व्यापम के बाद एक और बड़ा घोटाला,बिना परीक्षा के हजारो छात्र पास….

मध्यप्रदेश में व्यापम के बाद एक और बड़ा घोटाला सामने आया है. नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ ऑपेन स्कूलिंग यानि एनआईओएस की दसवीं और बारहवीं की परीक्षा में ऐसे 2000 हज़ार से ज़्यादा छात्र पास कर दिए गए, जो परीक्षा में बैठे ही नहीं थे. सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर ली है. इस घोटाले में देश के 20 राज्यों के छात्र और स्टाफ शामिल हैं.

इस घोटाले का केंद्र भोपाल स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑपेन स्कूल का रीजनल सेंटर है. घोटाला पकड़ में आने के बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने भोपाल स्थित रीजनल सेंटर के डायरेक्टर एस आर खान सहित 12 लोगों का ट्रांसफर कर दिया है.

पिछले साल सितंबर में सीबीआई को दिल्ली में एक शिकायत मिली थी. ये शिकायत मानव संसाधन मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी एस एस संधु ने की थी. शिकायत के साथ मंत्रालय की ओर से इंटरनल कमेटी की जांच रिपोर्ट भी उन्होंने दी थी. उसमें कहा गया था कि एनआईओएस की 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में जो छात्र उपस्थित ही नहीं थे, उन्हें भी पास कर दिया गया.

ये धांधली 10वीं-12वीं की अप्रैल-मई 2017 में हुई परीक्षा के दौरान किया गया. सीहोर, रतलाम और उमरिया के परीक्षा केंद्रों से बड़े पैमाने पर ऐसे छात्र पास किए गए, जो परीक्षा में बैठे ही नहीं थे. सीबीआई के व्यापम ज़ोन की जांच से ख़ुलासा हुआ कि ऐसे छात्रों की संख्या हज़ारों में है. इस घोटाले में मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, बिहार सहित 20 से ज़्यादा राज्यों के छात्र, संस्थान के अधिकारी-कर्मचारी और मिडिएटर के शामिल होने का पता चला है.सीबीआई ने 20 से ज़्यादा राज्यों में जांच की. प्रारंभिक जांच में गुवाहाटी के एनआईएस के एक कर्मचारी के अकाउंट में लाखों रुपए भेजने के साक्ष्य मिले हैं. सीबीआई की शुरुआती जांच में यह पता चला है कि मध्यप्रदेश स्थित रीजनल सेंटर से जो कॉपियां चैकिंग के लिए गुवाहाटी भेजी गई थीं, उनपर एनआईओएस का लोगो भी नहीं था. परीक्षा केंद्रों से भेजी गई अटेंडेंसशीट में भी टेंपरिंग की गई.

एनआईओएस मानव संसाधन मंत्रालय के अधीन काम करने वाला केंद्रीय संस्थान है, जो दूरस्थ पाठ्यक्रम संचालित करता है. एनआईओएस ही पूरे प्रदेश में केंद्रीय और जवाहर नवोदय विद्यालयों में परीक्षा केंद्र बनाता है. वर्तमान में संस्थान में डीएलएड के लिए 15 लाख शिक्षकों ने नामांकन कराया है. इसमें 1.65 लाख शिक्षक तो मध्‍य प्रदेश के हैं. 10वीं-12वीं के लिए हर साल औसतन 35 हजार छात्र भोपाल रीजनल सेंटर में रजिस्ट्रेशन कराते हैं. एनआईओएस से जारी 10वीं-12वीं के सर्टिफिकेट, सीबीएसई और माध्यमिक शिक्षा मंडल के सर्टिफिकेट की तरह ही मान्य हैं.

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