म प्र में भी तीसरे मोर्चे की सुगबुगाहट , शरद यादव करेंगे अगुवाई…

केंद्र की राजनीति में तीसरे मोर्चे के गठन की संभावनाओं के बीच अब मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी तीसरे मोर्चे का गठन किया जाएगा. इसकी अगुवाई वरिष्ठ नेता शरद यादव करेंगे. विधानसभा चुनाव से पहले तीसरा मोर्चा के बैनर तले आधा दर्जन क्षेत्रीय दल एक साथ आने को तैयार हो रहे हैं.

तीसरे मोर्चे के गठन को लेकर 2 अगस्त को भोपाल में बड़ा आयोजन होने वाला है. इसमें शरद यादव गुट वाला जेडीयू, बहुजन संघर्ष दल और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी समेत कई छोटे दल एक साथ होंगे. तीसरा मोर्चा की अगुवाई शरद शरद यादव कर रहे हैं.

चुनाव में क्षेत्रीय दलों के चुनावी गणित बड़े दल के प्रत्याशियों के हार-जीत के समीकरण को बिगाड़ने में बड़ा रोल अदा करते हैं, और यहीं कारण के है 2013 के चुनाव में एक बड़ा वोट तीसरा मोर्चा के खाते में गया था.

2013 के चुनाव नतीजों में क्षेत्रीय दलों के खाते में गये वोट पर नजर डालें तो :- गोंडवाना गणतंत्र पार्टी को 1.0005 फीसदी , बहुजन संघर्ष दल को 0.5003 फीसदीअखिल भारतीय गोंडवाना पार्टी को 0.3348 फीसदीनेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी को 0.2934 फीसदी, जनता दल यूनाइटेड को 0.2517 फीसदी, भारतीय शक्ति चेतना पार्टी को 0.2336 फीसदी, महान दल को 0.1543 फीसदी, राष्ट्रीय समानता दल को 0.1100 फीसदीशिवसेना को 0.1100 फीसदी वोट मिले थे , 

कई सीटों पर बीजेपी और कांग्रेस के जीत हार का अंतर पांच सौ से लेकर 2 हजार वोट का था और इस हार जीत के इस समीकरण को प्रभावित करने का काम तीसरा मोर्चा के बैनर तले चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों ने किया था.

तीसरा मोर्चा के दलों के प्रभाव वाले क्षेत्र :- बहुजन संघर्ष दल का प्रभाव ग्वालियर, चंबल, विंध्य और मालवा अंचल में है, जबकि गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और समानता दल का असर महाकौशल की सीटों पर है. ऐसे में यदि तीसरा मोर्चा एक बैनर के तले आता है तो तय है कि इस बार भी बीजेपी और कांग्रेस के जीत के गणित को नया मोर्चा प्रभावित करेगा.

प्रदेश में अब चुनाव को पांच महीने का समय बाकी है और एक तरफ जहां कांग्रेस बसपा और सपा के साथ गठबंधन कर अपने को मजबूत बनाने की रणनीति में जुटी है वहीं अब प्रदेश में तीसरा मोर्चा भी बीजेपी और कांग्रेस से लड़ने को एकजुट दिख रहा है.

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