छह माह में ही तीन बार तबादले से परेशान IPS , मुख्य सचिव से लगाई गुहार …

बार बार तबादले से परेशान पिछले दिनों एक महिला तहसीलदार ने मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक को पत्र लिखकर अपनी पीड़ा बताई थी| अब एक IPS अफसर का दर्द झलका पड़ा

इन दिनों मध्य प्रदेश में प्रशासनिक सर्जरी का दौर जारी है|  अधिकारियो के थोकबंद तबादला होने से न सिर्फ अधिकारी का स्थान बदल जाता है, बल्कि उसके परिवार को भी परेशानी झेलनी पड़ती है| लेकिन यह सब सर्विस रूल के तहत होता है| बार बार तबादले से परेशान पिछले दिनों एक महिला तहसीलदार ने मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक को पत्र लिखकर अपनी पीड़ा बताई थी| अब एक आईपीएस अफसर का दर्द झलका पड़ा |

MP कैडर के एक वरिष्ठ IPS अधिकारी बार बार तबादले से दुखी हैं| छह माह में ही तीन बार तबादले से परेशान होकर अधिकारी ने मुख्य सचिव बीपी सिंह को अपनी पीड़ा बताई है| अधिकारी का कहना है कि बार-बार ट्रांसफर से पारिवारिक जिंदगी में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है। यह अधिकारी हैं मध्यप्रदेश कैडर के 1994 बैच के IPS अफसर राजा बाबू सिंह| जिन्हे हाल ही में पुलिस महानिरीक्षक सुरक्षा एवं समन्वय मप्र भवन नई दिल्ली से पुलिस महानिरीक्षक विसबल जबलपुर पदस्थ किया गया है| इससे पहले उनका इसी साल तीन बाद तबादला हो चुका है| उन्होंने सीएस को लिखे पत्र में कहा है कि पिछले छह माह में तीन बार उनका तबादला हो चुका है। बार-बार तबादला होने से उनकी पारिवारिक जिंदगी में व्यवधान हो रहा है।

बेटियों को भी जरुरत मेरी  :- IPS अधिकारी ने अपने पत्र में मांग की है कि मेरी पोस्टिंग यथावत रहने दी जाए। क्योंकि पिछले छह माह में तीन तबादले झेल चुका हूं। उन्होंने लिखा तबादलों से न सिर्फ मानसिक मिलती है, बल्कि मेरे परिवार भी परेशान होता है| उन्होंने बताया कि डॉ बेटियां हैं जो उच्च शिक्षा में है और दिल्ली और एनसीआर के अलग अलग कॉलेजों में पढ़ रही हैं और इस पड़ाव पर जब उन्हें मेरी उपस्थिति और निर्देशन की आवशयकता है|

वीरता पदक से सम्मानित :- राजाबाबू सिंह मध्य प्रदेश कैडर के वरिष्ठ IPS अफसर हैं और उन्हें वीरता पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है| राजा बाबू उत्तरप्रदेश के बांदा जिले के पचनेही के रहने वाले हैं, उन्हें बुंदेलखंड क्षेत्र का गौरव मानते हुए वीरता के लिए पुलिस पद से सम्मानित किया जा चुका है। तब राजाबाबू भिंड में पुलिस अधीक्षक के तौर पर कार्यरत थे और उन्होंने कई दस्यु गिरोहों का साहसिक ढंग से सफाया कर दिया था। वे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भारत-तिब्बत सीमा पर भी रह चुके हैं। उन्हें अरुणाचल प्रदेश में कमांडर के रूप में भी पदस्थ किया गया था।

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