मौत के मामले में मध्यप्रदेश देश के शीर्ष 3 राज्यों में ….

मध्यप्रदेश वर्ष 2013 से 2017 के दौरान 1385 लोगों की जान सिर्फ सड़क के गड्ढों के कारण गई। देशभर में गड्ढों के कारण हुई कुल मौत का यह 9.3 फीसदी है। सबसे ज्यादा 4415 मौतें उत्तरप्रदेश में हुई हैं। 2136 मौतों के साथ महाराष्ट्र दूसरे नंबर पर है।

मध्यप्रदेश में इस सड़क इस बार बड़ा चुनावी मुद्दा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के मध्य प्रदेश की सड़को को अमेरिका से बेहतर बताने वाले बयान के बाद विपक्षी दल सड़क के मुद्दे पर काफी मुखर है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की रोड सेफ्टी कमेटी के नोटिस ने मध्य प्रदेश में विपक्ष को प्रदेश बदहाल सड़को को लेकर एक बड़ा मुद्दा हाथ दे दिया है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का वह भाषण सुर्खियों में था जिसमें उन्होंने मध्य प्रदेश की सड़कों को  अमेरिका से बेहतर बताया था। अपने इस भाषण को सही ठहराने के लिए सीएम शिवराज लगभग हर बड़ी सभा में इस बात का जिक्र करते है कि मध्यप्रदेश की सड़कें दुनिया की बेहतरीन सड़कों में से हैं। सुप्रीम कोर्ट की कोर्ट की रोड सेफ्टी कमेटी के नोटिस ने मध्यप्रदेश सरकार की मुश्किल बढ़ा दी है। सुप्रीम कोर्ट की रोड सेफ्टी कमेटी के नोटिस ने देश में गड्ढों के कारण सबसे ज्यादा मौत होने के मामले में मध्य प्रदेश को तीसरे नंबर पर होने के लिए मध्य प्रदेश के अफसरों को तलब किया है। इस नोटिस के मुताबिक़ सड़कों पर गड्ढों के कारण होने वाली मौत के मामले में मध्यप्रदेश देश के टॉप-3 राज्यों में है।

सुप्रीम कोर्ट की रोड सेफ्टी कमेटी द्वारा गड्ढों से मौत के कारण मध्यप्रदेश का देश में तीसरा नंबर होने के कारण तलब किए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। चुनावी साल में सुप्रीम कोर्ट की रोड सेफ्टी कमेटी के नोटिस ने मध्य प्रदेश में सियासी हलचल मचा दी है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रदेश की सड़को को अमेरिका से बेहतर बताने के उलट इस कमेटी की रिपोर्ट ने बैठे बिठाए कांग्रेस को मुद्दा दे दिया है। पीसीसी अध्यक्ष कमलनाथ ने ट्वीट कर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधा है। उन्होंने लिखा है कि सडक पर गड्ढों के कारण मौतों में एमपी टॉप 3 में, सीएम कब खस्ताहाल सडकों को अमेरिका से बेहतर बताने की रट छोड़ेंगे।

सुप्रीम कोर्ट की रोड सेफ्टी कमेटी ने सड़क के गड्ढों से हो रही मौतों को गंभीरता से लेते हुए इस मामले में 4 सितंबर को पीडब्ल्यूडी, परिवहन और नगरीय विकास विभाग के प्रमुख सचिवों को तलब किया है। कमेटी ने मामले में आंध्रप्रदेश, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और उत्तरप्रदेश के अफसरों को भी तलब किया है। बैठक में गड्ढों से होने वाली मौतों को कम करने के अलावा इस बात पर भी विमर्श किया जाएगा कि पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की क्या प्रक्रिया हो। मुआवजे के लिए हर राज्य में एक कमेटी के गठन पर भी विमर्श किया जाएगा।

कमेटी की ओर से 29 अगस्त को भेजे गए पत्र में 20 जुलाई 2018 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अलावा 12 अप्रैल 2018 को दिए गए मुंबई हाईकोर्ट के फैसले का भी जिक्र है। इसमें कहा गया है कि बेहतर सड़कें संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार के दायरे में आती हैं। सुप्रीम कोर्ट की रोड सेफ्टी कमेटी के नोटिस ने विपक्ष को जहां प्रदेश सरकार पर हमलावार होने का मौका दे दिया है। वहीं बीजेपी विपक्ष के हमले को बेवजह बता रही है।

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