मुसीबत में सरकार ,क्या यह सरकार पांच सालो तक टिक पाएगी ?

2 अंको के बहुमत से पिछड़ी कमलनाथ कांग्रेस ने निर्दलीय और अन्य के सहारे सरकार बनाने में सफल तो हो गई ,परन्तु नवनिर्मित कांग्रेस सरकार में मंत्रिमंडल गठन के बाद मलाईदार विभागों के आबंटन को लेकर राजा-महाराजा के समर्पित विधायक जिस तरह अति महात्वकंक्षाओ की नग्नता का दिगम्बर प्रदर्शन रहे है इससे कांग्रेस की छवि तो धूमिल हो ही रही है साथ -साथ विरोधियो को भी बोलने का अवसर मिल रहा है !पिछले दो दिनों से जिस तरह के समाचार आ रहे है इससे ऐसा नही लगता की यह सरकार पांच सालो तक टिक पाएगी ?

एक तरफ मंत्रियों के विभागों को लेकर जमकर खींचतान चल रही है, तो वहीं मंत्रीमंडल में जगह नहीं मिलने से निर्दलीय समेत कई विधायक बेहद खफा हैं और मंत्री पद की मांग कर रहे हैं| इनकी नाराजगी ने सियासत में हलचल बढ़ा दी है| वहीं बहुमत के आंकड़े से सिर्फ 7 सीटें दूर भाजपा की ओर से आ रहे बयान कांग्रेस नेताओं की धड़कनें बढ़ा रही हैं! कहीं अति महात्वकंक्षाओ के चलते भाजपा के भाग्य और राजा महाराजाओ की  कुटिल चालो से दूध का छिकां ना टूट जाय और बैठे ठाले मलाई का स्वाद भाजपा को चखने का मौका भी मिल सकता है ?

इन सबके बीच मैनजमेंट में माहिर मुख्यमंत्री कमलनाथ के लिए सबको साधना बड़ी चुनौती बन गया है| वहीं कांग्रेस के असंतुष्ट विधायक केपी सिंह, ऐदल सिंह कंसाना, बिसाहूलाल सिंह समेत 10 विधायक दिल्ली पहुंच गए हैं। वे राहुल गांधी से मुलाकात कर अपनी नाराजगी  जाहिर करेंगे !

निर्दलीय विधायक की चेतावनी , हमारे बिना नहीं चलेगी सरकार :- निमाड़ क्षेत्र बुरहानपुर विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक ठाकुर सुरेंद्र सिंह ‘शेरा’ ने सरकार को चेता दिया है कि बिना निर्दलीय विधायकों के कमलनाथ की सरकार नहीं चल सकती है ? सरकार निर्दलीय विधायकों को जल्द ही मंत्री बनाएगी क्योंकि पास ही २०१९ के लोकसभा चुनाव भी है ? कांग्रेस को हमारी जरूरत है। हमें तो मंत्री बनाया ही जाएगा। उन्होंने साफ किया कि सरकार ने उनका नहीं बुरहानपुर की जनता का मंत्री पद नहीं देकर नजरअंदाज किया। ठाकुर सुरेंद्र सिंह के इस बयान के बाद सियासी हल्कों में खलवली मच गई है । कांग्रेस ने केवल वारासिवनी से निर्दलीय जीते प्रदीप जायसवाल को कैबिनेट मंत्री बनाया है। तीन अन्य पर अब तक कोई फैसला नही हुआ है।

इन सब के चलते मुख्यमंत्री कमलनाथ ने और उनके समर्थित विधायको की खामोशी ने यह तो बता ही दिया की कमलनाथ का बजूद और अनुशासन में भी कमलनाथ का कोई सानी नही है ?  इन सब घमासान से बचने के लिए कमलनाथ ने हाईकमान का रास्ता अखित्यार करने का मन बना लिया है और सारे संकट के एक ही संकट मोचन राहुल गाँधी को प्रतिस्ठपित कर दिया है ? फिर जो भी चाहे अपनी अर्जी लगा सकता है ?

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