कंडोम के चलते छेड़छाड़ का शिकार हो रही है आशा-उषा ….

सरकार महिलाओं के सम्मान की बात करती है। वहीं दूसरी ओर उनके अपमान के लिए आशा कंडोम बंटवाने को मजबूर कर रही…
एक बार आशा मिल जाए तो सारे हसरत पूरी हो जाए। क्या यही सोचकर सरकार ने कंडोम का नाम आशा रखा है ? गर्भ निरोधक बांटने के दौरान आशा कार्यकर्ताओं को अश्लील कमेंट के कारण शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है…. 
केंद्र सरकार द्वारा फैमिली प्लानिंग प्रोग्राम के तहत परिवार नियोजन के लिए सप्लाई किए गए गर्भ निरोधक का नाम ‘आशा कंडोम’ रखने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में इन कंडोम के बांटने का काम आशा कार्यकर्ताओं को सौंपा हुआ है, जिन्हें गर्भनिरोधक बांटने के दौरान अश्लील कमेंट के कारण शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है। इससे परेशान आशा कार्यकर्ताओं की संस्था मध्यप्रदेश आशा-उषा कार्यकर्ता संगठन ने स्वास्थ्य मंत्री रुस्तम सिंह को लिखित में कंडोम के नाम को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है। साथ ही राज्य और केंद्र सरकार द्वारा कंडोम के नाम में संशोधन नहीं किए जाने पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में पीआईएल लगाने का फैसला लिया है। वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य संचालनालय के अफसर नाम में संशोधन से इनकार कर रहे हैं।
छेड़खानी का शिकार बन रही हैं आशा स्वास्थ्य कार्यकर्ता :- मप्र आशा-उषा कार्यकर्ता संगठन की प्रदेश अध्यक्ष विभा श्रीवास्तव ने बताया कि कंडोम के नाम आशा होने के कारण स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से छेड़खानी की जाती है। शरारती लोग कंडोम का नाम लेकर मजाक उड़ाते हैं। आशा कार्यकर्ता को गर्भनिरोधक बांटने के दौरान उस समय सबसे ज्यादा परेशानी होती हैं, जब एक साथ 2 से 5 लड़के समूह में कंडोम लेने पहुंचते हैं।
गर्भ निरोधक को लेकर अश्लील कमेंट करते हैं लोग :- आशा कार्यकर्ता कौसर खान बताती हैं कि गांवों में प्रसूताओं की डिलेवरी कराना हो या  का काम करना हो या सरकार की तमाम तरह की आशाओं का काम एक आशा कार्यकर्ता के भरोसे पूरा कराया जाता है। लेकिन इन दिनों सरकार के कंडोम का नाम आशा के नाम पर रखने से आते-जाते लोग भद्दे तरीके कमेंट करते हैं कि एक बार आशा मिल जाए तो सारे हसरत पूरी हो जाए। क्या यही सोचकर सरकार ने कंडोम का नाम आशा रखा है। एक तरफ तो सरकार महिलाओं के सम्मान की बात करती है। वहीं दूसरी ओर उनके अपमान के लिए आशा कंडोम बंटवाने को मजबूर कर रही है।
सरकार की अपील का उल्टा अर्थ निकालते हैं लोग :- आशा कार्यकर्ता गीता देवी कहती हैं कि सरकार लोगों से सरकारी योजनाओं की जानकारी के लिए यह अपील करती है कि आशाओं से मिलो, लेकिन लोग इसका उल्टा अर्थ निकालकर हमारे पास पहुंच जाते हैं। वो कहते हैं कि सरकार ने कहा कि आप से मिलो और मदद लो। सरकार द्वारा कंडोम का नाम आशा रखने से जिंदगी जीना मुश्किल हो गया है। हर रोज छेड़छाड़ होती है। लेकिन किसी से इसलिए नहीं कह पाते कि नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा।
लगाएंगे जनहित याचिका :- पॉलिटिकल एक्टिविस्ट कोमल जायसवाल का कहना है कि सरकार को 15 दिन का समय दिया है। ताकि वो कंडोम का नाम बदल ले। इसके बाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करेंगे।
केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखेंगे :- नेशनल हेल्थ मिशन, मप्र के एमडी एस विश्वनाथन के मुताबिक, कंडोम का नाम आशा होने से परिवार नियोजन कार्यक्रम पर हो रहे असर का हवाला देकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को चिट्ठी लिखेंगे। आशा कार्यकर्ताओं की आपत्ति जायज है।
साभार :- मिडिया रिपोर्ट
Share News

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published.