आधार कार्ड में फेरबदल कर हुआ राशन घोटाला ….

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कराई गई आंतरिक जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि राशन वितरण प्रणाली यानी राशन कार्ड के लाभार्थियों के आधार का इस्तेमाल कर एक बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया है। धोखाधड़ी के इस मामले में यह भी सामने आया है कि राशन कार्ड धारकों के आधार डेटा की मदद से प्रदेश के 43 जिलों में 1.86 लाख से अधिक परिवारों का राशन बाजार में बेचा गया। हालांकि, इस पूरे फर्जीवाड़े में एक और बात गौर करनेवाली है कि धोखाधड़ी के वक्त आधार की जानकारी को एडिट करके इस्तेमाल किया गया है।
ज्ञात हो कि शासन से 21 अगस्त को इस तरह की गड़बड़ी पर कार्रवाई के लिए पत्र आया था, जिसमें जिक्र किया गया, ’43 जिलों में आधार से संचालित पीओएस मशीनों में वास्तविक लाभार्थियों के आधार डेटा के साथ छेड़खानी की गई। 43 जिलों में से फर्जीवाड़े के सबसे ज्यादा मामले इलाहाबाद (37,500), मेरठ (27,000), मुजफ्फरनगर (19,000), गाजियाबाद (16,500) और नोएडा से (16,000) सामने आए।‘ 

दोषियों पर कायवाही के निर्देश :- खाद्य आयुक्त आलोक कुमार द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है, ‘राशन वितरण की निगरानी शासन स्तर पर NIC  (नैशनल इन्फर्मेशन सिस्टम) के जरिए की जाती है। हालांकि, इस पूरे फर्जीवाड़े में यह पता चला है कि कम्प्यूटर तकनीकि का इस्तेमाल करते हुए लाभार्थी के वास्तविक आधार नंबर में फेरबदल किया गया। इसके बाद धोखेबाजों ने बायोमीट्रिक ट्रांजैक्शन पूरा किया।’ पत्र में यह भी कहा गया है, ‘ट्रांजैक्शन हो जाने के बाद वास्तविक आधार नंबर फिर से सिस्टम से जोड़ दिया गया।’ इस हरकत की वजह से वास्तविक लाभार्थी को राशन नहीं मिल पाता।गौरतलब है कि शासन ने लाभ लेनेवाले आधार नंबर, डेटाबेस में फेरबदल करनेवाले ऑपरेटर और कोटेदारों आदि की जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। पत्र में यह भी लिखा है, ‘यह एक आपराधिक कृत्य है। जिन लोगों की वजह से वास्तविक कार्ड धारकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।’

ऐसे करते हैं फर्जीवाड़ा :- राशन कार्ड से लिंक असली आधार नंबर में कुछ देर के लिए फेरबदल किया जाता है। फेरबदल के बाद नए आधार नंबर वाले व्यक्ति के अंगूठे का इस्तेमाल कर राशन ले लिया जाता है। राशन लेने के बाद आधार नंबर को सही कर देते हैं। इसके चलते असली कार्ड धारक को राशन नहीं मिल पाता है।

फर्जीवाड़ा रोकने के लिए बनाया प्लान :- भविष्य में अपग्रेड वर्जन की ई-पॉस मशीनें लाने की तैयारी है। इसमें आंख की रेटीना का मिलान कर राशन दिया जाएगा। साथ ही, शासन स्तर पर अब खाद्य रसद विभाग ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के सॉफ्टवेयर में दखल के अधिकार सीमित कर दिए हैं। अब हर माह की 5 तारीख को डेटा फ्रीज कर दिया जाता है। इसके चलते आधार नंबर नहीं बदला जा सकेगा।

यूआईडीएआई के अधिकारी ने कहा, ‘आधार से पहले के दिनों को याद करें तो वास्तविक लाभार्थियों के अधिकार को कई लोग यूं ही हजम कर जाते थे। हालांकि, आधार के आने के बाद अब इन तमाम चीजों के सबूत होते हैं, जिससे पीड़ितों को न्याय मिल सके।’

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