वह अगर आज जिंदा हैं तो राजीव गांधी की बदौलत हैं …

अटल बिहारी वाजपेयी किसी भी दल और पार्टी से ऊपर के नेता थे और उन्हें सभी दलों के नेताओं का सम्मान मिलता था. सभी लोग उनका सम्मान करने के साथ-साथ उनका ख्याल भी रखते थे. यही कारण है कि एक बार जब उन्हें किडनी की समस्या हुई तो उनके राजनीतिक प्रतिद्वंदी राजीव गांधी ने उन्हें इलाज के लिए अमेरिका भेजा था.

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अब नहीं रहें. इस वक्त उनके जीवन से जुड़ी तमाम यादें, खबरें, कहानियां और किवंदतियां सामने आ रही हैं. अटल जी से जुड़ी एक कहानी यह भी है कि अटल जी के राजनीतिक प्रतिद्वंदी रहे पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने एक बार उनकी जान बचाई थी. बात 1990 की है. अटल जी किडनी की समस्या से जूझ रहे थे. उस समय इस बीमारी का इलाज अमेरिका में ही संभव था. लेकिन संसाधनों के अभाव में वह अपना इलाज कराने से हिचक रहे थे.

इस बीच यह खबर राजीव गांधी को मिली. उन्होंने अटल जी को अपने ऑफिस बुलाया और उनसे कहा कि वह उन्हें यूएन जाने वाले भारत के प्रतिनिधिमंडल में शामिल कर रहे हैं. इसके बाद राजीव ने धीरे से उनसे कहा कि ‘आशा है कि वह इस मौके का लाभ उठाकर अपना इलाज भी कराएंगे.’ इसके बाद राजीव ने अटल जी के इलाज की पूरी व्यवस्था की. स्वस्थ होने के बाद अटल जी ने राजीव जी को एक पोस्टकार्ड भेजकर उनको शुक्रिया कहा था.

हालांकि यह कहानी बहुत दिन तक राज ही बनी रही, जब तक अटल जी ने खुद इसे सबके सामने लाया. तब राजीव जी को याद करते हुए अटल जी ने भावुक होकर कहा था कि वह अगर आज जिंदा हैं तो राजीव गांधी की बदौलत हैं. फिर उन्होंने यह पूरी कहानी लोगों से साझा किया. शायद अटल जी की शख्सियत ही ऐसी थी. वह किसी भी दल और पार्टी से ऊपर थे और उन्हें अपने विरोधियों से भी सम्मान मिलता था.

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