निजी स्कूलों की किताबों का ठेका मात्र इन्ही दुकान को ….

स्कूल संचालकों द्वारा चुनिंदा दुकानों से बच्चों का कोर्स खरीदने पर विवश किया जा रहा है ,  जो किताब 10 रुपए की मिलती है, उसे कमिशनखोरी के चलते यहां पर 90 से 120 रुपए में बेचा जा रहा है….

नगर में प्रायवेट स्कूल संचालकों व स्टेशनरी एवं स्कूल ड्रेस विक्रताओं का शक्तिशाली गठजोड़ अब अभिभावकों और पालकों पर भारी पड़ने लगा है। कुछ निजी स्कूल संचालक विद्यार्थियों को किताब, कापी बेचकर अपनी जेब भर रहे हैं तो कुछ चुनिंदा स्टेशनरी व स्कूल ड्रेस दुकानों से सांठगाठ कर रखी है।

बाजार में जो किताब 10 रुपए की मिलती है, उसे कमिशनखोरी के चलते यहां पर 90 से 120 रुपए में बेचा जा रहा है। स्कूल संचालकों द्वारा चुनिंदा दुकानों से बच्चों का कोर्स खरीदने पर विवश किया जा रहा है। नगर में गोलगंज में चार दुकान वहीं शनिचरा बाजार 2 दुकाने चर्चा का विषय बनी हुई है। इसका कारण यह है कि नगर के अधिकांश निजी स्कूलों का कोर्स एवं स्कूल ड्रेस केवल इन्ही चुनिन्दा दुकानों के यंहां मिल रहा है। वैसे नगर में दो दर्जन से अधिक स्टेशनरी व्की रेडीमेट  दुकानें हैं। हालांकि इसकी जानकारी जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को है। लेकिन वह अभिभावकों और पालकों की शिकायत के इंतजार में बैठे हैं।

हजार से पांच हजार तक कोर्स :- निजी स्कूलों का कोर्स नगर की इन्ही स्टेशनरी दुकान में मिल रही है। नर्सरी से लेकर हाई स्कूल व हायर सेकंडरी एवं सीबीएससी स्कूलों का कोर्स 1500 से 5000 रुपए में मिल रहा है।

दस वर्ष में एक भी कार्रवाई नहीं :- चौंकाने वाली बात तो यह है की आज तक जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग ने किसी भी प्रकार की कार्रवाई न तो स्कूल संचालकों पर किया है और स्टेशनरी दुकान संचालकों पर। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि स्कूल संचालकों और स्टेशनरी दुकान संचालकों का गठजोड़ कितना प्रभावशाली है।पिछले दिनों sdm ने 2 दुकानों व् 2 स्कुलो पर छापा मार कारवाही की थी परन्तु मामल राजस्व और शिक्षा विभाग के बिच उलझकर रहा गया , जिला शिक्षाधिकारी ने दिखावा मात्र के लिए नोटिस जारीकर इतिश्री कर दी !

हर साल कर देते हैं बदलाव :- निजी स्कूल संचालक हर वर्ष कोर्स में थोड़ा बहुत बदलाव कर देते हैं। इस कारण पुरानी किताब एक भी विद्यार्थी उपयोग नहीं कर पाता है। मजबूरी में सभी पालकों और अभिभावकों को हर वर्ष नया कोर्स खरीदना पड़ता है।

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