वन सुरक्षा पर खतरा , अनुबंध पर लगे 450 वाहन बंद….

वन सुरक्षा पर मंडराया खतरा बजट के अभाव मे वाहन विहीन हुये रेंज अधिकारी, बजट की कमी से मध्यप्रदेश में रेंजरों के लिए अनुबंध पर लगे 450 वाहन बंद
 वन कर्मचारी संगठन की लंबी चली हडताल के बाद वन सुरक्षा को व्यापक नुकसान हुआ वही अब बजट की कमी से वन परिक्षेत्र अधिकारियो के वाहन बंद किये जाने से वन की सुरक्षा और विभागीय कामकाज प्रभावित होने लगे है | पहले भी ईपेयमेंट सिस्टम से वन विभाग को सुदुर ग्रामीण इलाको मे कामकाज के लिये परेशानी उठानी पडी थी अब 1 लाख 60 हेक्टेयर मे पश्चिम वन मंडल छिंदवाडा की आठ रेंज में वाहन बंद होने से वनो की सुरक्षा अवैध कटाई सहित अन्य समस्याओ से निपटने रेंजरो को पसीना छूट रहा है | मध्यप्रदेश वन विभाग के 450 रेंजों में वनों की सुरक्षा के लिए अनुबंध पर लगे वाहन बजट से अभाव में बंद हो गए हैं। वाहन बंद होने से अधिकारियों के सामने जंगलों को बचाना चुनौती बनता जा रहा है। प्रशासनिक सूत्रो के मुताबिक सरकार द्वारा वन विभाग के बजट में कटौती कर दूसरे मदो में खर्च करना वाहन बंद होने की मुख्य वजह है | पहले वन विभाग की आवश्यकताए कुछ हद तक कैम्पा मद के फंड से पूरी हो जाती थी, वही कैम्पा फंड के नियमो में हुए बदलाव विभाग के लिए अब वन अधिकारियो के लिये परेशानी का कारण बन गये हैं। बताया जाता है कि बजट कटौती से वन विभाग के अधिकारी हैरान-परेशान है, वही अत्यंत संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए बजट की मांग वन विभाग ने कि है ताकि वाहन लगाकर गश्ती उन रेंजों में कराई जा सके। जानकारी के मुताबिक मध्यप्रदेश की साढे चार सौ रेंजों में अनुबंध पर लगे वाहनों में एक रेंज में तीस हजार यानी वन विभाग द्वारा प्रतिमाह 1 करोड़ 35 लाख रुपये वनों की सुरक्षा पर खर्च किए जाते हैं, लेकिन वाहनों के बंद होने से जंगलो में अतिक्रमण के साथ इमारती लकड़ी, बोल्डर रेत मिट्टी सहित अन्य चोरियों पर माफिया सक्रिय हो गये है। सबसे खास बात यह है कि प्रदेश में रेंजरों के वाहन बंद होने की जानकारी माफियाओं को लगते ही वनों में सक्रिय होकर वन संपदा को जमकर नुकसान पंहुचाने की रणनीति पर काम कर रहे है| शासन के निर्देश और प्रदेश के जिलों के वन वृत्त के मुख्य वन संरक्षक वन मंडल अधिकारी, के निर्देश के बाद भी एसडीओ रेंजर और मैदानी वन अमला पर अपनी जान जोखिम में डालकर सहित अपने निजी वाहनों से लगातार वनों की गस्ती कर वनों की निगरानी जर रहे हैं।

बजट की कमी से बंद हुये रेंजरो के वाहन ? – वन विभाग में रेंजरों के लिए अनुबंध पर लगी गाडिय़ा बंद होने के पीछे का वजह बजट की कमी होना है। बीते 16 अक्टूबर से मप्र की 450 रेंजों में रेंजरों के लिए अनुबंध पर लगी गाडिय़ां पूरी तरह बंद होने से वनों की सुरक्षा खतरे में पड़ती नजर आ रही है। वनों की। सुरक्षा जे लिए रेंजरों को अब पैदल या खुद के वाहन से गश्ती करना पड़ रहा है। इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि इसका असर वनों की सुरक्षा पर नहीं पड़ेगा। मप्र में 450 रेंजरों के लिए प्रतिमाह करीब 30 हजार रुपए की दर से चार पहिया वाहन अनुबंध पर लगे थे इन पर विभाग हर महीने 1 करोड़ 35 लाख रुपए खर्च करता आ रहा हैं। सरकारी वाहन नहीं होने की स्थिति में 2012 से अनुबंधित वाहनों के भरोसे फारेस्ट रेंजर है। पहली बार ऐसी स्थिति निर्मित हुई है। जब बजट के अभाव में गाडिय़ां बंद करनी पड़ी है।

वनमाफ़िया के हौंसले हुये बुलंद – रेंजरों के वाहन बंद होने के बाद से वन क्षेत्रों की नदियों से अवैध रेत का उत्खनन और लकड़ियों का परिवहन बढ़ गया है। विभिन्य रेंजों में बेखौफ अवैध रेत के डंपर और ट्रेक्टर ट्रालियां दौड़ने लगी हैं। खासबात यह है कि इसकी जानकारी वन विभाग को भी है। लेकिन वाहन के अभाव में कार्यवाही प्रभावित हो रही हैं। लेकिन जिलों का खनिज विभाग के कानों में जू तक नहीं रेंग रही है। यही वजह है कि प्रदेश की नदियों से रात के अंधेरे में बेखौफ अवैध रेत का कारोबार और लकड़ी की तस्करी धड़ल्ले से चल पड़ी है। वही छिंदवाड़ा सहित प्रदेश की सीमा महाराष्ट से लगे बैतूल,सिवनी,बालाघाट और बुरहानपुर की सीमाओं में चोर अधिक सक्रिय हो रहे हैं। वन विभाग से अनुबंधित वाहन हटा लिए जाने से वनों की सुरक्षा में सेंध लगने से इंकार नहीं किया जा सकता। छिंदवाडा पश्चिम में ही 8 रेंज की बात करे तो 1 लाख 60 हजार हेक्टेयर में वन क्षेत्र है। इसी तरह पूरे जिले में वन क्षेत्र भी बड़ा है। ऐसे में इन क्षेत्रों में जंगल माफिया सक्रिय होकर वनों को निशाना बनाने में लगे हैं।

डॉ. किरण बिसेन डीएफओ पश्चिम वन मंडल ने बताया कि महाराष्ट की सीमा के साथ सतपुड़ा और पेंच का क्षेत्र लगा होने से मामला संवेदनशील है,ऐसे समय में वाहनों का बंद होना चुनौती से कम नहीं है। लेकिन उड़नदस्ते के वाहनों से गश्ती कर वनों की सुरक्षा की जा रही है। बजट के अभाव में प्रदेश की रेंजों में लगे 450 वाहन बंद हो चुके है। लेकिन संवेदनशील रेंजों के लिए बजट की मांग की गई है बगैर वाहनों के बावजूद हमारी टीम वनों की सुरक्षा कर रही है।

नितिन दत्ता की रिपोर्ट 

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