शासकीय शैक्षणिक संस्थाओं के हाल बेहाल , फिर कैसे सफल हो स्कुल चलो अभियान… ?

अमरवाडा क्षेत्र में शासकीय स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था हुई ठप्प , विद्यालयो में शिक्षकों की कमी से जूझ रहे विद्यार्थियों की नहीं हो पा रही पढ़ाई ,  अतिथि शिक्षकों की कमी से अध्यापन कार्य हो रहा प्रभावित कई ग्रामीण अंचलों में समय पर नहीं पहुंच पाते हैं आज भी शिक्षक , 
शासकीय शैक्षणिक संस्थाओं के हाल बेहाल…
छिदवाडा :-अमरवाड़ा विकासखंड सहित ग्राम सिंगोड़ी संकुल केंद्र अंतर्गत आने वाले विभिन्न शासकीय विद्यालयों में इन दिनों शिक्षकों की कमी से विद्यालय जूझ रहा है।वर्तमान समय में शिक्षकों की बहुत कमी है नए सत्र 2018-19 का नया सत्र प्रारंभ हो चुका है किंतु सरकारी स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक नहीं होने से प्राथमिक शाला से लेकर हायर सेकेंडरी के स्कूल तक में शैक्षणिक अध्यापन कार्य बहुत प्रभावित हो रहा है।जिसके चलते इसका असर सीधा-सीधा ग्रामीण क्षेत्र में दिख रहा है नौनिहाल बच्चे जो कल का भविष्य है आज वह सरकारी स्कूल में पढ़ने तो जा रहे है किंतु पढ़कर कुछ भी नही आ रहे है जब कुछ ग्रामीण छात्रों से जानकारी ली गई तो उन्होंने नाम न छापने की शर्त में बतलाया कि स्कूलों में पढ़ाई कम, काम ज्यादा करना पड़ता हैं क्योकि हाई और हायर सेकेण्डरी विद्यालय में चपरासी है किन्तु प्राथमिक ओर माध्यमिक विद्यालय में चपरासी नहीं होने से स्कूलों की सफाई बच्चो को ही करनी पड़ती है मिडिल स्कूलों में तो 3 कक्षाएं लगती है किंतु बहुत सी जगह मात्र 1 ही शिक्षको के ऊपर तीनो कक्षाओं की जिम्मेदारी है और ऊपर से सरकारी जानकारी भी देना है तो ऐसे में शिक्षा व्यवस्था सुधरेगी तो कैसे सुधरेगी ओर अध्यापन कार्य कैसे होंगे।इसी कारण सरकारी विद्यालय में पढ़ाई नहीं हो पाती है और मास्टर जी इधर-उधर डाक के चक्कर में जाते आते रहते हैं।

