पुष्टि कर दी कि कोई भी स्वतंत्र संस्था सरकार से ऊपर नही है, फिर चाहे सीबीआई क्यों ना हो , मोदी सरकार जैसा चाहेगी उन्हें वैसा ही करना होगा ?

जानकारों के मुताविक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई हाई लेवल मीटिंग में आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक पद से हटाने का फैसला लिया गया है. प्रधानमंत्री मोदी के अलावा इस मीटिंग में लोकसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और चीफ जस्टिस के प्रतिनिधि के तौर पर जस्टिस ए के सीकरी भी मौजूद थे. सुप्रीम कोर्ट ने आलोक वर्मा के पक्ष में फैसला सुनाया था जिसके बाद उन्होंने बतौर सीबीआई निदेशक काम संभाल लिया था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय कमेटी ने आज गुरुवार शाम आलोक वर्मा को बतौर सीबीआई निदेशक पर से बर्खास्त कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आलोक वर्मा ने अपना पद फिर से संभाल लिया था. राकेश अस्थाना से विवाद के चलते सरकार ने इससे पहले आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेज दिया था.

खड़गे ने कहा था, वर्मा को पक्ष रखने का मिले मौका :- उच्चस्तरीय समिति की बैठक से पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि उन्होंने मामले में केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) की जांच रिपोर्ट सहित कई दस्तावेज मांगे हैं। उन्होंने गुरुवार को पत्रकारों से कहा, ‘मैंने मामले में सीवीसी की जांच रिपोर्ट सहित कुछ दस्तावेज देने के लिए कहा है।’ उन्होंने कहा था कि आलोक वर्मा को भी समिति के सामने उपस्थित होने का मौका मिलना चाहिए और उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका देना चाहिए।

सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा औैर विशेष निदेशक राकेश अस्थाना ने एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगााए थे जिसके बाद उन्हें जबरन छुट्टी पर भेज दिया गया था। वर्मा ने बुधवार को दोबारा पदभार संभालते हुए एम नागेश्वर राव द्वारा किए गए ज्यादातर तबादले रद कर दिए थे। राव वर्मा की अनुपस्थिति में अंतरिम सीबीआई प्रमुख नियुक्त किए गए थे।

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