इस फॉर्मूले के मुताबिक होगा उम्मीदवारों का चयन….

पिछले 14 बरसों से सत्त्ता का वनवास भोग रही कांग्रेस पार्टी हर हाल में सत्ता वापसी चाहती है|वहीं चौथी बार सरकार बनाने की तैयारी कर भाजपा के मुकाबले कांग्रेस ने भी अपनी चुनावी अभियान तेज कर दिया है| लगातार बैठकों का दौर जारी है| पीसीसी चीफ कमलनाथ दौरे पर हैं और चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया भी संभागों में बैठकें कर रहे हैं| वहीं एमपी कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष मधुसूदन मिस्त्री ने आज प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में टिकट के दावेदारों से चर्चा कर रहे है| कांग्रेस उम्मीदवारों की पहली सूची 30 जुलाई को जारी करेगी, जिसमे लगभग 70 प्रत्याशियों के नाम हो सकते हैं! विधानसभा चुनाव में कांग्रेस किसे टिकट देगी और किसे नही का फार्मूला लगभग तय हो चुका है|

सूत्रों के मुताबिक इस बार कांग्रेस 30 फीसदी नए चेहरों को मौक़ा देगी | इसका मतलब साफ़ है, नए चेहरे वो होंगे जिन्होंने कभी विधायक का चुनाव न लड़ा हो, भले ही वो जनपद अध्यक्ष, जिला जनपद अध्यक्ष, या अन्य पद पर रहा हो| ऐसे कैंडिडेट को कांग्रेस प्रमुखता देगी| सिंधिया भी कई बार इस फॉर्मूले की वकालत कर चुके हैं| वहीं उम्र को लेकर दीपक बावरिया कई बार कह चुके हैं| लेकिन सूत्रों के मुताबिक टिकट वितरण में उम्र का कोई बंधन नहीं होगा| टिकट वितरण के बाद पार्टी के अंदरखाने विरोधी खेमा सक्रीय न हो इसके लिए सर्वे और फॉर्मूले की बात की जा रही है| ताकि सभी को एक साथ लेकर चुनाव में जाय जा सके| रणनीति के तहत इसी काम के लिए दिग्विजय सिंह प्रदेश भर में यात्रा कर रहे हैं|

दिल्ली के कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक 2018 विधान सभा चुनाव के लिए मध्य प्रदेश में टिकट वितरण को लेकर क्राइटएरिया बना है| सूत्रों के अनुसार टिकट वितरण में यह फार्मूला अपनाएगी कांग्रेस:-  1 . गत विधानसभा चुनाव ( 2008 तथा 2013 ) दोनों मे  पराजय वाले दावेदारों को टिकट नही। 2 . गत विधानसभा चुनाव ( 2013)में 20 हजार से अधिक से हारने वाले को टिकट नहीं। 3 . एक ही परिवार से यदि 2 अलग अलग सदस्यों को अवसर मिला और पराजित हुए तो अब अवसर नही दिया जायेगा। 4 . वर्तमान विधायक के खिलाफ यदि लोकसभा प्रत्याशी ने शिकायत की है तो उसकी पूर्ण समीक्षा उपरान्त ही टिकट। 5.  टिकटार्थी के परिवार ( ब्लड रिलेशन/ सगे भाई ,बहन ,पति,पत्नी) यदि भाजपा के पदाधिकारी/ जनप्रतिनिधि है तो समीक्षा उपरान्त ही पैनल मे नाम आये। 6 नये सदस्य जो भाजपा या अन्य दल से कांग्रेस में आये है उनको टिकट देने  से  अन्य  ( क्षेत्रीय सीमावर्ती) सीटों पर क्या सकारात्मक/ नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा इसकी समीक्षा , स्थानीय नेताओं की सर्वसम्मति से ही टिकट।  7 . विधानसभा क्षेत्र मे प्रभावशाली एक ही जाति विशेष को यदि लगातार 2 बार से पराजय मिल रही हो तो समीक्षा उपरान्त अन्य जाति के उम्मीदवार को प्राथमिकता मिले। 8 .लगातार 3 या अधिक बार से विधानसभा चुनाव जिन सीटों पर हार रहे है वहाँ की समीक्षा पृथक से हो। इन सीटों पर पार्टी के युवाओं / अन्य सामाजिक क्षेत्र से यदि कोई कांग्रेस विचारधारा वाले सोशल वर्कर / आर टी आई एक्टिविस्ट हो तो उन्हें प्रथमिकता मिले। 9 .दो हजार से कम अंतर से हारी सीटों की समीक्षा पृथक से यहां पुराने प्रत्याशी यदि इस अंतराल मे सक्रिय रहे है तो उन्हें प्राथमिकता। 10 . दो या अधिक बार यदि अन्य दल/ निर्दलीय प्रत्याशी रहते हुए पराजय मिली है तो टिकट नही। 11 . पेराशूट नेताओं को टिकट नहीं  (अन्य राजनीतिक दलों के)   12 . वर्तमान विधायकों के कार्य की समीक्षा कर 40% विधायकों टिकट नहीं 13 . 30% युवाओ को टिकट में प्राथमिकता।

ऐसे कई ओर चीजों पर कांग्रेस हाईकमान ने मंथन किया हे कांग्रेस हर हाल में मध्य प्रदेश, राजस्थान एवं छत्तीसगढ़ के विधान सभा चुनाव जीतना चाहती है

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