गौरतलब है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री विभिन्न मंचों के माध्यम से अपने भाषण में शिक्षा व्यवस्था को लेकर वाहवाही करते हैं किंतु यदि देखा जाए तो ग्रामीण क्षेत्र के अनेक स्कूल ऐसे होंगे जहां शिक्षकों की बहुत कमी आज भी है।और शैक्षणिक व्यवस्था अतिथि शिक्षकों के भरोसे चल रही है । मध्यप्रदेश में कई वर्षों से युवा शिक्षित बेरोजगार संविदा शाला शिक्षक भर्ती की परीक्षा का इन्तेजार कर रहे हैं लेकिन मध्य प्रदेश सरकार हर 3 वर्ष पर आयोजित होने वाली इस परीक्षा को करवाने में नाकाम नजर आ रही है हर वार पी ई बी के माध्यम से तारीख डल जाती है और फिर हटा दी जाती है जिससे बेरोजगार युवाओं ओर डी एड बी एड करे शिक्षित युवाओ में भारी आक्रोश व्याप्त है और सरकारी तंत्र पूर्णतः शिक्षक भर्ती प्रक्रिया करवाने में फैल होते दिख रहा है।जिससे लोगों में सरकार के प्रति आक्रोश सीधे सीधे देखा जा रहा है।
एम शिक्षा मित्र का नहीं है जिले में प्रभावी क्रियान्वयन , उपस्थिति दर्ज कराने हेतु रुचि नहीं ले रहे शिक्षक..
यूं तो सारे मध्य प्रदेश में शिक्षा विभाग के शासकीय आदेश के तहत 1 जुलाई 2018 से समस्त शासकीय शिक्षकों को एम शिक्षा मित्र एप के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करना है एवं स्कूल छोड़ने के समय में भी जाने का समय दर्ज करना है आदि इस एप्प के माध्यम से उपस्थिति लगाना और जाना अनिवार्य किया गया है किंतु आज भी बहुत से ऐसे शिक्षक क्षेत्र में है जो एम शिक्षा मित्र का उपयोग नहीं कर रहे हैं की कुछ नही होगा।ऊपर से यह सुनने में आता है कि हमे एंड्रोइड मोबाईल ही चलाना नहीं आता तो हम क्या करे।किंतु बहुत से ऐसे शिक्षक भी है जो समय पर आकर अपनी उपस्थिति लगाते हैं और समय पर जाते हैं और अपनी ईमानदारी को दरसाते है वही कुछ शिक्षकों से भी गुप्त रूप से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि शासन की यह योजना पूर्णरूप से फ्लॉप है क्योंकि बहुत से ग्रामीण अंचलों में सर्वर नहीं मिल पाता है ओर ना हीं नेट चल पाता है ऐसी स्थिति में कैसे में एम शिक्षा मित्र का प्रभावीक्रियान्वयन होगा भले ही सरकार कितने भी दावे कर ले कि शिक्षकों की कमर कस ली जाए और कितने ही बड़े बड़े प्रयास करें लेकिन यदि जो शिक्षक लापरवाह है तो वह कभी नही सुधर पायेगा क्यो की आदत से मजबूर हो जाते है।या फिर शिक्षा विभाग के बड़े अधिकारियों से तगड़ी सेटिंग हो जाती है जिस कारण लापरवाह शिक्षक किसी से नहीं डरता किंतु जिसका नुकसान सिर्फ मासूम बच्चो को भुगतना पड़ता है।
अतिथि शिक्षकों की भर्ती नहीं होने से शैक्षणिक व्यवस्था लड़खड़ाई , छात्रों में छाई मायूसी अध्यापन कार्य हो रहा प्रभावित…

यदि सरकार द्वारा शिक्षा व्यवस्था को सुदृण बनाने के प्रयास किये जा रहे है तो सारे के सारे बादे सरकार के खोखले साबित हो रहे है यदि हम आज की बात करे तो छिंदवाड़ा जिला ही नहीं संपूर्ण मध्यप्रदेश में लगभग 70000 हजार अतिथि शिक्षक प्राथमिक शाला माध्यमिक शाला हाई स्कूल और हायर सेकंडरी स्कूलों में वर्ग 1,वर्ग 2,वर्ग 3,में काम कर मनरेगा की मजदूरी से भी कम वेतनमान में अपनी सेवाएं सरकारी स्कूलों को निःस्वार्थ भावना से दे रहे हैं और नौनिहालों का भविष्य को संवार रहे हैं।युही नहीं बल्कि बोर्ड परीक्षा से लेकर स्थानीय परीक्षा का भी परिणाम सत प्रतिसत ला रहे है।किंतु अभी तक अतिथि शिक्षकों की भर्ती नहीं होने से बच्चों का भविष्य तो खराब हो ही रहा है साथ मे उनके स्वयंनके भविष्य के साथ भी सरकार शोषण कर रही है।जिले के बहुत से शासकीय विद्यालय आज भी अतिथि शिक्षकों के भरोसे चल रहे है।वही इस वर्ष अतिथि शिक्षकों की भर्ती को लेकर सरकार के आदेशों की प्रतीक्षा करते-करते सत्र निकलते जा रहा है किंतु अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया ऑनलाइन होने से पूर्व में कई वर्षों से अध्यापन कार्य करा रहे अतिथि शिक्षकों में रोष व्याप्त है फिलहाल सरकारी आदेश में अतिथि भर्ती में 9 से 14 जुलाई तक संशोधन की तारीख घोषित की गई किंतु एक भी बार पोर्टल नही खुला ओर बहुत से लोगों का संशोधन नहीं हुआ।अतिथि शिक्षकों की लॉगिन नहीं खुलना चॉइस फिलिंग का कार्य प्रारंभ नहीं होना ऐसी विभिन्न प्रकार की अनेक परेशानी अतिथि शिक्षकों को आ रही है इस संबंध में अतिथि शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष संतोष कहार ने बताया कि प्रदेश में सत्र 2018 19 हेतु अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति के आदेश ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना है जिसका अतिथि शिक्षक संघ पूरे 51 जिलों में विरोध कर रहा है एवं पूर्व से कार्यरत अतिथि शिक्षकों को कार्यरत संस्था में अध्यापन कार्य करने हेतु लगातार सरकार से मांग कर रहा हैं की उन्हें यथावत रखा जाए एवं अतिथि शिक्षकों का सेवाकाल बढ़ाकर 12 माह एवं वेतनमान 12 महीने का प्रदान करने हेतु लगातार आंदोलनरत है 10 वर्षों से कार्यरत अतिथि शिक्षकों के सामने बहुत बड़ी समस्या खड़ी हुई है और उनका भविष्य अंधकार में है और इस प्रकार बार-बार सरकार के द्वारा नए नए आदेश के तहत अतिथि शिक्षकों को समस्या में डालते जा रहा है जिसके कारण अतिथि शिक्षकों में बहुत आक्रोश व्याप्त है यदि जल्द ही पूर्व से कार्यरत अतिथि शिक्षकों को कार्यरत संस्था में करने हेतु अनुभव के आधार पर आदेश जारी नहीं करते हैं तो अतिथि शिक्षक इस बार बृहद आंदोलन कर विधानसभा चुनाव में इसका जवाब देंगे।

