समाजवाद ही अंतिम विकल्प -डॉ लोहिया

प्रेस काम्प्लेक्स मे डॉ लोहिया और शहीद भगत सिंह को याद किया गया

छिंदवाड़ा //समाजवाद के प्रखर नेता डॉ राममनोहर लोहिया के जन्म दिन एवं शहीदे आजम भगत सिंह ,राजगुरु ,सुखदेव की सहादत पर हिन्द मज़दूर किसान पंचायत ,आज़ादी बचाओ आंदोलन के साथिओ ने प्रेस काम्प्लेक्स मे देश के इन महान क्रांतिकारिओं की जीवनी पर प्रकाश डाला इस अवसर पर साथिओ ने डॉ राममनोहर लोहिया,भगत सिंह ,राजगुरु ,सुखदेव को पुष्पमाला अर्पित करते हुए इनकी शहादत को अनमोल बताया इस अवसर पर हिन्द मज़दूर किसान पंचायत मध्य प्रदेश के महासचिव डी.के प्रजापति ने खा की डॉ लोहिया का मानना था की दुनिया मे अंतिम विकल्प मात्र समाजवाद ही हे डॉ लोहिया गैर-कांग्रेसवाद के शिल्पी थे देश में गैर-कांग्रेसवाद की अलख जगाने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी और समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया चाहते थे कि दुनियाभर के सोशलिस्ट एकजुट होकर मजबूत मंच बनाए। लोहिया भारतीय राजनीति में गैर कांग्रेसवाद के शिल्पी थे लोहिया मानते थे कि अधिक समय तक सत्ता में रहकर कांग्रेस अधिनायकवादी हो गयी थी और वह उसके खिलाफ संघर्ष करते रहे।

लोहिया के समाजवादी आंदोलन की संकल्पना के मूल में अनिवार्यत: विचार और कर्म की उभय उपस्थिति थी- जिसके मूर्तिमंत स्वरूप स्वयं डॉ॰ लोहिया थे और आजन्म उन्होंने ‘कर्म और विचार’ की इस संयुक्ति को अपने आचरण से जीवन्त उदाहरण भी प्रस्तत कियालोहिया ही थे जो राजनीति की गंदी गली में भी शुद्ध आचरण की बात करते थे लोहिया जी केवल चिन्तक ही नहीं, एक कर्मवीर भी थे। उन्होने अनेक सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनैतिक आन्दोलनों का नेतृत्व किया। सन १९४२ में भारत छोड़ो आन्दोलन के समय उषा मेहता के साथ मिलकर उन्होने गुप्त रेडियो स्टेशन चलाया। १८ जून १९४६ को गोआ को पुर्तगालियों के आधिपत्य से मुक्ति दिलाने के लिये उन्होने आन्दोलन आरम्भ किया। अंग्रेजी को भारत से हटाने के लिये उन्होने अंग्रेजी हटाओ आन्दोलनचलाया।लोहिया जानते थे कि विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका में अंग्रेजी का प्रयोग आम जनता की प्रजातंत्र में शत प्रतिशत भागीदारी के रास्ते का रोड़ा है। उन्होंने इसे सामंती भाषा बताते हुए इसके प्रयोग के खतरों से बारंबार आगाह किया और बताया कि यह मजदूरों, किसानों और शारीरिक श्रम से जुड़े आम लोगों की भाषा नहीं है भगत सिंह का जो योगदान इस देश के लिए हे वह कभी भुलाया नहीं जा सकता आज़ादी के दीवानो ने अपनी जान पर खेलकर देश को गुलामी से निजात पाने का मार्ग प्रशस्त किया ऐसे क्रांतिकारिओं को हम सलाम करते हे नमन करते हे आज का दिन हमें सिखाता है और उस सीख के साथ एक सामाजिक न्याय लाने की प्रक्रिया में अपना योगदान देना ही सच्ची सलामी होगी एक ऐसी व्यवस्था स्थापित करना , जहाँ एक इंसान दूसरे इंसान का शोषण न कर पाये भगत सिंह का इंक़लाब है आएं शहीदों की शहादतों को जिन्दा रखने की जिम्मेदारी लें. इस अवसर पर सुषमा प्रजापति ,शोभा शर्मा ,राजेश दीक्षित ,आर .के दुबे ,रमेश समर ,शंकर मोहोड़ ,प्रशांत काटकर ,आशीष मिश्रा ,सहित अन्य साथी उपस्थित थे

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