शहीद किसी जाति, समाज के नहीं पूरे देश के होते है-सौरभ लोधी

बुलंद आवाज नारी शक्ति संगठन ने मनाया रानी अवंतीबाई का बलिदान दिवस
बालाघाट // 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की महान नायिका और महिलाओं की प्रेरणास्पद वीरांगना रानी अवंतीबाई का बलिदान दिवस 22 मार्च को मध्यप्रदेश बुलंद आवाज नारी शक्ति आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका संगठन और अखिल भारतीय ओबीसी महासभा  द्वारा मनाया गया। इस अवसर पर बालाघाट मुख्यालय में रानी अवंतीबाई चौक पर वीरांगना रानी अवंतीबाई की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया।
रानी अवंतीबाई के बलिदान दिवस पर मध्यप्रदेश बुलंद आवाज नारी शक्ति आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका संगठन और अखिल भारतीय ओबीसी महासभा ने काली पुतली चौक स्थित पुराने उद्यान में बैठक की। जहां प्रमुख रूप से मध्यप्रदेश बुलंद आवाज नारी शक्ति आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका संगठन की प्रदेश महासचिव योगिता कावड़े, अखिल भारतीय ओबीसी महासभा के प्रदेश प्रभारी सौरभ लोधी, युवा नेता आतिश लिल्हारे, हेमंत राजपूत, कांग्रेस युवा नेता विशाल बिसेन, हिन्दुवादी नेता मनोज टेंभरे, समाजसेवी राजा शुक्ला, ओबीसी महासभा छात्र मोर्चा के संभागीय अध्यक्ष भूपेन्द्र मसखरे, युवा कांग्रेस आईटी सेल जिला समन्वयक त्रिलोक सुलाखे, ओबीसी महासभा सचिव कुलभूषण नगपुरे और छात्रमोर्चा प्रभारी मानिक पिछोड़े सहित बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकायें मौजूद थी।
बैठक में मध्यप्रदेश बुलंद आवाज नारी शक्ति आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका संगठन की प्रदेश महासचिव योगिता कावड़े ने वीरांगना रानी अवंतीबाई की शौर्यगाथा का स्मरण करते हुए कहा कि रानी अवंतीबाई के जीवन से महिलाओं को प्रेरणा लेने की आवश्यकता है ताकि उनके तरह ही महिलायें ही हक और अधिकार के लिए संघर्ष कर सकें। उन्होंने कहा कि रानी अवंतीबाई ने विपरित परिस्थितियों में भी अपना हौंसला नहीं खोया और दुश्मनों को परास्त कर इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया।
अखिल भारतीय ओबीसी महासभा के प्रदेश प्रभारी सौरभ लोधी ने कहा कि वीरांगना रानी अवंतीबाई नारी और मातृशक्ति की पहचान है, शहीद किसी एक समाज, जाति का नहीं होता है बल्कि वह पूरे देश का होता है। वीरांगना रानी अवंतीबाई के शौर्य गाथा को  इतिहास में दबाने का प्रयास किया गया किन्तु उनकी वीरता ने आज उन्हें देश के वीर शहीदों में स्थान दिया है। पूरा देश वीरांगना रानी अवंतीबाई की जयंती और बलिदान दिवस पर उन्हें नमन कर उनकी शौर्यगाथा को याद कर, उनसे प्रेरणा लेता है। भले ही आज अंग्रेज नहीं है किन्तु परिस्थितियां बिलकुल वैसी है, जिनसे लड़ने के लिए महिलाओं को वीरांगना रानी अवंतीबाई की तरह हक और अधिकार के लिए लड़ने की आवश्यकता है।
बैठक के बाद रैली के रूप में सभी अतिथि और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका रानी अवंतीबाई के जयघोषों के साथ रानी अवंतीबाई चौक पहुंचे, जहां वीरांगना रानी अवंतीबाई की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन कर मोमबत्ती जलाकर श्रद्वासुमन अर्पित किया। इस अवसर पर सभी मातृशक्ति ने वीरांगना रानी अवंतीबाई के पदचिन्हों पर चलने का संकल्प लिया। वीरांगना रानी अवंतीबाई के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्वासुमन अर्पित करने के दौरान संगठन पदाधिकारी, अतिथियों के अलावा रत्नमाला वाहने, उमा गोलेन्द्र, दमयंती पटले, रीता गौतम, सुनीता पारधी, संजना मेश्राम, कुंदा देशकर, ज्योत्सना ठाकरे, गीता भेदे, वंदना बिसेन, कृष्णा त्रिवेदी, सरोज नेवारे, सरोज चौधरी, नेनेश्वरी पटले, जोशमी देशमुख, पंचशीला गेडाम सहित अन्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका उपस्थित थी।
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