ग्रामीण क्षेत्रों में जिला मुख्यालय से प्रतिदिन अप डाउन करते हैं शिक्षक, समय पर स्कूल नहीं खुलने से होती है शैक्षणिक व्यवस्था कमजोर

विभिन्न शासकीय विद्यालय में अधिकांशतः शिक्षक स्थानीय स्तर पर ना रूककर जिले से अपना आवागमन करते हैं जिससे कई बार शिक्षकों का समय पर ना आना बच्चों के भविष्य के लिए अंधकारमय सिद्ध होता है।किंतु यह वाक्या कोई आज का नहीं है यह पिछले कई वर्षों से क्षेत्र में चला आ रहा है कि शिक्षक अपनी मनमर्जी का मालिक है उसको किसी भी अधिकारी का भय नहीं ही ओर न ही कोई कार्यवाही की देखा जा रहा है कि बहुत अंदर के ग्रामीण स्कूलों में शिक्षक आज भी 10:30 की वजह दोपहर 12:00 बजे तक विद्यालय में पहुंचते हैं क्यो की अंडब्के स्कूलों में जांच करने वाला कोई नही है । कई जगह तो ऐसी व्यवस्था है कि विद्यालय को खोलता कोई और है और बंद करता कोई और है मतलब शिक्षक समय पर कभी नही पहुंचते हैं । कई बार तो स्कूलों को छात्र छात्राये शिक्षक के आने से पहले से ही खोल देते है दोपहर 12 बजे के समय शिक्षकों का स्कूल आना शिक्षकों के कार्यकुशलता का परिचय देता है। ।ऐसी लचर व्यवस्था से क्षेत्रवासी भी काफी परेशान है किंतु राजा बोले आमा फूले की तरह शिक्षकों का रवैया क्षेत्र में नजर आता है जीसकी कोई सीमा नहीं है इसलिए जब तक सरकार या विभाग के आलाधिकारी ऐसे लापरवाह कमजोर शिक्षकों के प्रति कोई कदम नही उठाता है या कार्यवाही नहीं करता है तो लापरवाह शिक्षकों के हौसले इसी प्रकार बुलंद होते जाएंगे और छोटे छोटे नन्हे मुन्ने बच्चे का भविष्य जो कल के भविष्य के निर्माता है उनके भविष्य अंधकार की ओर बढ़ता जा रहा है ऐसे में नोनिहालो का भविष्य कैसे उज्जवल होगा। यदि शिक्षक ही जो शिक्षा प्रणाली के रक्षक है वो ही भक्षक बन जाये तो बच्चों को कैसे उच्च शिक्षा मिल पायेगी। इस प्रकार शिक्षा व्यवस्था की प्रणाली में कई प्रकार के प्रश्न चिन्ह उठते है अब देखना यह होगा कि जिले ओर ब्लाक के वरिष्ठ अधिकारी ऐसे लापरवाह शिक्षकों पर क्या कार्रवाई करते हैं या फिर शैक्षणिक संस्थाएं में इसी प्रकार नौनिहालों बच्चों के भविष्य के साथ शिक्षा विभाग उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करता रहेगा और शासन प्रशासन मौन बनकर खड़ा रहेगा। यदि जल्द ही शैक्षणिक गुणवत्ता पर सुधार और शिक्षकों की लापरवाही को नहीं रोका गया तो सरकार के तमाम कोशिसे व्यर्थ ही सिद्ध होगी और करोड़ो रूपये सरकार के व्यर्थ खर्च साबित होंगें ।

तौफीक मिस्कीनी की रिपोर्ट 

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