कांग्रेस-BSP के बीच चल रहे याराने से दहशत में भाजपा ….

मध्य प्र देश विधानसभा चुनाव बिगुल बजने की तैयारी में है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान चौथी बार सत्ता पर काबिज होने के लिए ‘जन आशिर्वाद’ यात्रा पर हैं. वहीं,कांग्रेस राज्य में 15 साल के सत्ता वनवास को खत्म करने के लिए जद्दोजहद कर रही है. शिवराज सरकार को सत्ता से बेदखल करने के लिए कांग्रेस Bsp के साथ समझौता करने की कोशिश में भी जुटी है. इस याराना को देखते हुए Bjp सतर्क हो गई है.दोनों दलों का साथ आना Bjp के लिए चिंता का सबब होगा . ऐसे में पार्टी ने दलित मतों पर मजबूत पकड़ बनाने के लिए विशेष कार्य योजना तैयार की है 

मध्य प्रदेश में प्रदेश में तकरीबन 15 फीसदी दलित मतदाता हैं. Bjp का मुख्य आधार दलित मतों पर है. खासकर उत्तर प्रदेश से सटी विधानसभा सीटों पर है. राज्य में ऐसी 25 विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां बसपा जीत हार फैसला करती है.Bjp विकास के आधार पर कांग्रेस-बसपा की चुनौती से मुकाबला करना चाहती है. इसके लिए शिवराज सिंह चौहान की सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों और किसानों के बीच किए कार्यों के लेकर प्रचार-प्रसार शुरू कर दिया है.

दलित को साधने के मद्देनजर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने 2016 में उज्जैन में हुए कुंभ मेले में भाग लिया था. इस दौरान उन्होंने दलित संतों के साथ क्षिप्रा नदी में स्नान किया था. इसके अलावा उनके साथ भोजन भी किया था.विधानसभा चुनाव में कांग्रेस-बसपा के बीच बढ़ती नजदीकियों को देखते हुए सत्ताधारी Bjp दलित नेताओं से संपर्क बनाने में जुटी है. सूत्रों की माने तो Bsp से जुड़े नेताओं पर भी बीजेपी डोरे डाल रही है. मौजूदा समय में Bjp के पास दलित समुदाय का कोई बड़ा चेहरा नहीं है. यही वजह है कि पार्टी दलित समुदाय से किसी चेहरे को आगे बढ़ा सकती है.

ज्ञात हो कि Bsp पिछले छह सालों से यूपी के सत्ता से बाहर है. 2017 के विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद मायावती ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है. इसी का नतीजा है कि बसपा अलग-अलग राज्यों में गठबंधन करके चुनाव मैदान में उतर रही है. इसी कड़ी में माना जा रहा है कि बसपा कांग्रेस के साथ मिलकर उतर सकती है.Bjp का आकलन है कि मायावती उत्तर प्रदेश से लगी खासकर दलित बहुल सीटों पर प्रभाव डाल सकती हैं.  बुंदेलखंड इलाके में बड़ी आबादी दलित समुदाय की है. इसके अलावा कांग्रेस-बीएसपी गठबंधन मालवा क्षेत्र में बीजेपी को प्रभावित करेगा.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एक ओबीसी समुदाय से आते हैं. वे विभिन्न जाति समूहों और समाज के वर्गों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने अपनी अंतिम कैबिनेट विस्तार में कमजोर वर्ग से आने वाले चेहरों को शामिल करके संदेश देने की कोशिश की है.Bjp ने Obc मतों को साधने के लिए शिवराज सिंह चौहान, उमा भारती और बाबूलाल गौर को जिम्मेदारी सौंपी गई है. तीनों नेता पिछड़ी जातीय से आते हैं. इसके अलावा दलित समुदाय को साधने के लिए थवरचंद्र गहलोत को लगाया गया है.

Share News

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published.