अस्पताल के इलाज में लगे है कमिश्नर इच्क्षित गढ़पाले….

पिछले चार महीनों से जिला चिकित्सालय के हालात बहुत ही ज्याद खराब है छोटी छोटी सी जांचो के लिए मरीजो को निजी अस्पतालों ओर पैथालाजी की ओर दौड़ लगाली पड़ती है , दूर दूर से आये गरीब तबके के लोगो को बेहद परेशानियों का सामना करना पड़ता है ! और यह सब बड़ी बेशर्मी के साथ जिला प्रबन्धन देख रहा है और तो और निजी पैथालाजी के लोग वार्डो में आकर भर्ती मरीजों के बेख़ौफ़ सेम्पल ले रहे है ,मगर कोई बोलने बाला नही है ? अब सवाल यह उठता है कि जिला चिकित्सालय के ऐसे हालत क्यो हो गये है या प्रबन्धन ने अपने निजी स्वार्थों के चलते ऐसे हालात तो निर्मित नही कर दिए ? सिविल सर्जन गोगिया ओर RMO सुशील दुबे आखिर कर क्या रहे है ? दोनो ही अस्पताल में मरीजो को देखते कभी नही मिलेंगे ? उच्चपदों पर बैठ कर मोटी तन्खाये लेने बाले इन कमज्रफो पर क्यो न पिछले दिनों होने बाली हरएक मौत के लिय जिम्मेदार मानते हुए गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया जाना चाहिए ?

चिकित्सालय के हाल बद से बदतर हो चुके है , कलेक्टर निकुंज श्रीवास्तव के बाद किसी भी कलेक्टर ने इस बीमार जिला चिकित्सालय को ठीक करने में कामयाबी हासिल नही की ? कारण चाहे जो भी हो हम इस मीमांसा में उलझना नही चाहते ?
लगभग रोजाना समाचार माध्यमो में अपनी अव्यवस्थाओ को लेकर सुर्खियों में बने रहना शायद चिकित्सालय प्रबन्धन का शगल बन गया है , बेशर्मी की दुशाला ओढे इन निर्लज्ज अधिकारियों औऱ अस्पताल का इलाज कर ठीक करने की जिम्मेदारी कलेक्टर वेद प्रकाश ने नगर निगम आयुक्त इच्छित गढ़पाले पर भरोसा कर सौपी की यही एक माई का लाल इस लाइलाज बीमारी को ठीक कर सकता है ? श्री गढ़पाले ने कलेक्टर के भरोसे को यकीन में बदलने के लिए अस्पताल की जर्जर व्यवस्थाओं का जायजा लेना शुरू कर दिया, चन्द दिनों में यहॉँ का नजारा बदलता हुआ दिखाई देने लगा है , श्री गढ़पाले ने साफ सफाई पर जोर देने के साथ साथ समय पर ड्यूटी ओअन्य व्यवस्थाओ पर ध्यान देना शुरू कर दिया ताकि एक एक अंग की सर्जरी हो सके ।

इसी के चलते आज श्री गढ़पाले को एक वरिष्ठ पत्रकार साथी ने ब्लड बैंक और पैथालॉजी डिपार्टमेंट वेंटिलेटर पर होंंना बताया , पहले तो कमिश्नर श्री गढ़पाले को यकीन नही हुआ कि चिकित्सीय सेवा का सबसे महत्वपूर्ण अंग होता है पैथलॉजी ! जो पीछे 4 माह यानी अप्रेल से लगभग मृत अवस्था मे है ? इस बात की जानकारी लगते ही जिला चिकित्सालय प्रभारी अचानक दोपहर 12 बजे पैथालाजी डिपार्टमेंट पहुचे उनके यहाँ पहुचते ही मानो भूचाल आ गया हो ? सबसे पहले इन्होंने एक एक कर जानकारी प्राप्त की और पाया कि सही में पिछले अप्रेल माह से डिपार्टमेंट में cbc मशीन खराब है और ना ही किसी प्रकार की ठीक ढंग से जांच ही नही हो पा रही है , अकेले इस डिपार्टमेंट में तकरीबन 48 प्रकार की जाँचे होती थी जिसमे cbc , kf ,ब्लड यूरिया, सीरम टेस्ट , लिवर , हार्ट , सोडियम , पोटेशियम ,किडनी से सम्बंधित जाँचे मशीने खराब होने ब आवश्यक किट उपलब्ध ना होने की वजह से इनकी जांच ही नही हो पा रही है !

48 जांचो में से 8 प्रकार की जाँचे भी नही हो रही है ! इस पर श्री गढ़पाले में डिपार्टमेंट इंचार्ज ओर स्टोर इंचार्ज को जमकर फटकार लगाई साथ ही स्टोर इंचार्ज ने अपना बचाब करते हुए बताया कि हमारे पास फंड ही नही है इसपर श्री गढ़पाले ने भोपाल बात कर फंड उपलब्धता की बात कही , इस अवसर पर मेडिकल कालेज के डीन तकि राजा भी मौजूद थे  उन्होंने भी आश्चर्य व्यक्त किया, साथ ही बताया कि मेडिकल स्टाफ भी मौजूूूद है मगर यहाँ के हालात बहुत ही ज्यादा खराब है आवश्यक उपकरण और सामान कि अनुुुुपल्बधत से ये अपने आप को ठगा सा महसूस करते है ? यहाँ के हालात इतने बदतर हो गये है की निजी अस्पतालों के एजेंट और पैथालाजी लैब के लोग जिला चिकित्सालय के वार्डो में भर्ती मरीजो के ब्लड सैम्पल लेजा रहे है और रिपोर्ट भी अस्पताल के बैड पर दे जाते है ! इस बात पर श्री गड्पाले ने कहा की अब यह सब नही चलेगा ,अगर निजी पैथालाजी का कोई भी व्यक्ति अस्पताल में भर्ती मरीजो का सेम्पल लेता हुआ पाया गया तो बह सीधे जेल भिजबा दिया जाएगा , साथ ही वार्ड इंचार्ज पर भी सख्त कार्यवाही की जाएगी ।

श्री गढ़पाले ने ख़बरद्वार को बताया कि शीघ्र ही जिला चिकित्सालय की व्यबस्थाओ में सुधार लाया जा रहा है ओर इसके लिए जिम्मेदार लोगों को भी बख्सा नही जायेगा।

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