यहाँ तो बागड़ (मेड) ही खेत निगल रही है….

लावाघोघरी के जंगलो में बेखोफ कटाई , सागौन के पेड़ की आग से उतर रही है शराब , रेंज से रेंजर लापता ……

  पर्यावरण में संतुलन लाने के लिए जहाँ सरकारे प्रति बर्ष करोड़ो रूपये खर्च कर पूरे देश प्रदेश ने पौध रोपण कर रही है और इस कार्य ने जनता भी अपनी भागेदारी बखूवी निभा रही है ! परन्तु वन विभाग के लोग ही अपनी भूमिका का निर्वहन ठीक ढंग से नही कर रहे है इसका जीता जागता उदाहरण छिन्दवाड़ा जिले के दक्षिण वन मण्डल के लावाघोघरी वन परिक्षेत्र ने देखने को मिल जाएगा, जहाँ वन परिक्षेत्र अधिकारी अपने कर्तव्यो का निर्वहन नही कर मात्र आला अधिकारियो को खुश करने के लिए डिविजन कार्यालय ने ही चाकरी करते आसानी से नजर आ जाते है! नाममात्र को ही ये फिल्ड जाते है इसका खामियाजा बेचारे मूक वर्क्षो को कुल्हाड़ी की मार से असमय ही मौत का सामना करना पड रहा है !

लावाघोघरी रेंज में जंगल माफियो का राज है ! इस रेंज में पड़ने बाले गाँवो में वन विभाग के अमले ने मानो जंगल को वन माफिया के हाथो सौंप दिया है और चंद सिक्को के खातिर ये प्रक्रति के साथ खिलवाड़ कर रहे है ! ग्रामीण भी बेखोफ होकर जलाऊ पेड़ो के साथ साथ बेशकीमती इमारती लकड़ी भी काट कर जलाऊ के तौर पर उपयोग कर रहे है ! जो आसानी से उनके घरो के सामने ही ढेर के ढेर देखा जा सकती है !

और यही आलम लावाघोघरी रेंज में पड़ने बाले ग्राम पश्चिम पलासपानी, पूर्व पलासपानी,बारिघाट , लोहांगी , देवगड़ ,गोविन्दगड, विजयगड के जंगलो में कटाई जोरो पर चल रही है ! इन क्षेत्रो में बड़ाई का काम करने बाले लोगो के दलाल क्षेत्र में सक्रिय है जो ओने पौने दामो में सागौन का फर्नीचर बना कर शहरों तक आसानी से पहुचा रहे है ! ये सब कैसे हो सकता है रेंजेर के रहते ?

जानकार बताते है की रेंजर साहब की तगड़ी सैटिंग के चलते यह सब बेखोफ चल रहा है ! जंगल में कुल्हाड़ी चलने की आबाज चंद सिक्को की खनक के आगे सुनाई नही देती है ? इस सब की अनदेखी आखिर अनेको सवालों को जन्म देती है ? और ऐसा आखिर कब  तक चलता रहेगा ?

लावाघोघरी रेंज में पदस्त एक छोटे से बाशिंदे ने नाम न छपने की शर्त पर बताया की यहाँ वन विभाग के अमले का डर ग्रामीणों में तनिक भर भी  नही है यहाँ पर धडल्ले से जंगलो की कटाई होती है और तो  और आपको जानकर आश्चर्य होगा की जंगल में कीमती सागौन लोग अपने घरो में जलाकर घर का खाना पकाया करते  है  यह किस्सा यहीं तक समाप्त नही होता बल्कि महुए की कच्ची शराब के तश्कर इन्ही बेशकीमती झाडो को काट कर महुए की कच्ची शराब उतारने के लिए भट्टी में जलाते है !

बाशिंदे की बात पर खबरद्वार  की टीम ने पड़ताल की तो एकाएक आँखों पर यकीन नही हो रहा था , यह द्रश्य किसी भी पर्यावरण प्रेमी को सदमे में डालने बाला था ! बाशिंदे की एक एक बात सोलह आने सच थी !

वन परिक्षेत्र अधिकारी से बार बार सम्पर्क करने पर भी उनके द्वारा मोवाइल नही उठाया गया ! खैर ….

गाँवो में कहाबत है की जब बागड़ (मेड) ही खेत निगलने लगे तो ,विनाश सुनिश्चित है जिनके हाथो में सुरक्षा की जिम्मेदारी हो और बो ही उसका सौदा करने लगे तो अपेक्षा किससे की जा सकती है ? परन्तु हम अब भी सकारात्मक सोच रखते है की रेंजर के उपर के आलाधिकारी इस पर संज्ञान लेकर उचित कार्यवाही कर निक्क्म्मे हाथो से जिम्मेदारी की लगाम उचित हाथो में सौपेंगे ! ताकि जंगलो का विनाश होने से बचाया जा सके और पर्यावरण संरक्षण जैसे बिषयो पर लोगो को जागरूक कर मानव जाति को विनाश के मुहाने से दूर किया जा सके !

Share News

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published.