12 साल में एक बार खिलता है ‘नीलकुरिंजी’ का फूल..

pm नरेंद्र मोदी ने बुधवार को लाल किले की प्राचीर से एक खास किस्म के फूल का जिक्र किया. यह फूल है ‘नीलकुरिंजी’. ‘नीलकुरिंजी’ का फूल 12 साल में एक बार खिलता है. खुशखबरी यह है कि 2006 के बाद यह फूल इस साल खिला है. अब आपको बताते हैं कि आप कहां इस फूल को देख सकते हैं..

देश की आजादी के 71 साल पूरे होने पर आज पीएम नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित किया. लाल किले की प्राचीर से पीएम मोदी ने भारत सरकार की कई योजनाओं का जिक्र किया और उनके बारे में बताया. यहां एक बात गौर करने वाली थी कि पीएम ने भाषण की शुरूआत करते हुए एक खास तरह के दुर्लभ ‘नीलकुरिंजी’ फूल का जिक्र किया, जो 12 साल में एक बार खिलता है.

पीएम मोदी ने इस बार अपने भाषण की शुरुआत नीलगिरी की पहाड़ियों में खिलने वाले खूबसूरत नीलकुरिंजी फूल से की. पीएम ने कहा कि देश आज नई ऊंचाईयों को पार कर रहा है. आज का सूर्योदय नए उत्साह को लेकर आया है. हमारे देश में 12 साल में एक बार नीलकुरिंजी का पुष्प उगता है, इस साल यह पुष्प तिरंगे के अशोक चक्र की तरह खिल रहा है. 12 साल के लंबे इंतजार के बाद इस साल यह फूल खिला है. दरअसल यह फूल केरल के इडुक्की जिले के मुन्नार में देखने को मिलता है. खूबसूरत हिल स्टेशन मुन्नार जायकेदार चाय के बागानों के लिए भी जाना जाता है.

तीन पर्वत श्रृंखलाओं (मुथिरपुझा, नल्लथन्नी और कुंडल) के संगम पर स्थित मुन्नार में यह फूल खिलता है. मुन्नार समुद्र तल से 1600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. नीलकुरिंजी को नीलगिरी या ब्लू माउंटेन भी कहा जाता है. आखिरी बार साल 2006 में यह फूल खिला था. नीलकुरिंजी फूलों का मौसम जुलाई से अक्‍टूबर तक रहता है. इन खूबसूरत फूलों के खिलने से मुन्नार की पहाड़ियों का रंग नीला हो जाता है. यही वजह है कि यहां के पहाड़ों को ‘नीलगिरी’ नाम भी दिया गया है. हर पौधा अपने जीवनकाल में सिर्फ एक ही बार खिलता है और फूल खिलने के बाद स्वतः खत्म हो जाता है.

नीलकुरिंजी का फूल खिलते ही मुन्नार में मधुमक्खियों और तितलियों का आना भी शुरू हो जाता है. नीलकुरिंजी का शहद बहुत खास होता है. कहा जाता है कि औषधीय गुणों वाला यह शहद 15 वर्षों तक खराब नहीं होता है. भारत को आजाद हुए 71 साल पूरे हो गए हैं और तब से लेकर अभी तक यह फूल सिर्फ 6 बार ही खिला है. अगली बार अब यह फूल 2030 में खिलेगा. अगर आप भी पीएम मोदी के कथन के बाद इस फूल को देखने के लिए उत्सुक हैं तो मुन्नार जाने के लिए आप सड़क, रेलवे और हवाईजहाज तीनों मार्गों से वहां पहुंच सकते हैं. केरल टूरिज्म का दावा है कि इस साल पूरी दुनिया से करीब 10 लाख टूरिस्ट इस फूल को देखने के लिए मुन्नार पहुंचेंगे.

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