3 कलेक्टरो के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश….

42 लाख के गबन करने के मामले में IAS अफसर जीपी तिवारी, शिवानंद दुबे और लोकेश जाटव के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश ….

गरीबों के 42 लाख रुपए का गबन करने के मामले में मप्र विधानसभा की लोक लेखा समिति ने राजगढ़ जिले में कलेक्टर रह चुके तीन आईएएस अफसरों को दोषी माना है। सितंबर 2007 से 2010 के बीच जिले में कलेक्टर रह चुके इन अफसरों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल होगा।

समिति ने आईएएस अफसर जीपी तिवारी, शिवानंद दुबे और लोकेश जाटव के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है। सामाजिक न्याय विभाग के प्रमुख सचिव ने तत्कालीन कलेक्टर्स और विभाग के तत्कालीन उपसंचालकों पर कार्रवाई का आश्वासन भी दिया है।

मामला यह है :-  हर जिले में कृषि उपज मंडी समिति और अन्य स्रोतों से निराश्रित निधि की रकम संग्रहित की जाती थी। यह पैसा स्थानीय कोषालय में जमा होता था। सरकार ने कलेक्टर्स को निराश्रित निधि के ब्याज से दो लाख रुपए तक खर्च करने के अधिकार दिए थे। इससे ज्यादा राशि खर्च करने के लिए विभाग की अनुमति लेना जरूरी था।

राजगढ़ जिले में सितंबर 2007 से मई 2010 तक 17 चेक के जरिए नियमों के विरुद्ध 42 लाख रुपए निकाले गए। कुछ चेक से नियमों के विपरीत 2 लाख रुपए से ज्यादा की रकम निकाली गई थी। ऑडिट रिपोर्ट में आपत्ति के बाद जांच की गई तो सामाजिक न्याय आयुक्त ने रोकड़िया को गबन का दोषी माना। भोपाल संभाग आयुक्त ने भी जांच में गबन की पुष्टि की। इसके बाद 2013 में शासन स्तर पर भी एक जांच कमेटी बनाई गई।

समिति ने कलेक्टर्स को भी माना दोषी :- मामला लोकलेखा समिति में आया तो समिति ने इस गबन का विभागीय उप संचालकों से ज्यादा कलेक्टर्स को दोषी माना, क्योंकि उनके द्वारा विभाग के निर्देशों के विपरीत पैसा निकाला गया। समिति के सामने उपस्थित हुए विभाग के प्रमुख सचिव ने भी उपसंचालकों और कलेक्टर्स दोनों को दोषी माना।

समिति ने कहा कि दोषी तत्कालीन कलेक्टर्स के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। जांच में यह भी पाया गया था कि तत्कालीन उपसंचालक और कलेक्टर्स द्वारा चेक पर हस्ताक्षर करने से मना किया गया था, फिर भी चेक पर उनके हस्ताक्षर मौजूद हैं। ऐसे में जाली हस्ताक्षर की जांच करने के लिए हैंड राइटिंग एक्सपर्ट की मदद लेने के निर्देश दिए गए हैं। समिति का कहना है कि कलेक्टर्स ने 2 लाख रुपए से ज्यादा की रकम निकालकर विभागीय निर्देशों का उल्लंघन किया है, इसलिए उन पर भी कार्रवाई की जाए।

समिति ने 15 दिन के अंदर अधिकारियों पर कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है और कलेक्टर्स के खिलाफ आरोप पत्र जारी करने में जिन कर्मचारियों ने देरी की, उन पर भी कार्रवाई की जाएगी। 2007 से 2010 के बीच राजगढ़ जिले में सामाजिक न्याय विभाग के दो उप संचालक पदस्थ थे।

इनमें से एमके त्रिपाठी ने 15 चेक से 34 लाख रुपए निकाले थे। समिति ने त्रिपाठी की सेवानिवृत्ति से पहले इस राशि की वसूली के निर्देश दिए हैं। वहीं एक अन्य उप संचालक मीना श्रीवास्तव 2014 में रिटायर हो चुकी हैं। उनके खिलाफ भी सामान्य प्रशासन विभाग और विधि विभाग से सलाह लेकर मामला दोबारा खोला जाएगा।

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