70 भाजपा विधायको का टिकट कटना लगभग तय …

संघ के लिए मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव इसलिए भी अहम माने जा रहे हैं क्यूंकि यह राज्य आरएसएस के गढ़ है|  आरएसएस के सर्वे के बाद 60 से 70 सिटिंग विधायकों के टिकट कटना तय माना जा रहा है| यह वो विधायक है जो पार्टी और सरकार के निर्देश के बाद भी जनता से दूर रहे| केंद्र और राज्य की योजनाओं को जनता तक पहुंचने में नाकाम रहे| संघ का मानना है कि इन राज्यों की सरकारों ने बेहतर काम किया है लेकिन यह विधायक सरकार की योजनाओं और कामों को ठीक ढंग से जनता तक पहुँचाने में नाकाम रहे हैं| एंटी इंकम्बेंसी से जूझ रही पार्टी के चौथी बार सरकार बनाने की जिम्मेदारी अब संघ ने ले ली है और दत्तात्रेय होसबोले ने इस पर जमीनी काम करना शुरू कर दिया है| सूत्रों के मुताबिक कई बड़े नेताओं के टिकट भी कटेंगे, जिनकी किसी को उम्मीद न हो| मध्य प्रदेश में तीन बार से सत्ता में काबिज भाजपा को चौथी बार सरकार बनाना आसान नहीं होगा, इसके लिए संगठन ने भी यह तय कर लिया है कि इस बार टिकट काटने में भी कोई सोच विचार नहीं किया जाएगा| नॉन परफ़ॉर्मर विधायकों के टिकट कटना तय है| दत्तात्रेय होसबोले भी इसके संकेत दे चुके हैं| नए चेहरों की भी तलाश की जा रही है| जिससे यह अनुमान लगाया जा सकता है आने वाले समय में मध्य प्रदेश में बड़ी उथल पुथल शुरू होने वाली है, चुनाव से पहले बड़ा फेरबदल होगा | जिन विधायकों के टिकट कटने वाले हैं उन्हें बार बार सक्रियता बढ़ने को कहा गया लेकिन जनता के बीच वो नहीं पहुंचे, ऐसे नेताओं में कई मंत्रियों के नाम भी है जिनके खिलाफ उनके ही क्षेत्र में आक्रोश है| हालही में आये दो सर्वे ने भाजपा और संघ की मुश्किलें बढ़ा दी है, जिसमे यह तय माना जा रहा है कि लगभग 70 विधायकों के टिकट कटेंगे|

सर्वे में भी विधायकों की हालत खराब :- भाजपा हाईकमान ने जहाँ साल के आखिरी में जिन राज्यों में चुनाव होना है। वहां बड़े राज्य खास भाजपा शासित राज्य मप्र, छत्तीसढ़ एवं राजस्थान में खुद सर्वे कराया है। सर्वे एक साल के भीतर दो बार हो चुका है। दोनों ही सर्वे रिपोर्ट में  भाजपा की हालत खराब बताई गई है। पहला सर्वे पिछले साल के अंतर में कराया था। दूसरी डाटा हाल ही में एकत्रित किया गया है। जिसमें विधायकों की परफॉर्मेँस को प्रमुखता से देखा गया है। ज्यादा विधायक भाजपा हाईकमान के टेस्ट में अनफिट रहे हैं। बताया गया कि पिछले एक साल के दौरान राज्य में किसान आंदोलन ज्यादा हुए हैं। सरकार ने किसान आंदोलनों को दबाने की पूरी कोशिश की है। यही कारण है कि मप्र की भाजपा सरकार की झोली में रहने वाला किसान अचानक झोली से बाहर निकल गया है। ग्रामीण क्षेत्र में मप्र भाजपा ने भी सर्वे कराया। उसकी रिपोर्ट भी अनुकूल नहीं थी।  भाजपा हाईकमान द्वारा मप्र की जमीनी हकीकत टटोलने के लिए जो सर्वे कराया है, उसमें भाजपा की हालत बेहद खराब है। यदि पार्टी माजूदा 165 विधायकों के भरोसे फिर से 2018 का विधानसभा चुनाव लड़ती है तो 100 से ज्यादा विधायको हार का सामना करना पड़ सकता है। सर्वे रिपोर्ट में 104 विधायकों पर सीधे तौर पर हार का खतरा बताया है। जिनमें से शिवराज सरकार के आधे मंत्री भी शामिल है। खाास बात यह है कि 70 विधायक तो ऐसे हैं, जिनका टिकट कटना लगभग तय हो चुका है। जबकि 30 विधायकों को खराब परफार्मेंस के बावजूद भी टिकट मिल सकता है, लेकिन उनकी जीत-हार का फैसला विपक्ष के प्रत्याशी चयन पर निर्भर करेगा। मप्र के जमीनी सर्वे के बाद भाजपा हाईकमान प्रत्यक्ष रूप से विधानसभा चुनाव में संगठन की कमान खुद संभालने की तैयारी में है।

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