बैलगाड़ी पर सरकार , सच या साजिश …….?

एक तरफ प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान मध्यप्रदेश की सड़कों को अमेरिका से अच्छी बताते है दूसरी तरफ मोपाल में कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ द्वारा छिन्दवाड़ा के विकास का माडल पेश किया जाता है ठीक अगले ही दिन छिन्दवाड़ा जिले के एक Ias की बैलगाडी में पनाह लेने बाली तस्बीर छपना , बरबस ही राजनैतिक चिंतको की माथे की लकीर को गहरी कर देती है ! क्या यह वस्त्बिकता है या किसी राजनैतिक साजिश की कुटिल चाल ? जो अनेकानेक सबालो को बरबस ही जन्म देती है ? क्या छिन्दवाड़ा के विकास का माडल वास्तब में ऐसा है की शासकीय योजनाओं के निरिक्षण करने जाने के किये जिले में अच्छी सडके नही है ? जहाँ आज भी 15 बरस कर शिवराज का राज बैलगाड़ी के आसरे रेंग रहा है ? यह तस्बीर तो शिवराज के राज पर ऊँगली उठाने जैसा है ? या फिर 15 बरस के शिवराज सिंह चौहान के राज में छिन्दवाड़ा जिले के साथ सौतेला व्यबहार ने इसके बुरे हाल कर दिए है ? या फिर जान बूझ कर ऐसी परिस्थिति पैदा कर दी गई ? कि किस तरह छिन्दवाड़ा के विकास के माडल को झुठलाया जा सके और इस कार्य को अंजाम देने के लिए गैर राजनैतिक, प्रशासनिक Ias अधिकारी को मोहरा बनाया गया ? अब इसे वास्तविकता समझे या फिर कोई राजनैतिक साजिश ? 21 वी सदी में बैलगाड़ी युग की अनुभूति होना यह अहसास ही रोमांचित करने बाला है !….. राकेश प्रजापति का विश्लेषण 

अब सबाल यह उठता है कि साल भर से अधिक समय से जिले में आये हुए जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी Ias रोहित सिंग को जिले की भौगोलिक परिस्थितियो से क्या वे बाकिफ नही है ? या बे जिस बैलगाड़ी के आसरे शासकीय योजना का निरिक्षण करने निकले वहां उन्होंने क्या पाया ? और क्या उन्होंने उक्त सडक को पक्की बनाने के निर्देश अधिकारियों को दिए ? या फिर वे पहली बार जिले के दौरे पर निकले ? बैसे तो प्रशासनिक Ias अधिकारी रोहित सिंग के बिषय में यह बात चर्चित है की उनका जमीनी हकीकत से सरोकार न होना ? ना ही मीडिया परसन से कोई मेल मिलाप और ना ही अपने अधीनस्थ कर्मचारियों पर विशवास ? ऐसे में सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं का सफल क्रियान्वन अपने आप में रोमानी अहसास जगाता है ? तो क्या ऐसे ही 15 बर्षो के शिवराज सिंह चौहान का शासन जमीनी हकीकत से कोषों दूर होने की कहानी बयाँ करता है ?  5-5 बार कृषि क्रामन्य अवार्ड पाने बाले प्रदेश में किसान कर्ज न चुकाने पर आत्महत्या करने के लिए मजबूर है ? तो क्या यह प्रदेश 15 बरसो से मात्र कर्ज ले ले कर बीमारू राज्य से विकसित राज्य की दौड़ का प्रतिभागी  है ?

बैसे तो इस प्रदेश ने विकास के कई प्रर्तिमान स्थापित किये है मसलन देश भर में बलात्कार में प्रथम , कुपोषण में , मातर शिशु  म्रत्यु दर में , गड्डो से होने बाली मौतों में , फर्जी वोटर लिस्ट में , अपराधो में , सामाजिक समरसता और सरोकारों के खंडित होने में, राजनैतिक और समजिक क्लेश बड़ने में , राज्य में प्रशासनिक और राजनैतिक खर्चो की बडोतरी में, सबसे ज्यादा पर्यावर्णीय शोषण में , खनिज सम्पदाओ की खुली लूट में ? धर्म और पर्यावरण के नाम पर फिजूलखर्ची में आदि आदि ….

इन 15 बरसो में वास्तविक विकास तो मात्र कर्ज का ही हुआ ? जो 2003 में लगभग 20 हजार करोड़ से दौड़ कर 2018 में 1 लाख  83 हजार करोड़ हो गया ? वाबजूद इसके आज भी छिन्दवाड़ा के हालात बैलगाड़ी युग की याद ताजा कर देते है ? या मात्र ऐसा अहसास दिलाया जा रहा है ? छिन्दवाड़ा की ऐसी तस्बीर उभरने पर बुधिजीवियो के मन में सबाल उठना लाजमी है ? तो क्या आगामी समय में विधान सभा चुनाव करने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह से तैयार है ? जैसा की पिछले दिनों जिला प्रशासन ने  चुनावों के लिए पूरी तरह से तैत्यार होने की पींगे  बकायदा प्रेस वार्ता आहूत कर भर रहा था ? परन्तु तस्बीर तो हुछ अलग है वयां करती है ? जिस पर यकीन करना भ्रम में जीने के समान है ?खैर …. 

Ias अधिकारी रोहित सिंह की बैलगाड़ी पर पनाह बाली तस्बीर के पीछे का सच जो भी हो ? परन्तु डरा अवश्य देता है ? हम इस मिमांस में जानने के लिए फिर मिलेंगे …… 

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