इसलिए नहीं दी जाती यहां महिलाओं को प्रवेश की अनुमित..

क्या है केरल के सबरीमाला मंदिर का विवाद और क्यों नहीं मिलती यहां 10 से लेकर 50 वर्ष की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति, क्या कहता है त्रावणकोर देवासम बोर्ड महिलाओं को प्रवेश न देने पर, आईये हम बताते चले ….सुप्रीम कोर्ट ने आज केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का मार्ग प्रशस्त कर दिया है , इसी के साथ ही सदियों से चला आ रहा विवाद समाप्त हो गया , आएये हम बताते है की आखिर ये पूरा मामला आखिर है क्या …राकेश प्रजापति की रिपोर्ट 

केरल के सबरीमाला मंदिर में सदियों से चली आ रही परंपरा के मुताबिक मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध है. जिसमें मंदिर ट्रस्ट के मुताबिक इस मंदिर में 1500 साल से महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी लगी हुई है जिसके पीछे ट्रस्ट ने कुछ धार्मिक कारण बताए थे. महिलाओं को मंदिर में प्रवेश न देने पर ट्रस्ट के इस प्रतिबन्ध के खिलाफ केरल के यंग लॉयर्स एसोसिएशन ने वर्ष 2006 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की जिसके 10 साल बाद भी यह मामला लटका रहा.

सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के ट्रस्ट त्रावणकोर देवासम बोर्ड से जवाब मांगा था कि महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की इजाजत क्यों नहीं दी जाती ? जिसके जवाब देते हुए बोर्ड ने कहा था कि भगवान अयप्पन ब्रह्मचारी थे इसलिए मंदिर में सिर्फ छोटी बच्चियां और वो स्त्रियां ही प्रवेश कर सकती हैं जिनका मासिक धर्म शुरू न हुआ हो और जिनका मासिक धर्म खत्म हो चुका हो.

सात साल मामला लटका रहने के बाद केरल राज्य सरकार ने 7 नवंबर 2017 को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया था कि वह ऐतिहासिक महत्व वाले सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश देने के पक्ष में है. मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की पाबंदी पर 2006 याचिका दाखिल होने के बाद 2007 में एलडीएफ सरकार ने महिलाओं के सबरीमाला मंदिर में प्रवेश का पक्ष लेते हुए प्रगतिशील नजरिया अपनाया था .

कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ सरकार ने चुनाव हारने के बाद अपना पक्ष बदलते हुए कहा कि वह सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल वर्ग की महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ है. जिसके पीछे उनका तर्क था कि यह परंपरा 1500 साल से चली आ रही है. सभी पक्षों सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 11 जुलाई 2016 को साफ कर दिया था कि सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 वर्ष की आयु वाली महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी का 1500 सालों से चला आ रहा मामला कोर्ट की संवैधानिक पीठ को भेजा जा सकता है.

संवैधानिक पीठ को भेजे जाने के संकेत देने के पीछे सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का मामला है. इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि संविधान महिलाओं को यह अधिकार देता है कि वह कहीं भी प्रवेश कर सकें. अंत में कोर्ट ने कहा था कि अगर इस मामले को अगर संविधान पीठ के पास भेजा जाएगा तो इस बारे में विस्तृत आदेश पारित किया जाएगा.

2006 से सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का पर पाबंदी के खिलाफ दाखिल याचिका पर मामला अटका रहा जिसके बाद बीच बीच इस मामले की सुनवाई हुई लेकिन कोर्ट किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका था. जिसके बाद आज 28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश पर अपना सुप्रीम फैसला सुनाया और इसके साथ ही यह तय हो गाया कि मंदिर में महिलाओं का प्रवेश निषेध समाप्त कर  दिया गया है .

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