कलेक्टर पर हुआ 50 हजार रुपए जुर्माना….

प्रदेश में कार्यरत नौकरशाहो की विवादस्पद कार्यप्रणाली बार बार  प्रदेश सरकार की छवि कलंकित करने का काम कर रही है पहले प्रदेश के Dgp द्वारा न्यायपालिका पर टिप्पणी ने प्रदेश सरकार की फजीहत कर डाली जैसे तैसे मामला पुराना हुआ की उसकी राख में घांसलेट डालने का काम किया छिन्दवाड़ा कलेक्टर और नरसिंगपुर कलेक्टर की तुनकमिजाजी और अहंकार के चलते सरकार की थू थू कराई और अब  इंदौर कलेक्टर निशांत वरवड़े की बेजा हरकतों से ऐसा प्रतीत होता है की इस प्रदेश में नियम कानूनों के पालन कराने बाले खुद ही इनका उल्हंगन कर रहे है ? और प्रदेश सरकार द्वारा कोई कार्यवाही ना करना इन बिगडैल नौकरशाहो के हौसले पुष्ट करने जैसा प्रतीत होता है ?  इसका खामियाजा प्रदेश सरकार को आगामी विधान सभा चुनाव में उठाना पड सकता है ? मामला कुछ ऐसा है की …..

इंदौर खंडपीठ ने इंदौर कलेक्टर निशांत वरवड़े पर कोर्ट की अवमानना करने पर 50 हजार रुपए हर्जाना लगाया है। दरअसल, जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की बेंच में छोटा बांगड़दा के कुछ लोगों की जमीन से जुड़े मामले में चल रही अवमानना याचिका में उक्त हर्जाना लगाया। 2009 से चल रही याचिकाओं में पूर्व में कोर्ट आदेश पारित कर चुकी है, लेकिन इनका पालन ना करने पर 2017 में यह अवमानना याचिका लगाई गई।

इसमें भी कोर्ट ने पूर्व में कलेक्टर को व्यक्तिगत उपस्थित होने का आदेश दिया था, लेकिन पिछली तारीख पर कलेक्टर की ओर से समय लिया गया। इसके बाद फिर एक पेशी पर कलेक्टर पेश नहीं हुए ओर उनकी ओर से हाजिरी माफी का आवेदन आया। इस पर कोर्ट ने समय देकर अगली पेशी पर उन्हें उपस्थित होने को कहा था।

गत 29 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान भी ना तो कलेक्टर उपस्थित हुए ना ही उनकी ओर से हाजिरी माफी का आवेदन आया। इस पर याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट से कहा कि यह सीधे तौर पर न्यायालय की अवमानना का मामला बनता है। अतः कलेक्टर के विरुद्ध अवमानना की कार्रवाई की जाए।

कोर्ट ने तर्कों को सुनने के बाद कलेक्टर को अगली सुनवाई पर आदेश का पालन किए जाने के निर्देश के साथ कलेक्टर वरवड़े पर 50 हजार हर्जाना लगाया। यह राशि याचिकाकर्ताओं को अदा की जाएगी। अगली तारीख आगामी 17 सितंबर लगाई गई है।

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