दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के बाद चुनाव आयोग कठघरे में…उमेश त्रिवेदी

दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा लाभ के पद के आरोप में बर्खास्त आम आदमी पार्टी के बीस विधायकों की बहाली के बाद लोकतंत्र के पैरोकारों को देश की  संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर घुमड़ रहे काले बादलों से जुड़े सवालों पर गंभीर विमर्श करना होगा। इसके लिए किसी पुरावे की जरूरत नहीं है कि पूर्व चुनाव आयुक्त अचल कुमार जोती केन्द्र सरकार के राजनीतिक हितों की रक्षा के लिए चुनाव आयोग जैसी संस्था की तटस्थता और विश्वसनीयता को दांव पर लगा रहे थे। जोती ने इस कृत्य से न केवल चुनाव आयोग को लांछित किया है, बल्कि राष्ट्रपति को भी विवादों के घेरे में ले लिया है। विधायकों की अयोग्यता के आदेश पर अंतिम मुहर राष्ट्रपति की ही लगी थी।

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