जनजाति कार्यविभाग छिदंवाडा का कार्यनामा

छिदंवाडा :- आदिवासी विभाग इन दिनों कभी चर्चाओं में है चहों ठेकेदारों द्वारा छात्रावासों में सामाग्री सप्लाई हो ये अधिकारी ही ठेकेदार बन गया हो ये विभाग के मंडल संयोजक द्वारा छात्रावास अधिक्षक से उगाई की बात हो ये अधिक्षक द्वारा लापरवाही हो या बर्षों से जामे छात्रावास/आश्रम अधीक्षक पर सहायक आयुक्त की मेहरबानी कि बात आम हो गई हैं।
भले ही आदिवासी विकास विभाग का नाम बदल कर जनजातीय कार्यविभाग कर दिया गया हो लेकिन इस विभाग में जनजातियों का विकास तो कम ही हो पाता है पर जनजातियों के नाम पर विकास जरूर हो जाता है| कुछ चुनिंदा ठेकेदार पूरे विभाग में अपनी धाक वर्षों से जमाये बैठे हैं छात्रावास अधीक्षक और अधिकारी इनके रुपहले सम्मोहन में इस कदर फ़से हुए हैं कि उन्हें सहीं गलत भी नहीं देखता है जिले के एक सप्लायर ने कई छात्रावासों में गैस सिलेंडर तक बेंच दिया और तो और इन सिलेंडरों को रिफ़िल भी कर दिया गया है जिसका बाकयदा बिल भी लगाया गया है जिसे जांच कर भुगतान भी किया गया है इस पूरे मामले में मजे कि बात ये है कि इन बिलों का आडिट भी हो चुका है और आडिटर नें इन बिलों पर आपत्ति भी नहीं ली क्या विभाग के अधिकारी और आडिटर ये भी नहीं जानते हैं कि गैस सिलेंडरों को बेंचा नहीं जा सकता है ना ही कोई दुकानदार उसे रिफ़िल कर सकता है लेकिन छिंदवाड़ा के आदिवासी विभाग में ये सब सम्भव है |जाने कब इस विभाग के अधिकारी अपने लालच की कुम्भकरर्णीय नींद से जागेंगे कब सहींमें इस विभाग से अआदिवासियों का विकास हो पायेगा

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