जागरूकता के नाम पर प्रति माह लाखो का फर्जीवाड़ा….

एक भी उपयंत्री और हैन्डपम्प टैकनिशियन मुख्यालय पर नही रहते है , उपयंत्री और विकासखंड स्रोत समन्वयक प्रति माह कर रहे है लाखो रुपयों का फर्जीवाड़ा , शासकीय वाहनो  का दुरूपयोग ….

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के साथ जल बोर्ड के माध्यम से लोगो में जन जागरूकता पैदा कर पानी के महत्व को समझाते हुए गुणवत्ता पूर्ण जल का सेवन करने की सलाह दी जा रही है ! यह कैम्पेन पूरे प्रदेश में चल रहा है इसके लिए भरपूर अमला जमीनी स्तर पर भेजा गया है जिसमे सरकार करोड़ो रूपये पानी की तरह वहा रही है !

प्रदेश के अन्य जिलो की तरह छिन्दवाड़ा जिले में भी जल बोर्ड के माध्यम से जिले के सभी 11 विकासखंडो में एक एक विकासखंड स्रोत समन्वयक की नियुक्ति की गई है ! दरअसल जल बोर्ड के माध्यम से प्रत्येक विकासखंड स्रोत समन्वयक को प्रत्येक ग्राम में जाकर ग्राम निवासीयो को पानी के महत्व के लिए जागरूक करना ,स्वच्छता का प्रचार प्रसार ,जल स्रोतों की जानकारी एकत्र कर महिला पुरुषो को प्रशिक्षण देना ताकि वे विभाग द्वारा प्रदाय किटो के माध्यम से जल परिक्षण कर गुणवत्ता पूर्ण पानी की पहचान कर उन जल स्रोतों का उपयोग पीने के पानी के लिए कर सके ! परन्तु ये विकासखंड स्रोत समन्वयक अपने कर्तव्यो का निर्वहन ठीक ढंग से नही कर रहे है ! इसके पीछे की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है !

विकासखंड स्रोत समन्वयक ग्रामीण अंचलो में नही जाते है जो कार्य विकासखंड स्रोत समन्वयको को करना चहिये उनका कार्य PHEपी एच् ई के सब इंजीनियर अपने अधिनस्त हैन्डपम्प टैकनिशियानो पर दवाव बना कर करबा रहे है! इसके एवज में इन्हे एक पैसा भी नही दिया जाता है !, और विकासखंड स्रोत समन्वयक को मिलने बाले यात्रा भत्ता , भोजन भत्ता ,(taTa , Da) एवं प्रशिक्षन के नाम पर मिलने बाली समस्त (जो लगभग 50 हजार रूपये प्रति माह) राशि के फर्जी बिल बाउचर बना कर लमसम राशी डकार रहे है !

यहाँ मजे की बात यह है की जिले भर के समस्त उपयंत्री और लगभग १२५ हैन्डपम्प टैकनिशियन

मुख्यालय पर नही रहते है, जिससे ग्रामीण अंचलो में आम लोगो को महीनों हैन्डपम्प सुधार का कार्य नही होता है इसके बदले लोगो को दूषित पेयजल पीने को मजबूर होना पड़ता है ! ऐसा नही की इन सब की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को नही है परन्तु वरिष्ठ अधिकारी इन उप यंत्रियो का कुछ नही बिगाड़ पाते है  क्योंकी यहाँ पदस्त अधिकांश उपयंत्रियो का नरा यहीं गडा है कहने का मतलब ये उपयंत्री नियुक्ति दिनांक से यहीं पर पदस्त है और कुछ रिटायर होने की कगार पर है और लोकल की राजनिति में अपनी सक्रिय भूमिका का निर्वहन करते है ! ये सभी लोगो छिन्दवाड़ा में निवास करते है !

ऐसे ने सरकार की मंशा कैसे पूरी होगी ? जनता ऐसे ही दूषित पेयजल पिने को मजबूर होगी या इन सब कारगुजारियो पर संज्ञान लेकर दोषियों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जानी चहिये और बरसों से इस जिले में पदस्त उपयंत्रियो और हैन्डपम्प टैकनिशियनो को अन्यंत्र जिलो में तबादले पर भेजना ही इसका कारगर इलाज होगा ? तभी यह बिमारी ठीक होगी !

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