खबर का असर , कंडोम के पैकेट से हटाया गया ‘आशा’ नाम ….

पिछले दिनों ” खबरद्वार ” समाचार समूह  ने आशा-उषा कार्यकर्ताओं की समस्याओं को प्रमुखता से स्थान दिया जो कंडोम के चलते छेड़छाड़ का शिकार हो रही है आशा-उषा ….सरकार महिलाओं के सम्मान की बात करती है। वहीं दूसरी ओर उनके अपमान के लिए आशा कंडोम बंटवाने को मजबूर कर रही थी ,  गर्भ निरोधक बांटने के दौरान आशा कार्यकर्ताओं को अश्लील कमेंट के कारण शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है… क्या यही सोचकर सरकार ने कंडोम का नाम आशा रखा था ? 

नाम के साथ प्रकाशित की गई थी जिसे पाठको ने सबसे ज्यादा पड़ा , मात्र सुर्खिया बटोरना ही “खबरद्वार” का उद्देशय नही रहा ,बल्कि उसे अंजाम देने में भी “खबरद्वार” ने अपनी महती भूमिका का निर्वहन किया ,पाठको का स्नेह इसी तरह बना रहे ताकि हम आपकी आबाज को अंजाम तक पहुचाने में इसी तरह कामयाब  हो सके .समुह संपादक- राकेश प्रजापति  

केंद्र सरकार की तरफ से परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत परिवार नियोजन के लिए सप्लाई किए जाने वाले गर्भनिरोधक कंडोम का नाम आशा कार्यकर्ताओं के नाम पर ‘आशा कंडोम’ रखने पर विवाद हो गया था. इस नाम का विरोध कर रही आशा कार्यकर्ताओं ने कंडोम के इस नाम को लेकर विरोध जताया था जिसके बाद सरकार ने इस कंडोम के पैकेटों से आशा शब्द हटा दिया है.

परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत केंद्र सरकार की तरफ से परिवार नियोजन के लिए सप्लाई किए जाने वाले कंडोम का नाम आशा कार्यकर्ताओं के नाम पर “आशा” कंडोम रखे जाने को लेकर हुए विवाद खड़ा हो गया था. आशा कार्यकर्ताओं ने ये कहते हुए इन आशा कंडोम को बांटने से मना कर दिया था कि गर्भनिरोधक कंडोम बांटने के समय उनको लोगों के अश्लील कमेंट के चलते भारी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है. इस मामले में चली लड़ाई के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने आशा कंडोम का नाम बदलने को लेकर सहमति जता दी है. अब से गर्भनिरोधक कंडोम के पैकेट पर आशा नहीं मिलेगा.

मध्य प्रदेश में कई जिलों में आशा कार्यकर्ताओं ने इस आशा कंडोम को वितरित करने से इंकार कर दिया था. इन कंडोम को लेकर कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन रायसेन जिले से शुरु हुआ था जिसके बाद ये पूरे प्रदेश के जिलों में फैल गया था. स्वास्थ्य विभाग की तरफ से इन आशा कंडोम को बांटने का काम ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ताओं को सौंपा गया था ! मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता को आशा कार्यकर्ता के नाम से जाना जाता है. विरोध के बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन राज्य कार्यालय ने आशा कंडोम का नाम बदलने की पुष्टि तो कर दी है लेकिन वो इस बात को स्वीकार नहीं कर रहे कि कंडोम के नाम में ये बदलाव कार्यकर्ताओं के विरोध के कारण हुआ है.

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन प्रभारी निदेशक वंदना खरे ने बताया कि ‘आशा कंडोम का नाम बदलकर सिर्फ कंडोम कर दिया गया है. और हमें जुलाई में केंद्र से नए पैकेट मिल गए.’स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के मुताबिक, नई दिल्ली में आयोजित एक हालिया बैठक में इस मामले पर चर्चा की गई थी. एक अधिकारी ने कहा, ‘मध्य प्रदेश के अधिकारियों ने अनुरोध किया कि कंडोम के पैकेट से ‘आशा’ शब्द को हटा दिया जाए क्योंकि उन्हें पैकेट वितरित करने में शर्म आती है और यह उनके काम को प्रभावित कर रहा था.

नाम बदले का अनुरोध करते हुए मंदसौर की आशा कार्यकर्ता ने कहा, ‘मुझे गांव और परिवार में आलोचना का सामना करना पड़ रहा था. मेरे पति ने मुझे चेतावनी दी कि मुझे नौकरी छोड़नी चाहिए या नाम बदलने तक काम करना बंद कर देना चाहिए. इस महीने, मुझे ऐसे पैकेट मिले जिनपर हमारा नाम नहीं छपा है. हमें खुशी है कि सरकार ने हमारा विरोध सुना गया था.’

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